बंगलुरु का मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज़ हाई स्कूल…हाईटैक लैब,हुनरमंद बच्चे..लक्ष्य 75 सैटेलाइट लांंचिंग

मनोरमा सिंह
बंगलुरु: सरकारी स्कूलों के बारे में कई रूढ़ मान्यताएं हैं बात चाहे शिक्षा के स्तर की हो या सुविधाओं की, लेकिन बंगलुरु का मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज़ हाई स्कूल इन सब धारणाओं को पिछले कई साल से खारिज कर रहा है, बात चाहे शिक्षा के स्तर की हो या कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले अपने स्कूल के छात्रों को बेहतरीन बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की, यह स्कूल लगातार एक मानक और उदाहरण पेश करता रहा है। इसी स्कूल की एक और उपलब्धि 75 सैटेलाइट तैयार करने और लांच करने का प्रोजेक्ट है जो इस साल शुरू हो रहा है और जिन्हें अगले साल स्वतंत्रता दिवस के 75 वें साल के मौके पर क्रियान्वित करने की योजना है। उपग्रह लॉन्च करने की ये योजना देश के किसी भी सरकारी स्कूल द्वारा किया जाने वाला अपनी तरह का पहला प्रयोग है।

क्या कहती हैं प्रधानाचार्य
इस बारे में 2018 से विद्यालय में बतौर स्कूल की प्रधानाध्यापिका कार्य कर रही लीला जीपी कहती हैं,हमारा स्कूल मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज़ हाई स्कूल देश का एक बेहतरीन सरकारी स्कूल है, सभी केंद्रीय विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब हैं लेकिन कर्नाटक के उत्तरी जिलों में यह पहला स्कूल है जहाँ अटल टिंकरिंग लैब की स्थापना की गई और फिलहाल तीन स्कूल हैं जहां अटल टिंकरिंग लैब हैं। लीला जीपी इन लैब की स्थापना को छात्रों के बढ़िया अकादमिक प्रदर्शन से सीधा जोड़कर देखती हैं। हालांकि प्रधानाध्यापिका ने ये भी जानकारी दी कि अभी कार्ययोजना और टाइमलाइन तय होना बाकी है, हालांकि “डेल ” कंपनी की ओर से तकनीकी और सॉफ्टवेयर सहयोग मिलेगा, उनके मुताबिक “डेल” कंपनी के विशेषज्ञ हफ्ते में दो दिन छात्रों को तकनीकी सहयोग मुहैया कराएँगे और बाद में इंडियन टेक्नोलॉजिकल कांग्रेस एसोसिएशन और इसरो भी इस परियोजना में छात्रों की मदद करेंगे। उनके स्कूल को ही इस प्रोजेक्ट के लिए क्यों चुना गया इसके जवाब ने लीला जीपी ने बताया कि इससे पहले उनके विद्यालय के छात्रों ने अखिल भारतीय स्तर विज्ञान परियोजना में भाग लिया था जहां छात्रों के द्वारा बनाया गया प्रोजेक्ट पहले पुरे देश के सौ बेहतरीन प्रोजेक्ट में शामिल हुआ फिर पचास में और इसी परियोजना के ईनाम के तौर पर मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज़ हाई स्कूल को केंद्र सरकार और नीति आयोग की ओर से अटल टिकरिंग लैब का उपहार मिला।
अटल टिकरिंग लैब की खासियत स्कूल के साथ साथ आसपास रहने वाले विज्ञान और प्रयोगों में रूचि रखने वाले सभी बच्चों के लिए भी निःशुल्क उपलब्ध होना है, लीला जीपी इसे एक क्रांतिकारी शुरुआत मानती है जिससे आनेवाले कुछ सालों में बड़ा बदलाव संभव है। बेहतरीन शिक्षा सभी का हक़ है इसी बात को ध्यान में रखते हुए मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज़ हाई स्कूल को को-एड बनाते हुए इसी साल से हाई स्कूल में लड़कियों को भी दाखिला दिया जा रहा है। लैब की स्थापना के बाद स्कूल में बच्चों के दाखिला लेने की संख्या बढ़ी भी है हालांकि लड़कियां अभी कम हैं और लैब में भी उनकी मौजूदगी कम है। लीला जीपी इन सब के लिए खासतौर पर उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ सी एन अश्वथ नारायण का धन्यवाद भी कहती हैं जो इसी क्षेत्र के विधायक भी है और लगातार उनके स्कूल के लिए एक मेंटर की भूमिका में रहे है।

