जरूरी है अंदर के गांव को बचा कर रखना

डॉ प्रदीप कांत चौधरी बचपन गांव में नहीं बीता। गांव कभी कभार जाता था, पर उसकी कोई ऐसी याद नहीं है, कोई नोस्टाल्जिया नहीं है। हालांकि गांव से इतना दूर भी नहीं था, कस्बानुमा शहर लहेरियासराय-दरभंगा जहां मेरा बचपन बीता उसमें शहर की कोई ऐसी चमक नहीं थी कि गांव जाने पर कोई खास अंतर … Continue reading जरूरी है अंदर के गांव को बचा कर रखना