अब पियवा के लागल बा कचहरी.. भेजले बा डोलिया कहारी…

अनूप नारायण सिंह कौड़ी—कौडी जोड़ के संचय कइनी खजाना पूंजी , सब खर्चा हो गईले करब से कवन बहाना त पल भर समय ना घटिहे बढिहे समय से खुली सवारी अब पियवा के लागल बा कचहरी भेजले बा डोलिया कहारी  यह निर्गुण अकसर गुरू अकेला जी गाया करते थे………. गुरु अजित कुमार अकेला से पहली …

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