तेज गर्मी से करें फसलों की सुरक्षा, आग से हुआ नुकसान तो किसानों को होगी भरपाई

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वर्षा वर्मा

 

पटना:  अप्रैल की शुरुआत के साथ ही बिहार में गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है। इस दौरान तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। जिससे खेतों में खड़ी गेहूं की फसल के साथ-साथ अन्य स्थानों पर भी आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। फसल को आग से बचाने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को जल्द से जल्द गेहूं की कटाई पूरी करने का सुझाव दिया है। वहीं विभाग का कहना है कि कटाई में देरी से फसलों में आग लगने का जोखिम बढ़ सकता है। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा फसलों में आग लगने की स्थिति में 33 प्रतिशत या उससे अधिक क्षति पर क्षतिपूर्ति राशि देने का प्रावधान है।

 

 

 

 

आग लगने पर सरकार देगी क्षतिपूर्ति
कृषि विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा किसानों के खेतों में या खलिहान में रखी गई फसल को आग से नुकसान की स्थिति में 33 प्रतिशत या उससे अधिक क्षति पर वर्षाश्रित फसल क्षेत्र के लिए 8500 रुपये प्रति हेक्टेयर और सुनिश्चित सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए 17000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि देता है।

 

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कृषि सचिव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यदि कहीं भी फसल में आग लगने की घटना की जानकारी मिलती है तो तुरंत उस पंचायत के कृषि समन्वयक और प्रखंड कृषि पदाधिकारी स्थल का निरीक्षण करें। साथ ही इसकी जानकारी अंचल अधिकारी को दें। अंचल अधिकारी की मदद से आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा दी जाने वाली सहायता उपलब्ध कराने में किसान को हर संभव मदद की जाए।

 

तैयार फसलों की किसान जल्द करें कटाई
उत्तर बिहार में जहां गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है। वहीं दक्षिण बिहार में भी गेहूं की कटाई की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ रही है। गेहूं की कटाई को लेकर कृषि विभाग के सचिव ने बताया कि कुछ जिलों से आग लगने के कारण खड़ी फसलों के नुकसान की सूचना मिली है। इसे देखते हुए किसानों की हर संभव मदद के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। किसानों को सलाह दी जाती है कि यदि गेहूं की फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी है। तो वे जल्द से जल्द उसकी कटाई कर लें। कटाई में देरी होने पर आग लगने का खतरा बढ़ सकता है।

किसान इन बातों का रखें ध्यान
1.खेत के आस-पास गड्ढों में पानी भरकर रखें और उसके साथ बालू भी रखें, ताकि
आग लगने की स्थिति में तुरंत बुझाई जा सके।
2.कटाई के लिए उपयोग होने वाले कृषि यंत्रों की जांच और सफाई कर लें, ताकि घर्षण से चिंगारी न निकले।
3.खेत के आस-पास सूखी घास-फूस या पराली का ढेर न लगाएं, जिससे आग लगने की संभावना कम हो।

 

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इन वजहों से लगती है फसलों में आग
कृषि सचिव ने कहा कि तेज हवा और बढ़ती गर्मी के कारण खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। कई जगहों पर गर्म हवा के प्रभाव से बिजली के तारों से निकली चिंगारी, तो कहीं फसल कटाई में उपयोग होने वाले बड़े कृषि यंत्र, विशेषकर कंबाइन हार्वेस्टर में घर्षण से उत्पन्न चिंगारी, फसलों में आग लगने की घटनाओं का कारण बन रही है।

 

उन्होंने कहा कि जिन खलिहानों के ऊपर से हाई-वोल्टेज बिजली तार गुजर रहे हों, उनके नीचे या आस-पास कटी हुई फसल न रखें। यदि शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगती है। तो तुरंत बिजली विभाग और स्थानीय थाना को सूचना दें। इसके साथ ही, खेत में बचे हुए अवशेषों में आग न लगाएं और खेत के आसपास अधजली बीड़ी या सिगरेट न छोड़ें, इन तमाम कारणों से गेहूं की फसल में आग लगने की घटनाएं होती हैं।

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