कोरोना काल में अन्य पंचायतों को राह दिखाती सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया रितु जायसवाल

अमरनाथ झा
सीतामढ़ी:कोरोना संकट के समय पंचायती राज संस्थाएं कितनी उपयोगी हो सकती हैं, इसका उदाहरण पेश कर रहा है सीतामढ़ी जिला का सिंहवाहिनी पंचायत और मुखिया रितु जायसवाल। लोक की प्रतिनिधि लोक की ताकत को समझती हैं और सरकार की सीमाओं को भी। ये भी समझती हैं कि कोरोना महामारी वैश्विक संकट है कोई छोटा संकट नहीं है। ऐसे में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किये गये प्रशासनिक व्यवस्था में यदि जमीनी लोकतंत्र का पहरूआ अपनी ताकत मिला दे तो न सिर्फ कोरोना के फैलाव को गांव में पांव पसारने से रोका जा सकता है बल्कि विपदा की इस घड़ी में अपने गांव पंचायत के लोगों को बचाया भी जा सकता है।

चुनावी हार के बावजूद नहीं छोड़ा अपनों का साथ
यही कारण है कि सीतामढ़ी के सिंहवाहिनी पंचायत की लोकप्रिय मुखिया रितु जायसवाल ने पंचायत के संसाधनों के साथ ही अपने व्यक्तिगत संपर्कों का उपयोग कर पंचायत के लोगों की हर प्रकार की सहायता करना जारी रखा है। इस दौरान वे स्वयं कोरोना से पीड़ित हो गई, 24 अप्रैल से 14 मई के बीच एकांतवास में रही। फिरभी फोन के सहारे लोगों की सहायता करती रही। बेड दिलवाना, आक्सीजन की व्यवस्था करना और गांव के सेनेटाइज कराने के काम चलते रहे। कोरोना को उबरी तो अब उनके कार्य का दायरा पंचायत से बढ़कर पूरा विधानसभा क्षेत्र हो गया। मालूम हो कि रितु जायसवाल पिछले विधानसभा चुनाव में परिहार चुनाव क्षेत्र से उम्मीदवार थी, पर मामूली अंतर से हार गई थी। लेकिन चुनाव पश्चात भी क्षेत्र के लोगों को संकट के समय सहायता करने में जुटी रही। अब कोविड केयर सेंटर चलाने को सर्वोच्च प्रा​थमिकता में रखा है।                                                                                         …..मुखिया रितु जायसवाल
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान निशाने पर गांव भी रहे और वर्तमान में कोरोना का फैलाव गांव-गांव में हो गया है। शुरूआती टालमटोल के बादअब सभी स्वीकार करने लगे हैं। हाईकोर्ट की फटकार के बाद सरकार भी इनकार करने की स्थिति में नहीं रह गई है। लेकिन कोरोना से बचाव के उपायों के बारे में गांववासियों को जागरुक करने, रोग के बारे में सही जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने में सरकारी इंतजाम कहीं से संतोषजनक नहीं है। सरकार ने हर परिवार को मास्क देने के लिए पंचायतों को कह दिया, पर यह काम कितना हुआ, इसपर नजर नहीं रखी गई। इसीतरह हाईकोर्ट ने कहा कि कोरोना पीडितों की संख्या और मृतकों के बारे में पूरा आंकड़ा पंचायत प्रतिनिधि एकत्र करें और स्थानीय पदाधिकारियों के दें। पर यह सूचना किस पदाधिकारी को देनी है, इसे सरकार ने स्पष्ट नहीं किया। यानी कहा जा सकता है कि पंचायतों की क्षमता और प्रतिनिधियों के जमीनी जुड़ाव का उपयोग सरकार नहीं कर पाई। ऐसे में रितु जायसवाल जैसे कुछ सक्रिय पंचायत प्रतिनिधि और राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं का योगदान अधिक महत्वपूर्ण है।

