रिकॉर्ड टीकाकरण समेत कोविड उपयुक्त व्यवहार सुनिश्चित करने में सोशल मीडिया की अहम भूमिका: यूनिसेफ

संतोष कुमार सिंह

​पटना: लोक महत्व का चाहे कोई भी मुद्दा हो लोक से जुड़े संचार का अपना अलग महत्व है। आज के दौर में तमाम परंपरागत संचार माध्यमों के बीच सोशल मीडिया ने जिस तरह से अपनी जगह बनाई है, उससे साफ जाहिर है कि सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। लेकिन कहते हैं न कि माध्यम वो दोधारी तलवार है जो दोनों तरफ वार करता है। सोशल मीडिया भी इससे अलग नहीं है। चाहे कोई भी मसला हो सोशल मीडिया के माध्यम से सकारात्मक खबरें भी लोगों तक पहुंचती है और नकारात्मक खबरें भी तेजी से वायरल होती हैं और भ्रम के स्थिति का कारण बनती है।
यदि कोविड जैसे महामारी की ही चर्चा करें तो हमने ये साफ तौर पर देखा है कि कोरोना और टीकाकरण को लेकर तमाम भ्रामक खबरें सोशल मीडिया पर फैलाईं गईं लेकिन सकारात्मक खबरों और टीकाकरण की आवश्यकता,सोशल डिस्टेसिंग,लॉक डाउन,कोरोना राहत आदी की खबरें भी सोशल मीडिया पर पूरे जोर शोर से रखी गईं और इसकी वजह से सकारात्मक माहौल भी बना। इस तरह से यह देखा गया कि कोविड काल में इसकी प्रासंगिकता और भी ज़्यादा बढ़ गई है।

बिहार में वैसे तो कोरोना टीकाकरण अभियान में लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी की लेकिन कोरोना की तीसरी लहर की आशंका व बाढ़ जैसी आपदा और कोविड महामारी के दौरान बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्ग के लोगों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। इस संदर्भ में सोशल मीडिया की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
इसी विषय को लेकर ‘मिशन सुरक्षाग्रह: कोविड पर हल्ला बोल’ के तहत यूनिसेफ बिहार और तीन सहयोगी एनजीओ – बिहार सेवा समिति, घोघरडीहा प्रखंड स्वराज्य विकास संघ एवं आगा खान ग्राम समर्थन कार्यक्रम (भारत) के संयुक्त तत्वावधान में एक ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में छह जिलों- मधुबनी, दरभंगा, पूर्णिया, सुपौल, सीतामढ़ी और मुज़फ्फ़रपुर के विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठनों, मिशन सुरक्षाग्रह के सदस्यों व सुरक्षा प्रहरियों समेत लगभग 250 लोगों ने भाग लिया।

 

इस मौके पर यूनिसेफ बिहार की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने कहा कि सोशल मीडिया की अहमियत से हम सब वाकिफ हैं। हाल में बिहार सरकार द्वारा कोविड टीकाकरण महाअभियान के दौरान लोगों को मोबिलाइज करने में व्हाट्सऐप ग्रुप्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का काफी योगदान रहा है. इसीप्रकार, कोविड उपयुक्त व्यवहार के प्रति लोगों को जागरूक करने में भी इसकी उल्लेखनीय भूमिका रही है। इसके माध्यम से हम स्थानीय स्तर पर हो रही गतिविधियों को भी पूरी दुनिया तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने इस बात को लेकर आगाह किया किहमें पूरी जिम्मेदारी के साथ इसका इस्तेमाल करना चाहिए। हमारी जरा सी लापरवाही इस तकनीकी वरदान को अभिशाप में बदलने में सक्षम है। इस संदर्भ में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ा मसला है। इसके लिए साइबर सेल व अन्य संबद्ध विभागों की सहायता लेने में तत्परता दिखानी चाहिए। किसी व्यक्ति विशेष से संबंधित कोई फोटो अथवा वीडियो पोस्ट या ट्वीट करने के पहले हमें उनकी लिखित अनुमति (कंसेंट) लेना आवश्यक है। ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली संस्थाओं व संगठनों को इसे अपनी कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना चाहिए।

जाने माने ब्लॉगर, लेखक और सोशल मीडिया एक्सपर्ट आनंद कुमार ने कहा कि 2012 में प्रकाशित 5 करोड़ आंकड़े की तुलना में आज भारत में फ़ेसबुक यूजर्स की संख्या लगभग चार गुना बढ़ गई है। बिहार की भी तक़रीबन 40 फ़ीसदी आबादी फ़ेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर एक्टिव है। सोशल मीडिया के विभिन्न आयामों पर रौशनी डाली। फेसबुक पेज पर बेहतर पोस्ट या ट्वीट के संबंध में उन्होंने कहा सिर्फ आंकड़े पड़ोसने से बात नहीं बनने वाली इसके बजाए हम पोस्ट को कहानी में पिरोकर हम ज़्यादा प्रभावी ढंग से अपना संदेश प्रसारित कर सकते हैं। टाइमिंग यानि अपने लक्षित समूह के मद्देनज़र किस समय पर और कितनी आवृत्ति के साथ पोस्ट या ट्वीट करना चाहिए, का विशेष महत्व है। साथ ही, पोस्ट या ट्वीट को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने में हैशटैग और टैगिंग के अलावा प्रभावशाली व्यक्तियों व सेलिब्रिटीज का भी खास योगदान होता है। सोशल मीडिया के माध्यम से सिविल सोसाइटी संगठन बच्चों, महिलाओं अथवा वंचित समुदाय के हितों को लेकर कैंपेन डिजाइन भी कर सकते हैं।

यूनिसेफ़ बिहार के मीडिया कंसल्टेंट अभिषेक आनंद ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल से जुड़ी ज़रूरी सावधानियों पर चर्चा करते हुए कहा कि सूचना के सही स्रोतों जैसे पीआईबी, आईपीआरडी, सरकारी वेबसाइट्स व सोशल मीडिया हैंडल्स समेत यूनिसेफ़, विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे यूएन एजेंसीज़ के आंकड़े और सूचनाएँ इस्तेमाल करनी चाहिए। संदिग्ध अथवा भ्रामक पोस्ट, व्हाट्सऐप मैसेज अथवा वीडियो की पुष्टि के लिए पीआईबी समेत अन्य विश्वसनीय वेबसाइट्स के फैक्ट चेक सुविधाओं का लाभ उठाया जा सकता है। व्हाट्सऐप पर आए किसी संदिग्ध संदेश, फ़ोटो अथवा वीडियो को पीआईबी द्वारा मुहैया कराए गए व्हाट्सऐप नंबर 8799711259 के अलावा ट्वीटर पर @PIBFactCheck और फेसबुक पर /PIBFactCheck टाइप कर भेजकर उसकी सत्यता सुनिश्चित की जा सकती है। इसके अलावा भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा फरवरी 2021 में जारी अधिसूचना में उद्धृत सोशल मीडिया से संबंधित दिशानिर्देश का समुचित पालन किया जाना चाहिए।
इस मौके पर श्याम कुमार सिंह, अशोक कुमार, प्रशांत कुमार सिंह समेत तीनों भागीदार एनजीओ के प्रतिनिधियों ने मिशन सुरक्षाग्रह से जुड़े कामकाज में सोशल मीडिया के महत्व पर अपने अनुभव साझा किए और कार्यशाला के संबंध में कुछ जरूरी सुझाव भी दिए। खुली चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब दिए और उनके सुझावों पर भी गहन विचार विमर्श किया गया।

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