राजपथ पर जल शक्ति मंत्रालय की झांकी से झांकता लद्दाख का जल जीवन मिशन

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चंदन कुमार

जल ही जीवन है, लेकिन इसी जीवन दायिनी शक्ति से देश की एक बहुत बड़ी आबादी वंचित रहे और उसे बूंद—बूंद पानी के लिए मशक्कत करना पड़े तो स्वाभाविक रूप से जल की महत्ता समझ आती है। लेकिन ऐसे माहौल में जल बचाने और उसका समुचित इस्तेमाल करने का मंत्र जब जल जीवन मिशन  बन जाये न सिर्फ सरकार के स्तर पर बल्कि समुदाय के स्तर पर भी तो भविष्य के प्रति आशान्वित होना स्वाभाविक है। वो दिन अभी भी नजर  से ओझल नहीं होता मानो कल की ही बात हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। लक्ष्य रखा गया ​था कि हर घर नल का जल पहुंचाना है। इस मिशन की सफलता को इन आंकड़ों के जरिए समझा जा सकता है कि घोषणा के बाद से मात्र 29 महीनों से भी कम अवधि में, जल जीवन मिशन ने भारत में 5.61 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों, 8.4 लाख स्कूलों और 8.6 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को नल के पानी की आपूर्ति प्रदान की है।

कहां से शुरू हुआ था सफर
जल जीवन मिशन की घोषणा के समय केवल 3.23 करोड़ घरों में नल का पानी था। वहीं जेई-एईएस प्रभावित जिलों में नल के पानी की आपूर्ति भी 3% से बढ़कर 40% हो गई है और आकांक्षी जिलों में यह 7.2% से बढ़कर 39% हो गई है। स्वाभाविक है कि जल जीवन मिशन न सिर्फ आम दिनों में लोगों को पानी की सुविधा मुहैया करा रहा है अपितु सर्दी के महीने में महिलाओं और बच्चों द्वारा पानी लाने में होने वाले कठिनाई को दूर करते विशेष रूप से ग्रामीण भारत में करोड़ों लोगों के जीवन के बदलाव का वाहक भी बन रहा है।
क्या है लक्ष्य
जल जीवन मिशन के जरिए देश के सबसे कठिन इलाकों में उन समुदायों को नल का जल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो विषम जलवायु वाले क्षेत्र हैं और जहां पीने का पानी मुहैया करा पाना किसी चुनौती से कम नहीं है। मसलन लद्दाख, हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड या राजस्थान और गुजरात के रेगिस्तान की बहुतायत आबादी पीने के पानी की कमी का सामना करती है।