गांव में शुरू किया कोरोना केयर सेंटर
मुखिया रितु जयसवाल ने अपने सिंहवाहिनी पंचायत के नरकटिया गांव के घर से ही कोरोना केयर सेंटर का संचालन कर रही है। इसका नाम ‘क्योंकि हम हैं आपके लिए’ रखा गया है। सोशल मीडिया के जरीए प्रचार किया जा रहा है कि कोरोना का तनिक भी लक्षण दिखने पर तत्काल इस केन्द पर आए या फोन करें। रितु ने इस केन्द्र को चलाने के अलावा न केवल घर-घर मास्क बांटने का इंतजाम किया, बल्कि पूरे गांव के सेनेटाइज करने की व्यवस्था भी की। सतत रूप से यह प्रक्रिया जारी है और क्रमबद्ध रूप से एक के बाद दूसरे गांव में किया जा रहा है। इसबीच यास तूफान की वजह से दो दिनों तक हुई जोरदार बारिश से काम रूक गया, पर दिन खुलते ही फिर शुरू हो गया। पूरे परिहार विधानसभा क्षेत्र के हरेक गाव में सेनेटाइजेशन कराया जाना है। अभी तीन-चार गांव को सेनेटाइज किया जा सका है। कोरोना का कोई भी लक्षण दिखने पर इस कोविड केयर सेंटर से संपर्क करने के लिए कहा गया है। एक फोन नंबर जारी किया गया है जिसपर कभी भी फोन किया जा सकता है।                                                                                                                           ….  मुखिया रितु जायसवाल
कोरोना के संदिग्ध रोगियों के आने पर लक्षणों के आधार पर दवाएं दी जाती है। कई चिकित्सक हैं जिनसे टेलीफोन से संपर्क कर दवाओं के बारे में पूछा जाता है। इनमें मुजफ्फरपुर और पटना के अलावा कई प्रवासी डाक्टर ऐसे भी है जो अमेरीका और कनाडा में हैं। पर नियत समय पर चिकित्सकीय परामर्श के लिए उपलब्ध होते हैं। न्यू जर्सी और कनाडा से डॉ साकेत, डॉ दिनेश इनमें प्रमुख हैं। मुजफ्फरपुर के भी कई डॉक्टर फोन पर परामर्श देने के लिए उपलब्ध हो रहे हैं।
क्या कहती हैं मुखिया
रितु जायसवाल बताती है कि गांवों में संक्रमण काफी तेजी से फैला। पर न जांच हो रही है, न उसकी सुध लेने वाला कोई है। ये आंकड़े रिकार्ड में भी नहीं आ रहे। सीतामढ़ी में एक वेंटिलेटर बेड भी नहीं है। सरकार मन मुताबिक फर्जी आंकड़े जारी कर अपनी पीठ थपथपा रही है, लोगो के पास आक्सीजन लेबेल जांचने या शरीर का तापमान जांचने के साधारण उपकरण भी नहीं हैं।

अपनों में बढ़ाया मदद का हाथ तो बनी बात
दवाओं की व्यवस्था रितु जी ने अपने संपर्कों के माध्यम से किया है। सीतामढ़ी और आसपास के कई लोगों ने दवाएं भेजी है। सीतामढ़ी, नवीन मेडिकल स्टोर के मालिक पंकज कुमार ने कम कीमत पर दवा उपलब्ध कराना शुरु किया है। वे अपना मुनाफा नहीं ले रहे। साथ ही तिरुपति सर्जिकल एजेंसी, महावीर वैक्सीन, हनुमान ट्रेडर्स एवं गणेश मेडिकल हॉल से संपर्क कर पंकज जी ने ऐसी व्यवस्था कर दी है कि वे भी जरूरी दवाओं पर अपना मुनाफा नहीं ले रहे हैं। इधर पुपरी के प्रियदर्शी जी ने 125 लोगों के लिए दवाइयां भेजी। दिल्ली से 100 लोगों के लिए दवाओं का पैकेट इस 21 मई को पहुंचा। दिल्ली की ही संस्था आयना जिसे अवनी गुप्ता संचालित करती हैं, इस केन्द्र की सहायता कर रही है। जनमन और जीवन स्तंभ संस्था से भी सहयोग मिला है। आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर संदीप ने कुछ उपकरण भेजे हैं। उन्होंने चार आक्सीजन सिलिंडर और 100 लोगों के लिए दवाएं भेजी। इसतरह दवाईयां ही नहीं, चिकित्सकीय उपकरण-थर्मामीटर, आक्सीमीटर आदि भी कम कीमत पर उपलब्ध हो रही है। जिससे मरीजों के मुफ्त दवा देना संभव हो पा रहा है। जन सहयोग को जुटाकर रितु जायसवाल अपने क्षेत्र के संभावित रोगियों की हर प्रकार की सहायता कर रही है। जो मरीज इन दवाओं से नहीं ठीक हो पाते और उनका रोग अधिक गंभीर होता है तो उन्हें एंबुलेंस से मुजफ्फरपुर और पटना के अस्पताल में भेजने का इंतजाम भी किया जा रहा है। बाहर भेजे गए रोगियों में से दो लोगों की मौत भी हुई है, पर यह आंकड़ा बढ़ा नहीं है, इसका श्रेय समय पर कोरोना केयर सेंटर और लोकप्रिय मुखिया रितु जायसवाल को दिया जा सकता है।                                                                                              ……….मुखिया रितु जायसवाल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *