हमारी विरासत

भारत माता के वीर सपूत-स्व. डुमर सिंह

हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए जीवन, परिवार, संबंध और भावनाओं से भी ज्यादा महत्वपूर्ण था हमारे देश की आजादी। इस पूरी लड़ाई में कई व्यक्तित्व उभरे, कई घटनाएं हुई, इस अद्भुत क्रांति में असंख्य लोग शहीद हुए, घायल हुए। अपने सम्मान और गरिमा के लिए हर कोई अपने देश के लिए मौत को गले लगाने …

भारत माता के वीर सपूत-स्व. डुमर सिंह Read More »

आसानी से बदलाव को स्वीकार नहीं करता ग्राम समाज

पिपरा के पतवा सरिखे डोले मनवाकि मनवा में उठत हिलोरगांव की चर्चा होते ही यह गाना मुझे स्वतः याद आ जाता है। मेरे ससुराल का गांव मझई है जो सासाराम जिले में है। मझई में हमारे घर के सामने ही चार तालाब हैं, वहां का दृश्य काफी मनोरम है। खेतों में गेहूं की बालियां जब …

आसानी से बदलाव को स्वीकार नहीं करता ग्राम समाज Read More »

गांव ने जितना दिया..उसकी तुलना में गांव के लिए कहां कुछ कर पाई

आज मैं सोचती हूं कि अपने गांव की कितनी ऋणी हूं मैं, उसकी तुलना में गांव के लिए कहां कुछ कर पाई। फिर भी मैंने कुछ सकारात्मक जरुर किया है। किसी भी महिला से जब कोई पूछता है तुम्हारा गांव कहां है, तो वह पहले अपने मायके का नाम बताती है, फिर कुछ रुककर ससुराल …

गांव ने जितना दिया..उसकी तुलना में गांव के लिए कहां कुछ कर पाई Read More »

उदारीकरण, उद्योगीकरण के बावजूद श्रम की कीमत से वंचित ग्राम समाज

नैनों में था रास्ता, हृदय में था गांवहुई न पूरी यात्रा, छलनी हो गए पांव(निदा फ़ाज़ली)हमारे ग्रामीण समाज में आये महत्वपूर्ण बदलाव के लिहाज से 1990 का दशक काफी महत्वपूर्ण कहा जा सकता है। इस दौरान पंचायती राज संस्थाओं में बदलाव, मंडल आयोग, उदारीकरण, सूचना तकनीक के जरिए गांव में बड़े बदलाव आये। इसने पूरी …

उदारीकरण, उद्योगीकरण के बावजूद श्रम की कीमत से वंचित ग्राम समाज Read More »

परायी बिटिया को सारा प्यार उड़ेल देना चाहते हैं ग्रामवासी

मेरी जन्मस्थली और पैतृक गांव अंजनी पटना के धनरुआ प्रखंड के पतरघट पंचायत में है। यह गांव पटना मुख्यालय से 30 किलो मीटर की दूरी पर पटना गया लाइन पटना के दक्षिण पूर्व दिशा में बसा हुआ छोटा सा गांव है। यदि गांव के रकबे को देखें तो मात्र 300 एकड़ का सुंदर सा गांव …

परायी बिटिया को सारा प्यार उड़ेल देना चाहते हैं ग्रामवासी Read More »

संचार क्रांति ने तेजी से बदला है गांव को

मेरे गांव का नाम कुरंग है। यह अमेठी तहसील में है। मेरी पीढ़ी के पहले के बच्चे प्राइमरी स्कूल में पढ़ने के लिए नौ किलोमीटर दूर जाते थे। दर्जा एक में पढ़ने वाला बच्चा भी नौ दूनी 18 किलोमीटर प्रतिदिन पैदल चलता था। मेरी पीढ़ी के समय स्कूल एक किलोमीटर पर आ गया। अब गांव …

संचार क्रांति ने तेजी से बदला है गांव को Read More »

बाबा ने ठाना… मंदिर बनाकर ही मरूंगा

कुमार विनोद, वरिष्ठ टीवी पत्रकारअब नई दिक्कत शुरु होती है- बघड़ियों के टीले पर. बाबा ने अपने पांच बेटों के साथ टोला तो बसा लिया, लेकिन खाने पीने की दिक्कत तमाम थी. ये फतेहपुर बाजार तो अब हुआ है न, जहां सबकुछ मिल जाता था. पहले नून-तेल-मसाला और सरकारी राशन लेने के लिए भी पुराने …

बाबा ने ठाना… मंदिर बनाकर ही मरूंगा Read More »

ददिहाल के गांव बड़ौत से ज्यादा…ननिहाल के गांव पुरकाजी से रहा है नाता

निशि सिंह हम सभी की जड़ें गांव से जुड़ी हैं। व्यक्ति उम्र के किसी भी पड़ाव पर पहुंच जाये, सफलता की कितनी भी सीढ़ियां चढ़ लें लेकिन जब यादों का पिटारा खोलता है,  तमाम खिड़की, दरवाजों,झिर्रियों के पार बचपन के वो अनमोल क्षण कुछ चुहल,कुछ बदमाशियां, कुछ सखी-कुछ सहेलियां सामने आ खड़े होते हैं। स्वाभाविक …

ददिहाल के गांव बड़ौत से ज्यादा…ननिहाल के गांव पुरकाजी से रहा है नाता Read More »

बदल गया है सामुदायिक जीवन

डॉ अनामिका मेरा जन्म चीन से युद्ध के समय हुआ था। उस समय की घटनाएं याद नहीं हैं। एक-दो दृश्य याद हैं। भैया हमको कहते थे कि चाइनीज है। मेरी नाक चपटी थी, इसलिए चिढ़ाते थे। हमको याद है कि नेपाल के बॉर्डर से आती थी एक बूढ़ी औरत, स्मगलिंग की साड़ियां लेकर। कुछ दूसरे …

बदल गया है सामुदायिक जीवन Read More »

राफेल: गौरवान्वित हुआ विंग कमांडर मनीष सिंह का गांव,आसमान की ओर तकते रहे परिजन

आलोक रंजन बलिया: बागी बलिया आज बल्लियों उछल रहा है। अपने लाल के करतब पर गौरवान्वित हो रहा है। मंगल पांडे का बलिया, चित्तु पांडे का बलिया, पूर्व प्रधानमंत्री और समाजवादी नेता चंद्रशेखर का बलिया, जनेश्वर मिश्र का बलिया। हजारी प्रसाद द्विवेदी का बलिया, केदार नाथ सिंह का बलिया। जी हां खुश हो भी क्यों …

राफेल: गौरवान्वित हुआ विंग कमांडर मनीष सिंह का गांव,आसमान की ओर तकते रहे परिजन Read More »