अरविंद सिंह
नयी दिल्ली: पिछले साल गांव—किसानों का बजट पेश कर वाहवाही लूटने वाली सरकार का इस बार भी जोर कृषि क्षेत्र पर रहने की उम्मीद है। नोटबंदी के बाद सर्वाधिक प्रभावित छोटे किसानों को राहत देने के लिए सरकार कृषि बजट 25 फीसदी तक बढ़ सकती है। उन्हें सस्ते कृषि लोन की सौगात दे सकती है।
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस बार किसी नई कृषि योजना की घोषणा की उम्मीद कम है। इसके बजाय सरकार ने पिछले बजट में 2022 तक किसानों आय दुगुना करने वाली योजनाओं का बजट बढ़ाया जा सकता है। इसमें प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना, प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड योजना शामिल है।
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने पिछले बजट में 9 लाख करोड़ तक कृषि लोन बाटने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन लोन सस्ता न होने से किसानों का संकट व फसलों की लागत बढ़ी है, सरकार इस पर ध्यान दे सकती है।
45—50 हजार करोड़ संभव: फलैगशिप योजनाओं को रफतार देने की कृषि बजट 36 हजार करोड़ से बढ़कर 45 से 50 हजार करोड़ किया जा सकता है।
बीमा योजना बजट बढ़ेगा: 13 जनवरी 2016 को लांच प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना के बजट में भी 30 फीसदी बढ़ोतरी हो सकती है। इसका आवंटन 8 हजार करोड़ रूपया हो सकता है।
पॉच करोड़ सॉयल कार्ड बाटेंगें: कृषि भूमि की जांच और जरूरत के मुताबिक खाद की सॉयल हेल्थ कार्ड योजना सफल रही है। अब तक 9 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड बांटे जा चुके हैं।
कृषि बाजारों को जोड़ेगें: कृषि उत्पादों को व्यापक बाजार मुहैया कराने और सभी बाजारों को जोड़ने के लिए घोषित एकीकृति कृषि बाजार योजना को अमली जामा पहनाया जाएगा। ई प्लेटफार्म के लिए भी अतिरिक्त आवंटन संभव है।
जैविक खेती के लिए अलग से पैसा!
उर्वरकों और कीटनाशक के अंधाधुंध इस्तेमाल के दुष्प्रभावों को देखते हुए जैविक खेती का जो खाका सरकार ने पिछले साल खींचा था, उसकी प्रोत्साहन नीति बजट में आ सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बजट में जैविक खेती के लिए भी अलग से आवंटन की संभावना है। वर्ष 2016—17 में जैविक खेती के लिए 10,000 कलस्टर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था जो मार्च में पूरा होगा। वर्ष 2017—18 में जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए एक लाख नए कलस्टर की घोषणा की जा सकती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अर्थशास्त्री जगदीश शेट्टीकर का कहना है कि सरकार कानूनी संशोधन कर सीधे मंडी में अपना अनाज बेचने की अनुमती दे। भंडारगृहों समेत कृषि में नया निवेश आमंत्रित करना होगा ताकि किसान एक शुल्क चुकाकर अपने उत्पादों को इन गृहों में भंडारित कर सके।
क्या है खेती किसानी का हाल
यदि भारत में खेती—किसानी की स्थिति देखें तो पूरे वैश्विक आबादी का 18 फीसदी भारत में निवास करती है जबकि विश्व के मुकाबले भूमि संसाधन सिर्फ 2 फीसदी है। देश में 16 करोड़ हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है, जिसमें से 14 करोड़ हेक्टेयर जमीन पर खेती हो रही है। इनमें 6 करोड़ हेक्टेयर जमीन को सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। (हिन्दुस्तान से साभार)
