महाकुंभ आए तो जरूर देखे… आटरामपुर गांव का पंचायत भवन ग्राम

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मनीष अग्रहरि

 

  • विकास अधिकारी अंकिता सिंह के काम से नजीर बना गांव, घूमने लायक है पंचायत भवन।

 

प्रयागराज: 73वे संविधान संशोधन, 1992 द्वारा पंचायतों को सशक्त बनाने का प्रयास किया गया, मगर अभी भी आधारभूत संरचना में ग्रामीण भारत बहुत पीछे है। प्रयागराज महाकुंभ से महज 20 किलोमीटर दूर और लखनऊ-प्रयागराज हाइवे से 3 किलो मीटर दूर कौड़ीहार ब्लाक अंतर्गत आटरामपुर उर्फ नवाबगंज गांव में महिला ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ( सचिव) और प्रधान की सोच से एक ओर जहां ग्रामीणों को आधुनिक पंचायत भवन मिला तो वही दूसरी ओर सचिव और ग्राम प्रधान का नवाचार अन्य ग्राम पंचायतों के लिए नजीर साबित हो रहा है।

 

क्यों है सबसे अलग
साल 2021 में बने शहीद चंद्रशेखर आजाद नाम के इस पंचायत भवन (ग्राम संसद ) की खासियत इसे दूसरे पंचायत भवनों से अलग करता है। यहां महानगरों की तर्ज पर शेल्फी पॉइंट (आई लव आटरामपुर) और कलात्मक, आकर्षक रूप से लान बनाते हुए एक सजावटी हिरण रखा गया है,जो बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। साथ ही पंचायत भवन के सामने का हिस्सा कलात्मक टाइल्स से सजाया गया है। अन्दर सचिव, प्रधान, पंचायत सहायक के लिए अलग, अलग अत्यंत सुविधायुक्त सुसज्जित चैंबर बनाया गया है, और आधुनिक संसाधन, सुविधा से युक्त एक बड़ा सभागार भी मौजूद है। इसी परिसर के अंदर अमृत वाटिका, अमृत सरोवर, सामुदायिक शौचालय भी मौजूद है जो कि इसे अन्य गांवों से अलग करता है। आकर्षण का केंद्र होने के कारण स्थानीय लोग यहां पिकनिक मनाने आते है। इस बावत ग्राम प्रधान राजाराम मौर्य कहते है कि मेरी इच्छा थी कि गांव का पंचायत भवन अत्याधुनिक, अच्छा और आकर्षण का केंद्र बने, मूर्त रूप देने के लिए मैने शहर की रहने वाली तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी अंकिता सिंह को जिम्मेदारी सौंप दी। उन्होंने इंटरनेट से सहारा लेकर अच्छे-अच्छे मॉडल खोजे, जिसमें से एक आप सभी के सामने है।

 

 

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क्या बोली पंचायत सचिव
समाज शास्त्र में परा स्नातक तत्कालीन सचिव अंकिता सिंह ने बताया कि मैं शहर की रहने वाली हूं, मगर मन पूरी तरह से गांव में रमा है। जब मुझे गांव में काम करने का मौका मिला तो ख्याल आया कि क्यों न शहरों जैसी आधुनिक बिल्डिंग गांव में विकसित की जाए, पंचायत भवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार मैने इंटरनेट से मदद ली। आमतौर पर सरकारी बिल्डिंग भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है, मगर यहां स्थित जुदा है। इस मुद्दे पर अंकिता सिंह कहती है पिता भूपेंद्र सिंह के दिए संस्कार और पति रवींद्र सिंह द्वारा मिलने वाले सहयोग से गांव को सजाने, संवारने का सपना साकार हो गया। अधिकारी और ग्रामीण है खुश: पंचायत भवन में अनूठा, आधुनिक नवाचार होने से सभी पंचायत भवनों से यहां की स्थित अलग हो गई। इससे यहां कई बार दौरे पर आए जनपद स्तरीय अधिकारियों ने जहां वाह किया वही दूसरी ओर ग्रामीण भी तारीफों के पुल बांध रहे है।

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