सरकार भूली.. दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक को याद रहा गांव से किया गया वादा

मंगरूआ

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दरभंगा: कोरोना महामारी के दौरान अन्य राज्यों से बिहार लौटने वालों, विशेष रूप से गांव में लौटने वाले ग्रामीणों को बिहार में ही काम के अवसर,गांव में ही काम के अवसर दिए जाने को लेकर सरकार के स्तर पर व्यापक प्रयास किये जाने को कई तरह के दावे किये गये। स्कील मैपिंग की बात की गई। गांव लौटे प्रवासियों को जब बजट में हिस्सेदारी देने की बात आई तो तमाम सरकारी दावे फिसड्डी साबित हुए,और बजट में इसका जिक्र भी नहीं हुआ। लेकिन इन सब के बीच इस पीड़ा को शहर में रहकर महसूस करने वाले और उस दौरान गांव आकर उसमें भागीदारी करने वाले भी कई लोग थे। जिन्होंने इस वैश्विक आपदा के दौरान गांव गढ़ने का संकल्प लिया था। गांव में परंपरागत कौशल को तकनीक का आधार देकर बाजार से जोड़ने के ताने—बाने इस कोरोना के दौरान बुने थे। स्वाभाविक था रास्ता मुश्किल रहा होगा लेकिन जैसे ही कोरोना का प्रभाव कम हुआ और लोगों की रोजी रोटी के लिए जद्दोजहद बढ़ी इन प्रवासियों ने अपने मूल गांव व आसपास के ग्रामीणों के सपनों में रंग भरने का कार्य शुरू किया।
आईये आपको दरभंगा जिले के पिंडारुच ग्राम में अनादि उद्यम विकास संस्थान द्वारा इसी दिशा में किये जा रहे प्रयासों से रूबरू कराया जाये। वसंत पंचमी के पावन दिन के अवसर पिंडारुच ग्राम में संस्थान द्वारा स्थापित वस्त्र छापा कला प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया गया। उद्देश्य और संकल्प बस एक ही है कि अनादि फाउंडेशन गांवों में हस्तशिल्प, कौशल विकास एवं उद्यम विकास के जरिए गांवों को गढ़ना चाहता है और इसके सूत्रधार बने हैं दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास के शिक्षक और अनादि फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ प्रदीप कांत चौधरी।
स्वा​भाविक है इतिहास से सीखा है और इतिहास से सबक लेते हुए वर्तमान जरूरतों और प्रचलनों को अतीत से जोड़ते हुए भविष्य की बुनियाद गढ़ना चाहते हैं,गांव के तरक्की को नया आधार देना चाहते हैं। डॉ चौधरी कहते हैं बिहार के विकास के लिए वस्त्र उद्योग बहुत आवश्यक है।
लेकिन बिहार में ऐसे विकास के लिए एक खर्चीले टेक्सटाइल पार्क की बजाय 100 सस्ते टेक्सटाइल विलेज के निर्माण की जरूरत है। उन्होंने तीन स्लोगन में अपनी बातों को सूत्रबद्ध किया: भोजन भी, वस्त्र भी; घर भी बाहर भी; सरकार भी, बाजार भी। उपस्थित सभी वक्ताओं ने जोर डाल कर कहा कि वस्त्र उद्योग कम पूंजी से शुरू किया जा सकने वाला एक ऐसा व्यवसाय है जो बिहार के ग्रामीण जीवन में संपन्नता का नवयुग ला सकता है।
अनादि फांउंडेशन का कामकाज

अनादि फाउंडेशन ने मिथिला चित्र कला को ब्लॉक प्रिंट में लाने का अभियान भी शुरू किया है। मिथिला चित्रकला पहले सिर्फ दीवारों पर बनाई जाती थी। फिर इसे कागज पर बनाया जाने लगा और उसके बाद आज से महज 50 वर्षों पूर्व इसे कपड़े पर लिखा जाने लगा। अनादि फाउंडेशन का मानना है कि अब इसे ब्लॉक प्रिंट में ले जाने का समय आ गया है। इससे उत्पादन लागत घटेगी और यह मिथिला चित्रकला को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
व्यापार की व्यापक संभावना

ब्लॉक प्रिंटिंग में अरबों रुपये के व्यापार की संभावना है। इससे मिथिला के इलाके में न केवल चादर, पर्दा, साड़ी, ड्रेस मटेरियल आदि का उत्पादन शुरू हो सकता है, बल्कि उनकी सिलाई कर परिधान उत्पादन भी किया जा सकता है। मिथिला सुजनी कढ़ाई में भी काफी संभावनाएं मौजूद हैँ।
निशुल्क प्रशिक्षण का पुख्ता प्रबंध

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सप्ताह में तीन दिन डेढ़ घंटे की क्लास होगी। सप्ताह में 2 दिन प्रैक्टिकल क्लास और एक दिन थ्योरी क्लास होगी। यह प्रशिक्षण 3 महीने यानी 12 सप्ताह का होगा। तकरीबन 50 घंटे के इस प्रशिक्षण के अतिरिक्त यह सुविधा भी होगी कि यहां प्रशिक्षु 50 घंटे का अतिरिक्त अभ्यास भी कर सकते हैं।


सिद्धांत को व्यवहार के पटल पर कसने की तैयारी

सैद्धांतिक कक्षाओं में वस्त्र एवं परिधान से संबंधित भारत सरकार द्वारा निर्धारित CBSE पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। और व्यावहारिक कक्षा में छपाई टेबल लगाना, रंग बनाना, ब्लॉक से छपाई करना, आदि मुख्य रूप से सिखाया जाएगा। इसके अतिरिक्त डिजाइन, मार्केटिंग, अकॉउंट, फाइनेंस, प्रोड्यूसर कंपनी संचालन आदि विषयों की भी थोड़ी थोड़ी जानकारी दी जाएगी। इस निःशुल्क प्रशिक्षण के पहले बैच के लिए 40 लड़कियों का चयन किया गया है।
परंपरा को आधुनिक कौशल के साथ जोड़ने का प्रयास

इस कार्य के लिए संस्थान ने जयपुर से अनुभवी मास्टर ट्रेनर दिलीप कुमार को आमंत्रित किया है। डॉ प्रदीप कांत चौधरी ने जयपुर की रागा टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के प्रति इस परियोजना में गहन सहयोग के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया और यह भी बताया कि यहां से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद यदि किसी को और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी तो जयपुर में भी उसकी व्यवस्था की जाएगी।
उद्घाटन कार्यक्रम में ये रहे शामिल

इस अवसर पर मुख्य अतिथि मृणाल रंजन, डी जी एम, नाबार्ड, बिहार एवं विशिष्ट अतिथि शेरिल शर्मा, सी ई ओ, रागा टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज, जयपुर, मारिया ग्लोरिया, सी ई ओ, तानाबाना टेक्सटाइल, मेड्रिड, स्पेन, डॉ रानी झा, प्रसिद्ध मिथिला चित्रकार, एवं आकांक्षा विष्णु, डी डी एम, नाबार्ड, दरभंगा ने संस्थान को अपनी शुभकामनाएं दी।
क्रमश: जारी…

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