200 रुपये वाला टमाटर 2 रुपये में बिका, किसानों ने फेंकी सैकड़ों किलो फसल

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वर्षा वर्मा

 

भोपाल:  मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में टमाटर उत्पादन के बारे में कौन नहीं जानता, टमाटर उत्पादन की चर्चा हमेशा सुर्खियों में रहती है। यह हर दूसरे दिन आपके खाने की थाली में नजर आता है। जिसका स्वाद आप कभी चटनी में, कभी सलाद में तो कभी अपनी सब्जी की ग्रेवी में महसूस करते हैं। कई सब्जियां ऐसी हैं जिन्हें टमाटर के बिना पकाने की हम सोच भी नहीं सकते। सर्दियों के दिनों में यह 200 रुपये प्रति किलो के भाव तक पहुंच जाता है। खट्टे मीठे रसीले स्वाद के साथ चमकदार लाल दिखने वाला टमाटर अब किसानों के लिए मुसीबत बन गया है।

 

 

 

 

किसानों द्वारा बड़ी मेहनत से लगाई गई टमाटर की फसल का बाजार में सही दाम नहीं मिलने से किसान उसे सड़क किनारे फेंकने और पशुओं को खिलाने को मजबूर है। फिलहाल खुले बाजार में किसानों को टमाटर का जो रेट मिल रहा है, वह बेहद कम है।

 

टमाटर के कम दाम से परेशान किसान
उससे ज्यादा लागत इस फसल की कटाई और ढुलाई में आ रही है। यही वजह है कि किसान इसे खेत से निकालकर अपने गाड़ियों में डालकर खुली सड़क के किनारे फेंक रहे हैं। ताकि आसपास के मवेशी इसे खा सकें। रायसेन जिले के बाड़ी बरेली में टमाटर की खेती बड़ी मात्रा में होती है। यहां से टमाटर मध्य प्रदेश के बड़े शहरों के साथ ही भारत के अन्य राज्यों में भी सप्लाई होता है। जहां इसकी काफी मांग है, लेकिन इस समय बाजार में टमाटर का रेट बेहद कम होने से किसान परेशान हो रहे हैं। एक समय में यह टमाटर 100 से 150 रुपये प्रति किलो के भाव से मिलता था। जो अब घटकर 2 से 3 रुपये प्रति किलो रह गया है।

 

 

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सड़क के किनारे फेंका सैकड़ों किलो टमाटर
किसानों के माथे पर चिंता और निराशा की लकीरें लिए रायसेन जिले के किसान ट्रैक्टर पर सवार होकर अपनी ट्रॉली में रखे सैकड़ों किलो टमाटर को सड़क के किनारे फेंक रहे है। किसानों का कहना है की, बाजार में एक क्रेट टमाटर की कीमत 20 रुपये है, अगर हमें 100 रुपये मिल जाएं तो हमारी लागत निकल जाएगी, लेकिन बाजार में टमाटर का रेट बहुत कम है। जिसके कारण कटाई का खर्च भी हमें जो रेट मिल रहा है उससे ज्यादा है। यही कारण है कि हम अपने खेत साफ करते समय इन टमाटरों को सड़क किनारे फेंक रहे हैं। हमें जो रेट मिल रहा है, उस पर हम इसे बाजार भी नहीं ले जा सकते क्योंकि परिवहन का खर्च ज्यादा होगा, यह हमारी मजबूरी है और हम इन टमाटरों को गौ माता को खिलाने की सोच रहे हैं।

 

 

 

प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की कही बात
जिले के किसानों द्वारा सड़क पर फेंकी जा रही टमाटर की फसल के संबंध में जब उद्यानिकी विभाग के जिला अधिकारी आर एस शर्मा से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि यहां के किसान किसी भी समय खेतों में टमाटर की फसल बो देते हैं। जिसके कारण उन्हें टमाटर का सही दाम नहीं मिल पाता है। प्रशासन ने किसानों के हित में कई योजनाएं शुरू की हैं जिसमें किसान अपने खेतों में प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर टमाटर से सॉस चटनी बनाकर खुले बाजार में अच्छे दाम पर बेच सकते हैं। लेकिन किसान यूनिट नहीं लगाते हैं। जिसके कारण जिले में हर साल यही स्थिति रहती है। इस समय बाजार में रेट कम है यही कारण है कि किसान अपनी फसल को किनारे फेंक रहे होंगे।

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