समस्याओं का अंबार लिए विकास की बाट जोहता दिघवारा नगर पंचायत

राहुल राज
दिघवारा: सोनपुर और छपरा के बीच स्थित दिघवारा नगर पंचायत। इसी दिघवारा में प्रखंड मुख्यालय भी है। वैसे तो आजादी के पहले भी स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका बखूबी निभाने वाला दिघवारा प्रखंड अपने ऐतिहासिक विरासत के साथ—साथ खास राजनीतिक पहचान लिए हुए है। इतना ही नहीं दिघवारा नगर पंचायत ने न जाने कितने स्वतंत्रता सेनानी, प्रशासनिक अधिकारी, लोक कलाकार,शिक्षाविद, व्यवसायी समाज को दिए जिनकी अपनी खास पहचान है।
बावजूद इसके आजादी के 75 जयंती के मुहाने पर खड़ा दिघवारा नगर पंचायतआज ​भी विकास की बाट जोह रहा है। दिघवारा और कुव्यवस्था मानो एक दूसरे की पर्याय बन गई हों और समस्यायें मानो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही हों। अब एक समस्या हो तो बात भी की जाए, इस नगर पंचायत में अनेकानेक समस्याएं हैं। ये स्थिती तब है जब इसे नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त है और स्थानीय निवासी नगर पंचायत के प्रावधानों के मुताबिक सरकार को टैक्स भी देते हैं। लेकिन बदले में उन्हें जो मिलता है वो है ​स्थानीय जनप्रतिनियों और प्रशासन द्वारा विकास का आश्वासन और उसी आश्वासन रूपी लॉलीपॉप के आगे चुनाव दर चुनाव लोग विकास का झुनझुना बजाते रहते हैं।
अब आप कहेंगे कि ऐसा भी क्या है? तो आईये आपको लिए चलते हैं दिघवारा बाजार में और रूबरू कराते हैं कथित विकास की कुछ तस्वीरों से। ये जो तस्वीरे है वो है दिघवारा नगर पंचायत के मुख्य बाजार (राईपट्टी चौक) का है। जहां थोड़ी सी बारिश होने सड़के न सिर्फ जलमग्न हो जाती हैं बल्कि कीचड़ से सनी इन सड़कों पर विकास बदबू ​बिखेड़ता नजर आएगा और सड़क की फिसलन ऐसी मानो पूरा तंत्र ही इस कुव्यवस्था के जंजाल में फंसकर औधे मुंह गिड़ पड़ा हो। बारिश का पानी,सड़क पर कादो कीचड़ और दोनो तरफ की दुकानों में फैला पानी। यही तस्वीर बनती है इस नगर पंचायत की।

ऐसा इसलिए है क्योंकि दिघवारा नगर पंचायत बाजार से जल निकासी का जरिया बनने वाले नाली की सफाई न जाने पिछले बार कब हुई थी। पूरी नाली पिछले तीन वर्षों से पूरी तरह भरी हुई है और साफ सफाई का महकमा मानो कानो में तेल डालकर बरसात के गुजरने का इंतजार कर रहा हो। परेशानी का आलम ये है कि दूर दराज के 20 गांवों से अपनी नित्य की जरूरतों को पूरा करने और खरीदारी के लिए आने वाले नागरिकों और दुकानदारों को इसी नाली की पानी से होकर आना जाना लगा रहता है। ऐसा लगता है स्थानीय नेता और प्रशासन ने इन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया है। नाली मरम्मत,सफाई,स्वच्छता सड़क निर्माण इत्यादि के नाम पर पंचायत कार्यालय से प्रति वर्ष सरकारी धनराशि निर्गत होती है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि ये पैसे जाते कहां है ये किसी को नही मालूम। नगर पंचायत में अधिकारियों से लेकर वार्ड सदस्य तक सब का अपना अपना कमीशन बंधा है। यानी इस फंड पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की गिद्ध नजर जमी रहती है और ये सब मिल जुलकर इन पैसों को ठिकाने लगाने की कला में महारत हासिल किए हुए हैं।

सवाल ये है कि आखिर कब दूर होगी दिघवारा नगर पंचायत की समस्या,कब घूमेगा विकास का पहिया,और कब विकसित नगर पंचायत बनेगा दिघवारा नगर पंचायत।

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