विश्व साइकिल दिवस….साइकिल के सहारे कोरोना को मात

अमरनाथ झा
आज विश्व साइकिल दिवस है। कहते हैं कि हर आपदा अपने साथ अवसर लाती है।  हर बुराई के साथ कुछ अच्छाई भी आती है। कोरोना-काल में साइकिल का प्रचलन में आना ऐसी ही अच्छाई है। आपदा के दौरान भी एक अवसर छुपा हुआ है। कोरोना जनित लॉक डाउन के खुलने के बाद साइकिल अचानक बड़ी संख्या में प्रचलन में आ गई। लोगों ने पुरानी पड़ी साइकिलों की मरम्मत कराना शुरु कर दिया। नई साइकिलें भी बड़ी संख्या में खरीदी गई। एक तो पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत, दूसरे कोरोना में सांस और फेफडे को मजबूत बनाने की जो सीख मिली, उससे भी साइकिल के प्रति रुझान बढ़ा। कोरोना की दूसरी लहर के बाद तो एकदम साफ हो गया है कि अगर चार पहिया वाहनों की जगह छोटी दूरी के लिए साइकिल का प्रयोग बढ़े तो कोरोना जैसी बीमारी महामारी बनकर नहीं आ सकेगा।                                                           …विश्व साइकिल दिवस
आज साइकिल दिवस है, इस अवसर पर साइकिल चलाने के फायदों की चर्चा करना प्रासंगिक है। साइकिल चलाने से खुशनुमा अहसास पैदा करने वाला रसायन इंडोर्फिन्स मस्तिष्क में उत्पन्न होता है। नियमित साइकिल चलाने से शारीरिक स्वास्थ बेहतर होता है और जीवन में खुशहाली आती है। बड़े शहरों में लोग कसरत करने के लिए जीम में जाते हैं, जीम में कसरत के बुनियादी उपकरण के रूप में साइकिल रहता है। इससे मांसपेशियों की शक्ति बढ़ती है, स्टेमिना बढ़ती है और रोजाना के कामकाज के लिए अधिक ऊर्जा उपलब्ध होती है। साइकिल चलाने वालों की त्वचा में खास किस्म की चमक होती है और साइकिल चलाने के दौरान अतिरिक्त कैलोरी जलती है। एक आकलन के अनुसार आधे घंटे साइकिल चलाने के दौरान 5 किलोग्राम कैलोरी जल जाती है। यह बहुत बड़ा लाभ है क्योंकि अतिरक्त कैलोरी कई रोगों का कारण होता है, इसे जलाने के लिए न जाने कितने तरह की दवाइयां और कसरत प्रचलित हैं। साइकिल चलाने से हृदय की गति और फेफड़ा ठीक रहता है और रक्त वाहिकाओं को मजबूती मिलती है। लंबे समय में रक्तचाप घट जाता है जिससे हृदयाघात, अवसाद, मधुमेह, मोटापा, गठिया आदि रोगों की संभावना काफी कम हो जाती है।                               ….विश्व साइकिल दिवस
साइकिल चलाने से तनाव से मुक्ति मिलती है। तनाव घटाने में किसी तरह का शारीरिक श्रम लाभकारी होता है। पर साइकिल चलाने से अधिक लाभ होता है क्योंकि साइकिल चलाने के दौरान अपको उन समस्याओं के बारे में सोचने का अवसर मिलता है जिनकी वजह से तनाव उत्पन्न होता है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ दोनों में बढ़ोतरी करता है। धरती के बढ़ते तापमान की वजह से विभिन्न प्रकार की तबाही झेल रहे समाज को इसे अधिक तत्परता से अपनाने की जरूरत है। विभिन्न वाहन वायुमंडल में कार्बन डायऑक्साइड गैस छोड़ते हैं, जिससे धरती के गर्म होने की गति बढ़ती है। पर साइकिल चलाने से ऐसा नहीं होता। हालांकि अभी भारत के शहरों में साइकिल चलाना खतरनाक और साहस भरा काम है क्योंकि कब,कहां और कौन वाहन कुचल कर चला जाए, कोई ठीक नहीं है। इसलिए सड़कों पर साइकिल वालों के लिए अलग लेन निर्धारित करना होगा। कुछ शहरों, जैसे चंडीगढ़ में ऐसा पहले से है।  …विश्व साइकिल दिवस

(साइकिल से विधानमंडल जा रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री संजय पासवान।)
पहले लॉकडाउन के बाद जब बाजार-कार्यालय खुले तो साइकिलों की बिक्री काफी बढ़ गई। साइकिल व्यावसायी कुलवीर सिंह कहते हैं कि 20-22 इंच की पुराने माडेल की साइकिलों की मांग अधिक है। लोग साइकिलों के केवल सवारी के लिए नहीं, बल्कि छोटे-मोटे सामान ढोने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। राजधानी साइकिल स्टोर के संचालक का कहना है कि उनके कर्मचारी रोजाना 25-30 किलोमीटर साइकिल चलाकर काम पर आते हैं। शहरों में मजदूरी करने वाले आसपास के लोग आमतौर पर साइकिल का ही इस्तेमाल करते हैं। शहरों में रहने वाले निम्न मध्यवर्ग के लोग साइकिल का खूब उपयोग करते हैं।                                                      …..विश्व साइकिल दिवस
वायुमंडल से कार्बन डायक्साइड गैस कम करने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, आबादी के बीच खाली स्थान छोड़ने और वर्षाजल के संरक्षण के उपाय अपनाने की जरूरत बताई जाती है। इसके दायरे में साइकिल और रिक्सों को अधिक प्रमुखता से लाने की जरूरत है। साइकिल और रिक्सा चलाने से वायुमंडल को कार्बन डायऑक्साइड की जितनी मात्रा से बचाया जाए, उस अनुपात में कार्बन क्रेडिट उन्हें प्राप्त हो और वह रकम साइकिल रिक्सा वालों के कल्याण, सडकों को उनके अनुकूल व सुविधायुक्त बनाने पर खर्च किया जा सकता है।
सुविधाजनक और स्वास्थकर रहन-सहन में साइकिल का महत्वपूर्ण स्थान होता है। प्राकृतिक-चक्र के साथ समायोजित कार्य-स्थल, निवास-स्थान और ऐसी व्यवस्था जिससे खुशी का अहसास हो। इस ओर नीति-निर्माताओं का ध्यान आकृष्ट करने की दिशा में पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं विधान-पार्षद डॉ संजय पासवान के उद्यम में उम्मीद की एक हल्की किरण दिखती है। वे विधान मंडल की बैठक में हिस्सा लेने साइकिल से जा रहे हैं।                                                                                                                    ….विश्व साइकिल दिवस

वैसे तो पहले भी भाजपा के कई नेता लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए संसद जाते रहे हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और मनसुखभाई मांडविया साइकिल से संसद जाते रहे हैं। हालांकि मंत्री बनने के बाद सुरक्षा कारणों से ये सिलसिला बनाए नहीं रख सके, बावजूद इसके साईकिल की सवारी का अपना महत्व है और यह अभी भी बिहार के आम लोगों की सवारी बनी हुई है।

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