लद्दाख जैसे दुर्गम जगह पर मिल रही है मिशन को सफलता
गणतंत्र दिवस के मौके पर जलशक्ति मंत्रालय द्वारा लद्दाख के जल जीवन मिशन को झांकी के जरिए प्रदर्शित किया जा रहा है।
चेंजिंग लाइव्स झांकी दर्शाती है कि कैसे कठोर सर्दियों में 13,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर, जल जीवन मिशन लद्दाख के लोगों के घरों में स्वच्छ नल का पानी उपलब्ध कराकर उनके जीवन की गुणवत्ता को आसान और बेहतर बना रहा है। वहां, सर्दियों में दिन के दौरान अधिकतम तापमान शून्य से नीचे रहता है और रात का तापमान -20 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है।
वर्फीले मौसम में या अत्यधिक सर्दी होने पर प्रत्येक दरवाजे पर स्वच्छ नल का पानी उपलब्ध कराना बहुत बड़ी चुनौती है। हो भी क्यों न? जल की आपूर्ती करने वाली निष्क्रिय हो जाती हैं, पानी के पाइप जम जाते हैं और फट जाते हैं।
लद्दाख में इस मिशन के तहत दूरदराज के गांवों में इंसुलेटेड पाइप की मदद से पानी पहुंचाने के लिए जनवरी महीने की कड़ी ठंड में भी काम हो रहा है। झांकी में दर्शाया गया है कि 13,000 फुट की ऊंचाई पर सर्दियों में तापमान -20 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान में बुरादे और अल्युमीनियम से बनी 4 इंच डायामीटर की स्पेशल-इंसुलेशन से ढकी पाइपें में पानी चलता रहता है। पानी न जमें, इसमें सौर-ऊर्जा की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
लद्दाख की विषम भौगोलिक स्थिती
लद्दाख की भौगोलिक स्थिती न सिर्फ चुनौतीपूर्ण है बल्कि लद्दाख का जनसंख्या घनत्व देश में सबसे कम है यानी2.8 व्यक्ति/वर्ग किमी। स्वाभाविक है कि आबादी बिखरी हुई हो। गांव बिखरे हुए हैं और वर्षा कम होती है। सर्दियों के दौरान दर्रे बंद होने के कारण लद्दाख साल में कुछ महीनों के लिए देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है। ऐसे में आम अवाम के जरूरी इस्तेमाल की सामग्री की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित होती है। इसके अलावा, अधिकांश जल स्रोत दुर्गम क्षेत्रों में हैं, लद्दाख के कई क्षेत्रों में जल निकाय सर्दियों में जम जाते हैं, निर्माण के लिए बहुत श्रम की आवश्यकता होती है और सामग्री को उठाने और परिवहन के लिए जानवरों और हेलीकॉप्टरों की मदद ली जाती है।
क्या है रास्ता

ठंड में गिरते तापमान के कारण, नियमित जीआई पाइप के स्थान पर एचडीपीई पाइप का उपयोग किया जाता है और मुख्य आपूर्ति लाइनें फ्रॉस्ट लाइन के नीचे रखी जाती हैं। जहां कहीं भी पाइप फ्रॉस्ट लाइन से ऊपर आते हैं, वे इन्सुलेशन के लिए 4 ”डीएम ग्लास वूल, वुड, एल्युमिनियम जैकेटिंग में संलग्न होते हैं। सौर ऊर्जा जल आपूर्ति श्रृंखला में एक अभिन्न भूमिका निभाती है और पाइप लाइन में पानी के निरंतर प्रवाह को सुनिश्चित करती है। जमे हुए जल स्रोतों से पानी निकालने के लिए तकनीकी चुनौतियां तो हैं ही लेकिन साथ ही तकनीक के इस्तेमाल के जरिए ही इन चुनौतियों से पार जाने का रास्ता भी बनता है।
सफलता की कहानी लिखता मिशन

ऐसे क्षेत्रों में जहां लोग बर्फ को खोदकर पिघलने के बाद पीने को मजबूर थे, अब उनके घरों, स्कूलों और आंगनबाड़ियों में आराम से नल का पानी मिल रहा है। इतना ही नहीं, सेंसर आधारित आई ओ टी सिस्टम के माध्यम से वे आपूर्ति किए गए पानी की मात्रा, गुणवत्ता और निगरानी के बारे में लाइव डेटा जानते हैं। गांवों में महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) का उपयोग करके पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
महिलाओं के लिए वरदान बना मिशन
यही वजह की झांकी में स्थानीय महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) का उपयोग करके पानी की गुणवत्ता की जांच करते हुए दिखाया गया है। जल जीवन मिशन ने अब तक 8.6 लाख से अधिक महिलाओं को एफटीके की मदद से घरों में स्वच्छ नल का पानी सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित किया है। देश में जल परीक्षण प्रयोगशालाएं अब जनता के लिए अपने पेयजल परीक्षण के लिए खुली हैं।
पानी की आपूर्ति, क्लोरीनीकरण आदि के बारे में लाइव तापमान और वास्तविक समय डेटा प्रदर्शित करने वाला एक डिजिटल बोर्ड और मिशन की प्रगति भी प्रस्तुत की जाती है। बड़ी बात यह है कि जल जीवन मिशन के तहत दो साल में लद्दाख की तीस प्रतिशत आबादी तक जल जीवन मिशन के तहत नल से जल पहुंचाया गया है।

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