इन किसानों से प्रधानमंत्री ने किया सीधा संवाद,पूछा…कैसा है नया कृषि कानून

संतोष कुमार सिंह

नयी दिल्ली: दिल्ली के सभी बोर्डर पर एक माह से ज्यादा वक्त से चल रहे किसानों के प्रदर्शन के बीच जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर किसान सम्मान निधि के वितरण कार्यक्रम में किसानों के संवाद करने आये तो उन्होंने 6 राज्यों के इन किसानों से बात की। इन सभी ने मोदी सरकार द्वारा पारित किये गये कृषि कानून को किसानों के हित में बताया और कहा कि नये कानून से उन्हें काफी फायदा मिल रहा है। इस दौरान उन्होंने इन किसानों से बातचीत की।


अरुणाचल प्रदेश के गगन पेरिंग
अरुणाचल प्रदेश के किसान गगन पेरिंग से प्रधानमंत्री ने पूछा कि आप किसान सम्मान निधि योजना का पैसा कहां इस्तेमाल करते हैं। तो गगन का जवाब था, ‘मुझे पीएम किसान निधि के तहत 6,000 रुपये मिले हैं जिसका उपयोग ऑर्गेनिक खाद और दवा खरीदने में किया।’ उन्होंने आगे बताया कि एफपीओ के तहत उनके साथ 446 किसान जुड़े हैं जो ऑर्गेनिक अदरक उगाते हैं। हमने फसल बैंगलुरु और दिल्ली की बाजार में बेचा। पीएम मोदी ने गगन पेरिंग से पूछा कि आप छोटे किसानों को प्राइवेट कंपनी के साथ जोड़ते हैं क्या उन्होंने सिर्फ प्रोडेक्ट खरीदे या जमीन भी ले ली। इस पर गगन पेरिंग ने कहा, ‘हाल ही में हमने एक कंपनी से एग्रीमेंट किया है। जितना प्रोडेक्ट है उसे ही ले जाने का अग्रीमेंट किया है जमीन का नहीं। हमारी जमीन सुरक्षित है।’
इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आप इतनी दूर अरुणाचल पर बैठे हैं और कह रहे हैं कि आपकी जमीन सुरक्षित है लेकिन यहां किसानों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है कि किसानों की जमीन ले ली जाएगी।

मध्य प्रदेश के धार जिले के मनोज पाटीदार
मध्य प्रदेश के धार जिले के मनोज पाटीदार सपरिवार कार्यक्रम में पहुंचे थे। जब मनोज से प्रधानमंत्री ने नए कृषि कानून और पुराने कानून से आपके जीवन में क्या बदलाव आया है? इस पर उन्होंने न कहा कि अब वो अपनी फसल कहीं भी बेच सकते हैं। ‘नए कानूनों से हमें एक विकल्प मिल गया है। पहले एक ही द्वार था, वह था मंडी का लेकिन अब किसी निजी व्यापारी या अन्य संस्थान को अपना माल बेच सकते हैं। इस साल मैंने खरीफ की फसल सोयाबीन को सोया चौपाल आईटीसी की एक कंपनी को 41,00 रुपये प्रति क्विंटल से मैंने 85 क्विंटल सोया बेचा।’
किसान ने आगे बताया, ‘हमारे सामने बड़ा कांटा होता है उससे हमें चेक भी कराया जाता है और उसी दिन हमें पेमेंट भी मिल जाता है। हमारे सामने परीक्षण किया जाता है कि हमारे माल में इतनी मिट्टी है, इतनी नमी है वगैरह। वह हमें बता देते हैं कि इतना इसका रेट है, आप चाहें तो इस बेचें यह आपकी इच्छा।’
इस दौरान मनोज ने प्रधानमंत्री के समक्ष जंगली व आवारा पशुओं की समस्या भी रखी। इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई किसान अपनी फसल बचाने के लिए किसी पशु को मार देता था तो उसे अलग-अलग धाराओं में जेल में डाल देते थे। पीएम ने मनोज का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने इस मुद्दे को उनके ध्यान में लाया है और वो इस पर भी काम करेंगे।


ओडिशा के किसान नवीन
ओडिशा के एक किसान नवीन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मैं आपसे किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड और इसके विभिन्न लाभों के बारे में बताने का आग्रह करता हूं, जिसमें कम ब्याज दर पर ऋण की उपलब्धता शामिल है।’ इसके जवाब में ओडिशा के किसान नवीन प्रधानमंत्री को बताया कि, ‘मैंने 2019 में किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त किया। मुझे बिचौलियों से 20 प्रतिशत की तुलना में मात्र 4 प्रतिशत ब्याज पर बैंक से 27,000 रुपये की राशि का ऋण मिला।
तमिलनाडु के किसान सुब्रमण्यम
सुब्रमण्यम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि उनका परिवार फूलों की खेती करता है। प्रधानमंत्री द्वारा यह पूछे जाने पर कि वहां पानी की दिक्कत है। पानी की समस्या बताते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि चार एकड़ की जमीन में उसे पहले मात्र एक एकड़ को ही सिंचाई मिलती थी लेकिन अब उसे तीन एकड़ में सिंचाई की सुविधा मिल रही है। इसके लिए उन्होंने ड्रिप टेक्वोलॉजी का इस्तेमाल किया। इससे उनकी आमदनी बढ़ रही है। सुब्रमण्यम का जवाब से प्रभावित प्रधानमंत्री ने उनकी तारीफ की और कहा कि आपने पानी बचाकर मानव जाति के लिए कल्याणकारी काम किया है। प्रधानमंत्री ने सुब्रमण्यम से आग्रह किया कि आप लोगों को भी जागरूक करते रहें।
हरियाणा के किसान हरि सिंह बिश्नोई
हरियाणा के फतेहाबाद के किसान हरि सिंह बिश्नोई ने कहा, ‘पहले मैं चावल की खेती करता था, लेकिन मुझे बागवानी में भी दिलचस्पी है। मैंने तीन एकड़ में नींबू और सात एकड़ में अमरूद लगाए हैं। हरि सिंह ने प्रधानमंत्री को बताया अमरूद और नींबू की फसल को स्थानीय मंडियों में बेचने से काफी मुनाफा होता है। हरि सिंह की बात सुनकर प्रधानमंत्री ने
किसान को सलाह दी कि एक ही प्रकार की फसलों की बुवाई छोड़कर अलग-अलग फसलों को उगा कर किसान ज्यादा कमा सकता है। उन्होने किसान हरि सिंह को बधाई भी दी।


उत्तर प्रदेश के किसान रामगुलाब
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज के किसान रामगुलाब ने कहा कि उनके परिवार में 10 लोग हैं, सभी खेती पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि छोटी जोत की वजह से उन्होंने छोटे-छोटे 100 किसानों का एक संगठन बनाया है जिसके तहत सभी किसान साझा रूप से शकरकंद की खेती करते हैं। पहले धान, गेहूं की खेती करते थे। रामगुलाम ने बताया कि नई फसल का अनुबंध अहमदाबाद की कंपनी से किया है। इसमें कृषि विभाग और नाबार्ड उन्हें मदद कर रहा है। उन्होनें प्रधानमंत्री को बताया कि नए कानून से उन्हें फायदा हो रहा है। किसान ने बताया कि पहले हम फसल 10 से 15 रुपये किलो बेचते थे लेकिन अब नए कानून के तहत उन्हें कंपनी 25 रुपये प्रति किलो का दाम दे रही है।

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