गैर सरकारी संस्थानों का भी बहुत योगदान
मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज़ हाई स्कूल के बढ़िया प्रदर्शन में शिक्षणा फॉउंडेशन और सी एन अश्वत्नारायण फाउंडेशन जैसे गैर सरकारी संस्थानों का भी बहुत योगदान है जैसे लॉक डाउन के दौरान जब कमजोर आर्थिक पृष्ठ्भूमि के अधिसंख्य छात्रों को ऑनलाइन पढाई के लिए कम से कम एक स्मार्ट फोन की जरूरत थी तब डॉ सी एन अश्वथ नारायण ट्रस्ट और आर वी शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान की ओर से 1,000 उच्च गुणवत्ता वाला टैब प्रदान छात्रों को मुहैया कराया गया। 6 राज्यों में खासतौर पर सरकारी स्कूलों के बच्चों के शिक्षा स्तर को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे शिक्षणा फॉउंडेशन के नवीन के मुताबिक जल्दी ही ये लोग प्रति पांच छात्र एक हाई एन्ड लैपटॉप भी मुहैया कराने जा रहे हैं। जबकि शिक्षणा फॉउंडेशन से जुड़े चेतन जैसे सदस्य लगातार छात्रों से निजी तौर पर जुड़कर उनका मागर्दशन करते रहे हैं, इससे छात्रों के बीच भरोसे और आत्मविश्वास का एक इकोसिस्टम तैयार हुआ है।


पूरी तन्मयता से लगी हुई हैं लैब इंचार्ज
मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज़ हाई स्कूल के अटल टिकरिंग लैब की इंचार्ज मैत्रा एसपी वो शख्स हैं जो इस सैटेलाइट लांच कार्यक्रम के दौरान साल भर पूरी तरह से व्यस्त रहने वाली हैं। लेकिन इस बात की उन्हें ख़ुशी ज्यादा है, मैत्रा स्कूल के पास में ही रहती हैं और अटल टिकरिंग लैब और वहां आने वाले छात्र चाहे वो स्कूल के हों या आसपास के ड्रॉपआउट बच्चे हों उनके साथ नौकरी के साथ साथ निजी प्रतिबद्धता के साथ काम करती हैं। इसलिए उन्हें किसी छात्र की जरूरत पर रविवार को भी काम करना सहर्ष स्वीकार होता है। इस बारे में पूछने पर वो कहती हैं मैं अपने सरकारी स्कूल के छात्रों को सहयोग करना चाहती हूं, ये हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है। लॉक डाउन के दैरान स्कूल के साथ लैब भो बंद रहा लेकिन लॉक डाउन हटते के बाद स्कूल अभी नहीं खुले हैं लेकिन लैब ओपन हैं।
क्या कहती है इंचार्ज मैत्रा एसपी
इस प्रोजेक्ट की इंचार्ज मैत्रा एसपी कहती हैं आप किसी भी दिन आकर यहां आने वाले बच्चे चाहे वो स्कूल के हों या आसपास के उन्हें जाँच सकते हैं, खासतौर पर कोडिंग के सन्दर्भ में हाई स्कूल के छात्र होकर भी उनका ज्ञान स्तर इंजीनियरिंग के छात्रों जैसा है, वो सी,सी प्लस प्लस और जावा में अभी ही सिद्धहस्त हो चुके हैं। हालांकि मैत्रा एसपी लड़कियों की कम भागीदारी को लेकर भी चिंता जताती हैं, उनके मुताबिक अभी लड़किओं की रूचि ज्यादातर सिलाई और कढ़ाई जैसे हुनर सीखने में है और इसका करण वो लड़कियों का कन्नड़ माध्यम में पढाई करने को मानती हैं। ऐसी छात्राओं को अंग्रेजी भाषा के स्तर पर सहयोग करने लिए भी विद्यालय की ओर से मदद की जाती है। सैटेलाइट कार्यक्रम का वर्कप्लान अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन छात्र इसकी शुरुआत का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं ये बात जरूर बतौर लैब इंचार्ज, मैत्रा एसपी को ये मालूम है। इंडियन साइंस कांग्रेस, इंडियन टेक्नोलॉजिकल कांग्रेस, इसरो, कुछ इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र और आईबीएम और डेल जैसी कंपनियों का सहयोग इस प्रोजेक्ट के लिए रहेगा।

