असम में धान की खरीद बंद

अमरनाथ झा

गुवाहाटी: जब देशभर के किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, असम के किसान धान की सरकारी खरीद पूरीतरह बंद होने से परेशान हैं। कोरोनाजन्य देशबंदी की वजह से इस साल धान की खरीद देर से शुरु हुई। फिर अचानक केन्द्र सरकार के निर्देश से यह पूरी प्रक्रिया बंद हो गई। इसलिए असम के किसानों को धान का न्यूनतम खरीद मूल्य (एमएसपी) नहीं मिल पा रहा है, वे अपनी उपज बिचौलियों के हाथों बेचने किए मजबूर हैं।


इस बार भी पहले की तरह धान खरीदने की जिम्मेवारी भारतीय खाद्य निगम के साथ ही राज्य स्तर के पांच संगठनों को दी गई थी। वे असम राज्य कृषि सामग्री विपणन परिषद, असम सरकारी आपूर्ति निगम, नाफेड, नाकफ और एनसीसीएफ थे। कौन सी संस्था कितनी धान की खरीद करेगी, इसका लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन अचानक केन्द्र सरकार से आए निर्देश की वजह से 23 जनवरी को असम में धान खरीद की प्रक्रिया रोक दी गई। असम सरकार के कृषि विभाग ने मामले में अभी तक कोई पहल नहीं की है।


उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने 2017 में ही ऑनलाइन प्रोक्योरमेंट मैनेजमेंट सिस्टम(ओपीएमएस) से धान खरीद करने का निर्देश दिया था। धान की खरीद करने वाली राज्य सरकार की संस्थाओं को ओपीएमएस के अंतर्गत अपना पोर्टल बनाना था। जिससे कहां कितनी धान की खरीद हुई, कितने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल पाया, इसका पूरा विवरण समूचे भारत में उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही पब्लिक फिनांनस मैनेजमेंट सिस्टम शुरु करने का निर्देश भी राज्य सरकार को दिया गया था। इस सिस्टम को ओपीएमएस के साथ जोड़ना था। केन्द्र सरकार के निर्देशों के बादजूद राज्य सरकार ने इसे तैयार नहीं किया। कृषि सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। इससे नाराज होकर केन्द्र सरकार ने भारतीय खाद्य निगम को निर्देश दिया कि उन संस्थाओं से चावल की खरीद नहीं की जाए जो अभी तक ओपीएमएस से नहीं जुड़े हैं। अब एफसीआई के चावल नहीं खरीदने पर अब तक खरीदे गए धान का क्या होगा, यह समस्या उत्पन्न हो गई है।
असम में इस वर्ष 2021-21 में 5.30 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। आपूर्ति निगम 10 केन्द्रों, कृषि विपणन परिषद 27 केन्दों, नाफेड 14 केन्द्रों, नाकफे 13 केन्द्रों और एनसीसीएफ ने पांच केन्द्रों पर धान की खरीद शुरु किया था। मिली जानकारी के अनुसार इस बीच आपूर्ति निगम ने 40 हजार क्वींटल धान की खरीद कर ली है। लेकिन इस धान का क्या किया जाए, यह स्पष्ट नहीं है।

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