ग्राम चौपाल

प्रेमचंद का गांव….”लमही” ढूंढ़े नहीं मिलते होरी.. धनिया.. घिसू और माधव

चंद्रबिंद सिंह कथा सम्राट प्रेमचंद का गांव अर्थात ‘गोदान’ में चित्रित होरी का गांव। यदि किसी व्यक्ति की हिन्दी कथा-साहित्य में थोड़ी भी रुचि होगी तो वह कम से कम प्रेमचंद के कथा साहित्य से परिचित होगा और प्रेमचंद के कथा – संसार के लगभग पात्र ग्रामीण परिवेश से आते हैं। मेरी उन पात्रों के …

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स्मृतियों में बसा है गांव रसलपुर

विभाष कुमार मिश्र मैथलिशरण गुप्त ने साकेत में , सीता के मन में उनके वास्तविक घर कौन है इस संदर्भ में एक मार्मिक प्रसंग लिखा है । जिसमें वे सीता के मन के द्वंद्व को इस प्रकार लिखते है “ मिथिला मेरा मूल है, आयोध्य मेरा फूल। चित्रकूट को क्या कहूं रहती हूं मैं भूल। …

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गांव सलेमपुर आज भी अपनी पुरातन परंपराओं को सहेजे हुए है…

प्रो बी एस वर्मा देश बदला, समाज बदला, संस्कार बदले, संस्कृतियां तक बदल गयीं। परंतु भारतीय ग्रामीण परंपराओं ने अपना परिवेश नहीं बदला। हमारा गांव सलेमपुर नहीं बदला। कई संस्कृतियां आईं और गयी, परंतु असली भारत वर्ष आज भी ग्रामीण परिवेश में देखने को मिल जायेगा। ऐसा ही एक गांव है सलेमपुर। जो उत्तर प्रदेश …

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दुनिया देखा… पर हर पल सीने में धड़कता रहा है गांव सरोत्तर…

राकेश पांडे, सीएमडी ब्रावो फार्मा व ब्रावो फाउंडेशन नैनों में था रास्ता… हृदय में बसा है गांव साकार होगा जरूर गांव सरोत्तर के तरक्की का सपना..भले छलनी हो जाए पांव!  तो आईए आपको अपने गांव सरोत्तर की ओर लिए चलता हूं।  मोतिहारी का सरोत्तर गांव। आप कह सकते हैं कि हमारा गांव सरोत्तर बाबू साहब …

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गांव सिरिसिया…आर्थिक संपन्नता से पैदा हुए अभिमान ने गंवई स्वाभिमान को ढ़क दिया

भानु प्रताप सिंह मेरा गांव सिरिसिया बिहार राज्य के आरा जिला में बबुरा के नजदीक गंगा किनारे का गांव है। ग्रामीण जीवन का आधार सरकार मुक्त जीवन जीने की कला पूर्वजों द्वारा संस्कारित था। हर अपने से छोटों को आचार,विचार, व्यवहार निस्वार्थ भाव से न्योछावर कर देता था, जिससे गांव के युवक युवतियां समाज के …

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विस्थापन का दर्द दिल में लिए…गांव से जुड़ा ही रहा मेरा रिश्ता

अंजनी कुमार फिल्म /टी.वी निर्देशक मेरा जन्म मुंगेर जिले के सहूर गांव में हुआ। ये गांव पंडित कार्यानद शर्मा के गांव के रूप में जाना जाता है। यहीं उनका जन्म हुआ था। मेरी मां श्रीमती ज्योतसना शर्मा और पिता श्री धनंजय सिंह दोनो ही शिक्षक थे। बचपना के बाद मां के तबादले के हिसाब से …

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गांव का नाम, बफापुर बांथू… जिला…लोकतंत्र की जननी वैशाली

मेरा गांव कब आबाद हुआ ये तो ठीक-ठीक कहीं दर्ज नहीं है। लेकिन मेरे गांव का नाम बहुत दिलचस्प है: बफापुर बांथू। बफापुर को लेकर गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस गांव से जो लगान वसूलते थे वो मुस्लिम थे। बहुत पहले की बात है। अगला शब्द है, बांथू। इसके लिए वो कहते हैं …

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भारत में कोरोना महामारी से कैसे लड़ेंगे गांव

अशोक भगत भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर से अभी हम निपट ही रहे थे कि तीसरी लहर की भी आशंका जता दी गई। पहली लहर में भारत के गांव प्रभावित नहीं हुए थे, लेकिन दूसरी लहर में गांवों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। गांवों के स्पष्ट आंकड़े अभी आने बाकी हैं …

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मेरा गांव सजांव… पुरखों ने एक संसार रचा था, हम पूरी शिद्दत से उसे उजाड़ रहे हैं

शिवानंद द्विवेदी मेरा गांव सजांव बिहार सीमा से सटे पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में पड़ता है। मुझे गांव में रहने का ऐसा अवसर शायद बीस साल बाद मिला है। आजकल ‘आपदा में अवसर’ चलन में है। कोरोना नामक इस अदृश्य परिजिवी ने हमें आपदा के अंतहीन लगने वाले दौर में बांध दिया है। …

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विश्व साइकिल दिवस….साइकिल के सहारे कोरोना को मात

अमरनाथ झा आज विश्व साइकिल दिवस है। कहते हैं कि हर आपदा अपने साथ अवसर लाती है।  हर बुराई के साथ कुछ अच्छाई भी आती है। कोरोना-काल में साइकिल का प्रचलन में आना ऐसी ही अच्छाई है। आपदा के दौरान भी एक अवसर छुपा हुआ है। कोरोना जनित लॉक डाउन के खुलने के बाद साइकिल …

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