Village / Town Panchayat

बदला-बदला सा दिखता है मेरा गांव

आशुतोष कुमार सिंह मां के बाद अगर कोई सबसे सुन्दर शब्द है तो वह है गांव। गांव की चर्चा होते ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है। आम, महुआ, जामुन, कटहल, बेर, पीपल एवं नीम के पेड़ों के संग की दोस्ती याद आने लगती है। आंगन में गौरइयों की चहकती आवाज हो अथवा फूदक-फूदक कर चलने …

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बदलकर भी नहीं बदला मेरा गाँव

डाॅ पवन कुमार सिंह दुहाई कोशिका महरानी, बाल बच्चा के जान बकस दे मइया, बाढ़ में दूध चढ़ैबो अरु दुहाई हे कोशिका महरानी, बाल बुतरू के जान बकस दे माय, भादो में दूध चढ़ैबो आरु माघी पूर्णिमा में पाठी देबौ गे माय। बाबा कहा करते थे कि कोसी को पक्का घर नहीं सुहाता। इसके दोनों …

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