लोक कला

गांव अगर खो गए, नहीं बचेगा देश और नहीं बचेगी संस्कृति

डॉ.राजश्री देवी गांव शब्द में ही एक अद्भुत आकर्षण है। गांव बोलते ही मन में हरे-भरे खेत, गाय-बैलों के चरने के लिए विशाल मैदान, पानी भरती औरतों का खिल-खिलाकर हंसना, शाम के समय नामघर (कीर्तनघर ) से आती शंख, घंटा, डबा की सम्मिलित मांगलिक ध्वनि, युवक-युवतियों का मिलकर मैदान में बरगद के नीचे बिहु नाचना, …

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​तीस्ता की याद हुई ताजा, बहन सृष्टि ने दी अभूतपूर्व श्रद्धाजलि

संतोष कुमार सिंह सारण: किसी भी कलाकार के लिए इतनी बड़ी श्रद्धाजलि न कभी किसी ने देखा होगा और न ही सुना होगा। लेकिन इतिहास नये रूप में सामने इतनी जल्दी सामने आयेगा इसकी कल्पना तो शायद ही किसी को रही होगी। कुछ ऐसा ही दृश्य था छपरा जिला अंतर्गत रिवीलगंज निवासी व टीवी कलाकार …

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बिहार उत्सव में जूट से बना सामान लोगों को कर रहा अकर्षित

दिल्ली मे जारी बिहार उत्सव के दौरान जूट से बने घरेलू सामानों और नक्काशी कला युवाओं को बेहद प्रभावित कर रही है। यही कारण है कि युवक और युवतियां बिहार उत्सव में जमकर खरीदारी कर रहे हैं। बिहार के 107वां स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली में बिहार उत्सव 2019 का यह कार्यक्रम बिहार की …

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…अबहीं नाम भइल बा थोरा, करब याद..जब ई छुट जाई तन मोरा

निराला सब अकेले जाते हैं, अकेला भी अकेले गये लेकिन वे समूह के मानस में हमेशा रहेंगे बात तब की है,जब बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव का ताजा—ताजी उभार हो रहा था. अपने खास अंदाज की वजह से मशहूर हो चुके थे. लालू प्रसाद के उभार के वक्त एक गाना बहुत मशहूर हुआ …

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अब पियवा के लागल बा कचहरी.. भेजले बा डोलिया कहारी…

अनूप नारायण सिंह कौड़ी—कौडी जोड़ के संचय कइनी खजाना पूंजी , सब खर्चा हो गईले करब से कवन बहाना त पल भर समय ना घटिहे बढिहे समय से खुली सवारी अब पियवा के लागल बा कचहरी भेजले बा डोलिया कहारी  यह निर्गुण अकसर गुरू अकेला जी गाया करते थे………. गुरु अजित कुमार अकेला से पहली …

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