नई दिल्ली: प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना ‘हर खेत को पानी’ को अंजाम तक पहुंचाने पर आम बजट में जोर होगा। लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के साथ कुछ नई परियोजनाओं की घोषणा हो सकती है। किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कृषि उत्पादकता को बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। आम बजट में उन्नत बीज, संतुलित खाद, कीटनाशक और सिंचाई जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के प्रावधान किए जाएंगे।

चालू वित्त वर्ष 2016-17 के आम बजट में सिंचाई को तरजीह दी गई थी, जिसमें लंबित एक सौ से अधिक सिंचाई परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया था। इस दिशा में केंद्र ने रायों के साथ मिलकर इनमें से यादातर को पूरा करा लिया है। इसके चलते साढ़े बारह लाख (12.5 लाख) हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने में मदद मिली है। हालांकि सरकार इसे और गति प्रदान करने के लिए आगामी वित्त वर्ष के आम बजट में कुछ और नये प्रावधान कर सकती है।
चालू साल के आम बजट में प्रति बूंद अधिक पैदावार (पर ड्रॉप-मोर क्रॉप) के लिए कृषि मंत्रालय को 2340 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। सूत्रों के मुताबिक आगामी साल के बजट में इसे बढ़ाकर 3000 करोड़ रुपये से अधिक किया जा सकता है। इस धन से डिप और स्प्रिंकल सिंचाई जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। कृषि मंत्रलय ने इसके लिए रायों के साथ मिलकर प्रस्ताव पहले से तैयार कर लिया है। इसी तरह जल संसाधन मंत्रलय ने लघु व मझोली परियोजनाओं का प्रस्ताव बनाया है। इसके लिए आम बजट में विशेष प्रावधान किये जा सकते हैं। ऐसी 89 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए और वित्तीय मदद बढ़ाई जा सकती है। इससे तकरीबन 90 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने में मदद मिलेगी। इन परियोजनाओं को अगले चार सालों में पूरा करने के लिए 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक की जरूरत होगी। इसे पूरा करने के लिए नाबार्ड से वित्तीय सहायता ली जाएगी। देश की लगभग दो तिहाई खेती असिंचित होती है। इसमें उत्पादकता बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। आने वाले दिनों में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और खाद्यान्न की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। खेती की आधुनिक प्रौद्योगिकी और कृषि मशीनरी को भी आम बजट में स्थान मिलेगा। (दैनिक जागरण से साभार)
