किसानों के साथ गांव मजबूत होंगे, खेती के साथ भारत समृद्ध होगा!

नई दिल्ली: केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ‘कृषि कुंभ’ कहलाने वाले तीन दिवसीय वार्षिक पूसा कृषि विज्ञान मेले का 25 फरवरी को शुभारंभ किया। इस मेले में बड़ी संख्या में देशभर के आम किसान, प्रगतिशील किसान आए हैं। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी सरकार कभी ये हिमाकत नहीं कर सकती कि वो कोई ऐसा कानून बनाए, जो किसानों का नुकसान करने वाला हो। भारत सरकार ने कृषि सुधार कानून बनाए, जिनके माध्यम से किसान चाहे तो मंडी के बाहर भी, कहीं भी, किसी को भी मनचाही कीमत पर अपनी फसल बेच सकता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने किसानों को मंडी के बाहर उपज की खरीद-बिक्री पर किसी भी तरह के टैक्स से माफी दी, बिना टैक्स के कहीं भी उपज बेचने की अनुमति दीऔर कानूनी बंदिशों से आजादी दी, तो इसमें गलत क्या है।उन्होंने कहा कि जो राज्य सरकारें टैक्स लगा रही है, उनके खिलाफ तो नहीं बोल रहे है, आंदोलनकारी भाई भी उन लोगों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, जिन्होंने (भारत सरकार ने) किसानों की फसल पर टैक्स माफ कर दिया।

इन किसानों के समक्ष तोमर ने सवाल किया कि क्या यह आंदोलन न्यायोचित है, तो किसानों ने एक स्वर से आवाज उठाई-नहीं। किसानों द्वारा सरकार के समर्थन में सकारात्मक प्रत्युत्तर पर श्री तोमर ने कहा कि दुर्भाग्य से यह आंदोलन हो रहा है, हमारे देश में लोकतंत्र है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और कुछ लोग तो देश में ऐसे है कि जब सुबह उनकी नींद खुलती है, तभी से वे मोदी जी को कोसने का, रात को सोने तक, संकल्प ले लेते हैं। बस, अंतर इतना ही है कि कभी चेहरा किसी का होता है, कभी चेहरा किसी और का।

आत्मनिर्भर किसान की थीम पर आयोजित इस मेले के मुख्य अतिथि कृषि मंत्री ने किसानों से, मोदी सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र की मजबूती और प्रगति के लिए संचालित अनेक योजनाओं व कार्यक्रमों का पूरा लाभ लेने का आग्रह करते हुए कहा कि देश का किसान मजबूत होगा तो गांव मजबूत होगा, खेती समृद्ध होगी तो भारत समृद्ध होगा, तभी आने वाले कल में भारत दुनिया के श्रेष्ठ राष्ट्र के रूप में स्थापित हो पाएगा। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सिरमौर बने, इसमें सबसे अधिक भूमिका कोई निर्वाह कर सकता है तो वह मेरे देश का अन्नदाता किसान है। श्री तोमर ने आह्वान किया कि सरकार की योजनाओं के साथ ही नए-नए कृषि अऩुसंधान का लाभ लीजिए, खेती को आत्मनिर्भर बनाइए, अपने देश को भी आत्मनिर्भर बनाइए।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानी के क्षेत्र से कानूनी बंदिशें हटाने, 10 हजार नए एफपीओ बनाने और 1 लाख करोड़ रुपये के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड जैसे ठोस उपायों के कारण निजी निवेश गांव-गांव तथा खेतों तक पहुंचेगा। इससे देश के 86 प्रतिशत छोटे व सीमांत किसानों को काफी लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ए.के. सिंह ने बताया कि तीन दिवसीय मेले के मुख्य आकर्षण है- फल-फूल सब्जी एवं रबी फसलों की उन्नत प्रजातियों एवं उनकी उत्पादन प्रोदौगिकियों का जीवंत प्रदर्शन, उन्नत कृषि यंत्रों, बीजों एवं पौधों की प्रदर्शनी एवं बिक्री, किसान गोष्ठी, कृषि साहित्य का निःशुल्क वितरण, किसान सलाह, मृदा एवं जल का परीक्षण, किसानों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच सेवा।

इससे पहले केंद्रीय मंत्री व अन्य अतिथियों ने सौर ऊर्जा आधारित पूसा फार्म सन फ्रिज का उद्घाटन और फसल प्रदर्शनी का अवलोकन किया व किसानों से चर्चा की। तोमर ने संस्थान के प्रकाशनों का विमोचन व अध्येता किसानों का सम्मान किया। सम्मानित किसान हैं- जिंतेंद्र कुमार सिंह (वैशाली, बिहार), धीरेंद्र कुमार भानुभाई देसाई (भरूच, गुजरात), रवींद्र माणिकराव मेटकर (अमरावती, महाराष्ट्र), सुखजीत सिंह भंगू (पंजाब), भंवरलाल कुमावत (राजसमुंद, राजस्थान)। कार्यक्रम में पद्मश्री किसान कमल सिंह चौहान, सुल्तान सिंह व चंद्रशेखर सिंह, आईसीएआर के सचिव संजय सिंह भी मौजूद थे।

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