गांव को शराबमुक्त बनाने के लिए लड़ाई लड़ती महिला सरपंच प्यारी रावत

पंचायत खबर टोली

राजसमंद: राजस्थान प्रदेश के मेवाड़- मगरा की धरती पर राजसमन्द जिले के भीम तहसील क्षेत्र के गांव मण्डावर की महिला सरपंच प्यारी रावत के जोश और जज्बे के हर कोई कायल है। 2015 में पहली बार सरपंच बनी तो शराबमुक्त गांव का वादा किया। शराबबंदी का आंदोलन छेड़ने पर शराब माफियों ने खुला चेलेंज दिया काट देंगे, जला देंगे। कई बार रास्ता रोका, परिवार के सदस्यों को परेशान किया जाने लगा। प्यारी रावत ने एक ही बात कही एक दिन वैसे ही मरना है, तो फिर कुछ करके मरे।  सरपंच ने शराब के ठेके को हटाने के लिये कानूनन रूप से लड़ाई जारी रखी, ज्ञापन दिया। सरकार ने ज्ञापन के हस्ताक्षरों का भौतिक सत्यापन भी करवाया। राजस्थान हाई कोर्ट में मामला चला। शराबबंदी के लिये सरकार को आम चुनाव की तरह वोटिंग करवानी पड़ी। प्रशासन ने लड़ाई हराने के लिये नाना प्रकार के हथकंडे अपनाए। गांव में शराबबंदी की वोटिंग के लिये जगह जगह वीडियो कैमरे लगाए, पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया। शराबबंदी के पक्षधरों को डराया- धमकाया गया।  फिर भी कठिन परिस्तिथियों में कुल पंजीकृत मतदाताओं में से 51 फीसदी वोट मिलने के नियम कई फीसदी अधिक वोट प्राप्त कर लड़ाई जीत ली। शराबबंदी के वादे को पूरा करने के लिये सरकार, आबकारी विभाग और शराब माफियों से लंबे संघर्ष से गांव में लगने वाले दो शराब के सरकारी ठेकों सहित दो दर्जन किराना दुकानों पर सर्व सुलभ होने वाले दुकानों को हटाने में कामयाब रही। राजस्थान प्रदेश की करीब 11 हजार पंचायतों में तो शराब का ठेका है पर इस पंचायत में अब कोई सरकारी ठेका नही है। 

गांव में  दो सरकारी ठेके सहित दो दर्जन से अधिक जगह पर सर्वसुलभ शराब दुकानों से गांव की दुर्दशा बिगाड़ दी थी। गांव के मुख्य चौराहों व मार्गों पर शराबियों का जमावड़ा रहता था। शराबी नुक्कड़ व सड़क पर बैठ कर खुलेआम शराब पीते रहते थे। शराब के ठेकों पर दिनभर जमावड़ा रहता था जिससे सामान्य पुरुषों को वहाँ से गुजरना मुश्किल हो जाता था। महिलाओं व लड़कियों का घर से बाहर निकलने, खेत पर जाने व विद्यालय जाने पर कई  दिक्कत का सामना करना पड़ता था। गांव में सरपंच प्यारी रावत के नेतृत्व में शराबबंदी होने के बाद गांव की स्तिथि में काफी बदलाव हुआ। सड़कों पर, नुक्कड़ पर अब कोई शराबी नजर नही आता है। महिलाओं व लड़कियों को कही भी आने जाने में कोई दिक्कत नही होती है। शराबबंदी होने से शराबमाफिया व आबकारी विभाग पर नागवार गुजरा, वो इसे असफल करने की कोशिश करने का कुत्सित प्रयास कर रहा पर सरपंच का संघर्ष निरन्तर जारी है।


सुसराल में रहकर पूरी की उच्च शिक्षा

ग्रामीण परिवेश में बालिकाओं को कम पढ़ाया जाता है और शादी के बाद तो आगे की शिक्षा रुक जाती है पर सरपंच प्यारी रावत ने 2007 में अपनी शादी के बाद दसवीं कक्षा के बाद स्वयंपाठी रूप पढ़ाई जारी रखी तथा तीन विषय हिंदी, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुयट किया। बीएड तथा कम्प्यूटर प्रशिक्षित है। खास बात यह है कि 2015 में सरपंच बनने के उपरांत दो विषय में पोस्ट ग्रेजुयट कर सबको चौकाया था।

मिल चुके है कई अवार्ड
सरपंच प्यारी रावत के शराबबंदी, शिक्षा प्रसार, बालिका शिक्षा, पर्यावरण पहल, स्वच्छ भारत मिशन, जल संरक्षण व पंचायती राज में विभिन्न नवाचारों पर जल संसाधन मंत्रालय सम्मान, स्वच्छ भारत मिशन में उत्कृट कार्य पर सम्मान, राजस्थान राज्य महिला आयोग द्वारा सम्मान, यूथ वर्ड इंडियन आइकॉन अवार्ड, वुमन पॉलिटिकल लीडरशिप अवार्ड, द चेंज मेकर ऑफ द ईयर अवार्ड, राष्ट्रीय डायमंड अचीवर्स अवार्ड, वुमन सब्सटेंस अवार्ड, क्षत्राणी सम्मान, मगरा लाडली अवार्ड सहित दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय व प्रदेश स्तरीय सरकारी व गैर सरकारी अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। बेहतरीन कार्य पर राजस्थान की 16 सरपंच में चयनित हो चुकी है। वही फोकस भारत के अनुरूप 200 पॉवरफुल महिला लीडर में स्थान बना चुकी है।

नवाचार के जरिए देश-प्रदेश में बनाई पहचान

सरपंच प्यारी रावत ने शराबबंदी के अतिरिक्त कई एक से बढ़कर नवाचार करके देश- प्रदेश में अपनी पहचान कायम की है। स्वच्छ भारत मिशन में उत्कृत कार्य पर अनवरत तीन वर्ष से स्वच्छ शक्ति के रूप में लखनऊ, कुरुक्षेत्र व साबरमती हेतु चयन हो चुका है। मांगलिक अवसरों पर नींबू पौधा गिफ्ट का नवाचार क्षेत्र में काफी लोकप्रिय है। 

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