बस्तर के ‘युवोदय’ से जुड़े युवाओं ने कायम की देशव्यापी पहचान

संतोष कुमार सिंह

बस्तर: कोरोना की आपदा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें इस महामारी की चुनौती से निपटने के लिए गुरूमंत्र देते हुए कहा था कि ​हमें आपदा को अवसर में बदलना है। कहने को ये बहुत छोटी सी बात है और कई लोग इसपर टीका टिप्पणी करते भी नजर आये कि आखिर आपदा को अवसर में कैसे बदला जा सकता है। लेकिन जिस देश की आबादी में युवाओं की बहुतायत हो वो देश भला कैसे हार सकता है। कुछ इसी तरह का कारनामा कर दिखाया है छत्तिसगढ़ के बस्तर संभाग के युवाओं ने जहां पिछले एक वर्ष से ‘युवोदय’ से जुड़े युवाओं ने। 23 सितंबर 2020 को शुरू हुए इस अभिनव पहल की पहचान आज पूरे छत्तीसगढ़ के साथ ही देश में होने लगी है।
जी हां, बस्तर में युवा शक्ति की सबसे बेहतरीन मिसाल के नाम से विख्यात युवोदय’ कार्यक्रम को एक साल पूरे हो गए हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, संस्कृति, पर्यटन, खेलकूद, कृषि, वनोपज, डिजिटल सामग्री और सूचना तकनीक, जल-स्वच्छता, पंचायती राज संस्थाएं एवं बाल संरक्षण सहित लिंग समानता व कोविड-19 के रोकथाम के लिए काम कर रहे युवोदय वालंटियर्स ने जिले के विकास को नया आयाम दिया है।

यूनिसेफ और जिला प्रशासन के तालमेल से बदली तस्वीर
युवोदय की सफलता इसके स्वयंसेवकों के हाथों में है। उनका स्वामित्व और प्रतिबद्धता इस पहल को विशिष्ट बनाती है। युवोदय स्वयंसेवकों का क्षमतावर्धन करने तथा उनके सभी कार्य क्षेत्रों में उनकी सहायता के लिए व उन्हें तकनीकी ज्ञान देने यूनिसेफ जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन के साथ बस्तर जिला प्रशासन ने एमओयू में हस्ताक्षर किया था। जिसके बाद से हजारों की संख्या में मौजूद युवोदय स्वयंसेवकों को विषय विशेषज्ञों के द्वारा नियमित ट्रेनिंग भी दी गई। कलेक्टर रजत बसंल निरंतर युवोदय स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन भी करते आ रहे हैं, जिससे स्वयंसेवकों को नई उर्जा मिलती है।
वर्तमान में युवोदय में 7 हजार से अधिक पंजीकृत वालंटियर्स हैं तथा 3 हजार से अधिक वालंटियर्स सक्रिय रूप से अपने गांव के विकास के लिए अपनी सहभागिता दे रहे हैं। यहां तक ​की छत्तिसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बस्तानार में आयोजित कार्यक्रम में युवोदय के कार्यों की सराहना की। उन्होंने युवोदय के न्यूज़लेटर का विमोचन किया साथ ही उत्कृष्ट कार्य के लिए युवोदय वॉलिंटियर्स को सम्मानित किया गया था।


हर स्तर पर मिसाल कायम करता युवोदय
युवोदय के गठन के बाद से ही जिले के विकास की दिशा में और लोगों को पोषण व स्वच्छता और कोविड-19 के प्रति जागरूक करने की ओर कई कार्य किए गए। इसमें ‘दु पाईडल सुपोषण बर’ कार्यक्रम, सुपोषण दान कार्यक्रम, पुस्तक दान कार्यक्रम, सुपोषण वाटिका अभियान, रक्तदान शिविर, दिव्यांगजनों का शिविर, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन, यूनिसेफ द्वारा उन्मुखीकरण एवं क्षमतावर्धन कार्यशाला सह-प्रशिक्षण, कोविड टीकाकरण अभियान, आमचो सुघ्घर गार्डन अभियान, जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में युवोदय स्वयंसेवकों ने अपनी सहभागिता दी।

 

कोरोना में बन के आये देवदूत
युवोदय वालंटियर्स के द्वारा बस्तर जिले के सभी ग्राम पंचायत में आँगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, सरपंच, सचिव के साथ घर-घर जाकर लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया गया एवं टीकाकरण केंद्र ले जाकर उनका रेजिस्ट्रेशन कर टीका लगवाया गया। अब तक करीब 37 हजार से भी अधिक लोगों को जागरूक कर उनका टीकाकरण कराया गया।
बस्तर में पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए युवोदय स्वयंसेवक लगातार कुपोषित बच्चों के घर-घर जाकर उन्हें पोषण आहार के बारे में बता रहे हैं साथ ही पोषण पुनर्वास केंद्र की जानकारी देकर वहां ले जाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को 1 हजार दिन, तिरंगा भोजन की विशेषताओं के बारे में बताकर अपना ख़ास ख़्याल रखने एवं संस्थागत प्रसव करने का संदेश दे रहे हैं। युवोदय स्वयंसेवक लगातार स्वस्थ व्यवहारों को बढ़ावा देने के प्रति और जनजागृति के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पोषण के साथ ही कला, संस्कृति एवं पर्यटन के क्षेत्र में भी युवोदय अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। पर्यटन स्थलों में साफ-सफाई को लेकर वह पर्यटकों को भी जागरूक कर रहे हैं। चित्रकूट महोत्सव में आयोजित खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, एडवेंचर स्पोर्ट्स के आयोजन में युवोदय वालंटियर्स द्वारा सहयोग किया गया व स्वच्छता अभियान से जागरूकता रैली निकाली गई साथ ही प्लास्टिक मुक्त आभियान हेतु रैली के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया।
बस्तर में अब मूलभूत व्यवस्थाओं के विकास में तेजी आएगी। ‘युवोदय’ के तहत प्राप्त अनुभव से, स्वयंसेवकों की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और उन्हें व्यवसाय और उद्योग क्षेत्र में बेहतर अवसर मिलेंगे।

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