छात्रों में प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साह
इसकी तस्दीक मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज़ हाई स्कूल  के अमित और शिव जैसे छात्र भी करते हैं। झारखंड के बोकारो से आने वाले अमित परमाणिक जो बंगलुरु में ही जन्में और पले -बढे हैं। वे मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज हाई स्कूल के दसवीं के छात्र हैं, इन दिनों खासा उत्साहित हैं और बेसब्री से अगले साल पंद्रह अगस्त के दिन का इंतज़ार कर रहे हैं जब उनके स्कूल से एक साथ 75 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जायेंगे और वो भी वैसे 75 सैटेलाइट जिसको विकसित करने और बनाने में उनकी भी भागीदारी होगी। अमित के लिए ये एक सुंदर सपने के सच होने सा है और भविष्य की संभावनाओं के प्रति आश्वस्त होने का है। उसका सपना एक इंजिनियर बनने का है भले उसकी माँ घरों में काम करती हों और पिता भवन निर्माण सेक्टर में मजदूर हों, अमित बढ़िया अंग्रेजी बोलते हैं, पढाई में उनकी रूचि है खासतौर पर विज्ञान विषयों में इसलिए आठवीं में मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज हाई स्कूल में दाखिला लिया और इसी स्कूल के दसवीं के उस सेक्शन के 45 छात्रों में से एक हैं जिसमें अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाया जाता है दूसरा सेक्शन कन्नड़ माध्यम का है जिसमें आठ छात्र पढ़ते हैं। हालांकि अभी कब कैसे क्या करना है इसके बारे में अमित और उसके सहपाठियों को जानकारी नहीं है लेकिन ये सूचना जरूर है कि वो ऐसे एक प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने जा रहे हैं जो एक अनूठी उपलब्धि साबित होगा, उनका स्कूल उपग्रह विकसित करने वाला देश का पहला सरकारी स्कूल बनने जा रहा है। शिव भी दसवीं के छात्र हैं, उन्हें भी इस प्रोजेक्ट की जानकारी है, बचपन में अपने पिता को खो चुके शिव की तीन बहनें और दो भाई हैं, भाई काम करके परिवार और इनकी इनकी पढाई को सपोर्ट करते हैं, शिव का सपना कम्प्यूटर इंजीनियर या सॉफ्टवेयर बनने का है और इस विद्यालय ने उन्हें अपने सपने पुरे करने का आत्मविश्वास दिया है। शिव भी कन्नड़ मातृभाषा के बावजूद अंग्रेजी माध्यम वाले सेक्शन में हैं। उन्होंने आठवीं में इस विद्यालय में दाखिला अटल टिंकरिंग लैब के कारण लिया और तबसे लगातार कई वैज्ञानिक प्रयोग और प्रोजेक्ट में भाग लेते रहे हैं।
बहरहाल, आनेवाले कुछ दिनों में कार्यक्रम की रुपरेखा तय हो जाएगी और काम शुरू हो जायेगा, आमतौर पर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों के स्तर के इस प्रोजेक्ट पर देश में पहली बार आठवीं से दसवीं तक के छात्र काम करेंगे, जाहिर है पुरे देश की नज़रें इन पर होंगी। और अटल टिकरिंग लैब की अवधारणा की सफलता भी साबित होंगी जिसे पुरे देश में फैले लगभग 1200 से ज्यादा केन्दीय विद्यालयों समेत लगभग दस हजार स्कूलों में स्थापित किया गया है लेकिन कुल पौने ग्यारह लाख से भी अधिक सरकारी स्कूलों वाले देश में अटल टिकरिंग लैब जैसी सुविधा अभी भी केवल कुछ हजार बच्चों को ही हासिल है।                                              …मल्लेश्वरम गवर्नमेंट बॉयज़ हाई स्कूल
(दैनिक भाष्कर से साभार)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *