सुमित सिंह
कोरोना की तालाबंदी के बाद देर से उठने वाला शहरी नौजवान आज तड़के उठ गया था। नहीं उसे न तो योग के लिए जाना था न ही सुबह की ताजी हवा में व्यायाम कर सेहत सुधारने। आप सोच रहे होंगे कि जब कहीं नहीं जाना था तो फिर सुबह उठने का मतलब क्या? जी हां उसे कोरोना काल में ठेका बंदी के बाद आज पहली बार मदिरालय खुलने पर जल्द से जल्द गला तर करना था। नशे में झूमना था। बात सिर्फ एक शहर की नहीं हिन्दुस्तान के अलग—अलग शहरों में कमोबेश यही नजारा देखने को मिला। ये उसी हिन्दुस्तान की तस्वीर थी जिस हिन्दुस्तान में कोरोना पीड़ितों को राहत देने के लिए उन्हें भूख से बचाने के लिए, उनके दवा के लिए, उनके लिए जरूरत की सामाग्री जुटाने के लिए हज़ारों के तादाद में सरकार, समाजसेवी संस्थाये और समाजसेवी निश्वार्थ अपना जान जोखिम में डाल दिया था। लेकिन आज कुछ नजारा बदला हुआ था। न तो कोरोना का खॉफ था, न तो सोशल डिस्टेंसिंग का मंत्र याद था बस याद थी तो मदिरालय। गजब नजारा था शहर दर शहर मदिरालय के सामने लंबी कतार। नतीजा सामने था इन गैर जिम्मेवार लोगों के व्यवहार को देखते हुए अंतत: दारू के ठेके बंद करने पड़े और शाम होते देश की राजधानी दिल्ली से खबर आई कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली के दारूबाजों को संदेश दे दिया है कि गला तर करना है करें, चाहें तो झूमे भी लेकिन अब इस दारू की 70 फीसदी अतिरिक्त कीमत कोरोना सेस के रूप में चुकाना होगा। जबकि कुछ सरकार के इस फैसले पर सवाल भी करते हैं और कहते हैं कि देवालय बंद है, शिवालय बंद है तो फिर मदिरालय खोलने की ईजाजत ही क्यों दी। उनका कहना है कि अगर आज मदिरालय की जगह शिवालय खुला होता तो शायद दर्शन व पूजन से कोरोना का खौफ लोगों के अंदर से जाता और लोग और अधिक इच्छाशक्ति के साथ इस लड़ाई को लड़ते।
आइये समझते है कोरोना और नशे का तालमेल
नशा मनुष्य को नाश की ओर ले जाता है, आप को आप के परिवार,समाज और देश को। नशा एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो कि महामारी से भी बड़ा जड़ समाज में फैला चुकी है। इसे रोकने के लिए सरकार के पास ना कोई वैक्सीन है और ना ही दवा। नशा एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो हमें हमारे समाज को, हमारे देश को तेजी से निगल रही है। चाहे शहर हो या गाँव हो आज पढ़ने लिखने की उम्र में लड़के हो या लड़की नशे के आदि हो चुके हैं।
नशीले पदार्थो की समस्या आज विश्वव्यापी समस्या के रूप में हम सब के समाने खड़ी हुई है। लगभग सभी देशों ने नशीले पदार्थो पर रोक लगाई हुई है। तमाम क़ानून भी बने हैं, कुछ देश ने तो मृत्युदंड का भी प्रावधान किया है। पर वास्तविक जीवन में सरकारें नशीले पदार्थो को रोक पाने में असफल हैं।
देश विदेश के आंकड़ो पर दृष्टिपात करने पर पता चलता है कि नशा किस क़दर मनुष्य पर कहर बरपा रहा है। नशे को लेकर गौतम बुद्ध कहते है कि जिस राज्य में मदिरा आदर प्राप्त करेगी, वह महाकाल के अभिशाप से नष्ट होता चला जायेगा। बुद्ध कहते हैं कि मदिरापान महाहिंसा है। गौतम बुद्ध ने अपने पंचसिल सिद्धान्त में पांचवा और अंतिम सिद्धांत नशामुक्ति को ही लेकर कहा था।
