
चंडीगढ़: देश के लगभग सभी राज्यों में रबी की प्रमुख फसल गेहूं की कटाई जारी है वहीं, इस साल गेहूं की अच्छी पैदावार ने हरियाणा के किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। कई किसानों ने बताया है कि उत्पादन 24-29 क्विंटल प्रति एकड़ है। जो पिछले वर्ष के औसत 18-22 क्विंटल प्रति एकड़ से काफी अधिक है। किसानों ने बताया कि फसल की शुरुआत में प्रतिकूल मौसम की स्थिति का सामना करने के बावजूद कुल उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन किसानों ने खेती में बढ़ी हुई लागत को बताते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की मांग की है।
गेहूं की पैदावार में हुई बढ़ोतरी
कृषि और किसान कल्याण विभाग के फसल कटाई प्रयोगों से मिले शुरुआती आंकड़े इसका समर्थन करते है। जिसमें प्रति एकड़ लगभग 24 क्विंटल औसत उपज का खुलासा हुआ है। जो पिछले सीजन की औसत उपज 23 क्विंटल प्रति एकड़ से एक क्विंटल अधिक है।
MSP में बढ़ोतरी की उठी मांग
दरअसल, ढाकवाला रोरन के किसानों ने अपनी ढाई एकड़ में कटी हुई गेहूं की फसल लेकर करनाल अनाज मंडी आए और बताया कि प्रति एकड़ करीब 25 क्विंटल गेहूं की पैदावार हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले साल प्रति एकड़ सिर्फ 21 क्विंटल गेहूं की पैदावार हुई थी।
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हालांकि, किसानों ने बढ़ती लागत के बारे में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,425 रुपये प्रति क्विंटल है। लेकिन अगर कोई किसान पट्टे पर जमीन लेता है। जिसकी लागत सालाना 60,000 से 70,000 रुपये प्रति एकड़ है और इनपुट लागत 10,000 से 15,000 रुपये है। तो अच्छा मुनाफा कमाना मुश्किल है। उन्होंने सरकार से बढ़ती इनपुट लागत के हिसाब से MSP को बढ़ाने का आग्रह किया।
एक अन्य किसान राजिंदर ने भी ऐसी ही राय जताई। तीन एकड़ से गेहूं की कटाई करने के बाद उन्हें भी प्रति एकड़ 25 क्विंटल की उपज मिली। उन्होंने कहा कि हां, इस साल उपज अच्छी है। लेकिन खेती महंगी होती जा रही है, वास्तविक जमीनी हकीकत को दर्शाने के लिए एमएसपी को बढ़ाया जाना चाहिए।
इस साल उत्पादन लक्ष्य के पार
करनाल स्थित भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) के विशेषज्ञों को उम्मीद है कि भारत इस साल गेहूं उत्पादन के अपने लक्ष्य को पार कर जाएगा। IIWBR के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने कहा, “पिछले साल देश में 113.29 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। इस साल लक्ष्य 115.4 मिलियन टन है और मौजूदा रुझान संकेत देते हैं कि हम इसे पार करने की राह पर हैं।”
डॉ. तिवारी ने कहा कि इस सीजन में गेहूं की खेती के लिए मौसम की स्थिति काफी हद तक अनुकूल रही है। उन्होंने कहा, “फरवरी और मार्च के दौरान अधिकतम तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव हुआ, लेकिन जलवायु-अनुकूल गेहूं की किस्मों को अपनाने के कारण फसल पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा।”