नशे की आदत बुरी आदत होती है। इसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में नशे की कई रूप प्रचलित है। जैसे गुटके,शराब,अफीम,चरस, गांजा आदि इससे देश की जड़े कमजोर होती है। नशा रोकने हेतु सरकार को सकारात्मक नीतियां बनानी चाहिए। नशे की आदत से मानव पर होने वाले दुष्प्रभाव को रोकने के लिए नशा मुक्ति शिविरों का आयोजन होना चाहिए। मानव अपने अल्प समय के सुख हेतु स्वयं वह अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारता है।जिससे भावी पीढ़ी भी उनका अनुशरण करने लगती हैं। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भड़कीले विज्ञापनों द्वारा लोगों को गुमराह करती हैं। साथ ही साथ कई सारे सेलिब्रिटी, हीरो, हीरोइन से प्रचार कराकर युवाओं को भटकाने का भी कार्य करती हैं।नशे की आदत युवाओं में भी बाल काल से ही होने पर वो अनेक रोगों के शिकार हो जाते हैं। इनमें से सबसे ख़तरनाक कैंसर होता है।
2008-09 कोटपा के नियम अनुसार भारत सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध कर दिया है।यदि कोई ऐसा करता है तो उस पर ₹200 का जुर्माना लगाया जाता है, पर वास्तविकता से आप सभी परिचित ही होंगे कि कानून बनाना और पालन कराने में भारत सरकार अभी बहुत पीछे है।
महात्मा गांधी कहते हैं कि – अगर मुझे एक घंटे के लिए भी सारे हिंदुस्तान का सर्वशक्ति संपन्न शासक बना दिया जाये,तो पहला काम में जो करूंगा वह यह होगा कि तुरंत तमाम मदिरालयों को बिना कोई मुआवजा दिए बंद करा दूंगा।
नेपोलियन कहते हैं- हमें शत्रु की अपेक्षा मदिरा से अधिक डरना चाहिए। कुल मिलाकर सत्यानाशी नशे से जो महाहिंसा या हिंसा का महान श्रोत या कारण है। हमें आत्मरक्षा तो करनी ही होगी। साथ ही साथ समाज और राष्ट्र की प्रगति को ध्यान में रखते हुए कुछ कारगर प्रयत्न करने होंगे समझदारी का यही तकाजा है कि समय रहते देश को चेतना होगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरे विश्व को पहले से बताया है कि कोरोना वायरस उनमें ज्यादे इफ़ेक्ट कर रहा है जो शराब या किसी भी नशीले पदार्थों का सेवन कर रहें हैं। कई डॉक्टर का कहना है कि मरने वालों की तादाद उनकी ज़्यादा है जो नशे में संलिप्त हैं। क्योंकि कोरोना सीधे फेफड़ों पर अटैक करता है, और नशा करने वाले इंसान के फ़ेफ़डे कमज़ोर हो जाते हैं।
वैसे इस वैश्विक महामारी से अभी तक 1 लाख से अधिक लोगों कि पूरे विश्व में मृत्यु हुई है। पर इन नशीले पदार्थों के बिक्री की वजह से कैंसर जैसे गंभीर बीमारी से लाखों लोग प्रतिदिन मरते हैं। लाखों के तादाद में बच्चों के सर से पिता का साया उठ जाता है। लाखों घर बीमारी के इलाज़ के खर्च की वजह से बेघर हो जाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 के मन की बात में देशवासियों व ख़ासतौर पर युवाओं को नशे से दूर रहने को कहा था, साथ ही साथ जल्द ही एक हेल्पलाइन नम्बर भी जारी करने को कहा था। पर इस कोरोना ने आज पूरे विश्व में नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगा दी है, क्यों न कुछ दिनों तक ही। पर आज घरेलू हिंसा या आपराधिक मामले में भी कमी देखी गई है। एक शोध में पता चलता है कि विश्व में 90 प्रतिशत अपराध लोग नशे में ही करते हैं।
22 मार्च को जब देश के माननीय प्रधानमंत्री जी देश के नाम पर संबोधन करतें हैं। देशवासियों को 41 दिन के लॉक डाउन की बात करतें है। तब सबसे ज़्यादा समस्या इन्ही नशा माफियाओं को होती है। गाँव की एक महिला जिसका नाम बबिता है उसके ख़ुशी का ठिकाना नही रहता है वो कहती है कम से कम इन 41 दिनों में मेरे पति मुझे मारेंगे तो नही। लेकिन आज उन्हें फिर से उन्हीं सारी समस्याओं से दोचार होना पड़ेगा।
ऐसे में जरूरी है कि हम कोरोना से तो लड़े ही नशे से भी लड़े ताकि इस समस्या से निपटा जा सके।
( संस्थापक, काशियाना फाउंडेशन )
