चंडीगढ: लोकसभा चुनाव के ठीक पहले किसानों द्वारा किये गये आंदोलन को लेकर भले ही किसान संगठन मोदी सरकार के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हों लेकिन चाहे केंद्र की सरकार हो राज्यों की तोलमोल के ही बोल रही है। एक तरफ किसान संगठनों से बातचीत की कवायद हो रही है वहीं उनकी तरफ से सरकार विरोधी विशेष रूप नरेंद्र मोदी के खिलाफ की जा रही है बेवजह बयानबाजी को लेकर सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया तो आ रही है लेकिन सधी हुई ताकी बातचीत की गाड़ी पटरी से न उतरे और चुनाव के ठीक पहले ये बड़ा मुद्दा न जाये।

इधर दिल्ली की तरफ जाने वाले सभी बोर्डर पर भारी सुरक्षा बल को तैनात किया गया है। इस बीच नयूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सहित अन्य मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच चंडीगढ़ में बैठक होने वाली है। अब तक किसान संगठनों की तरफ से कहा जा रहा था कि जिस तरह से दिल्ली की सड़कों और दिल्ली जाने वाले मुख्यमार्गों पर बाड़बंदी की गई है उससे ये लगता है कि सरकार जंग लड़ रही है।
बना रहे हैं आक्रमण जैसा माहौल
लेकिन इसके उलट आज जब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जब प्रेस वार्ता किया तो कहा कि किसानों ने तो सेना के आक्रमण जैसा माहौल बना दिया। किसान आंदोलन आज भी उन लोगों की वीडियो सामने आ रही हैं। ऐसा लग रहा है कि जिस प्रकार से कोई सेना आक्रमण करने चलती है इस प्रकार का माहौल बनाया जा रहा है।
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दिल्ली जाना सबका लोकतांत्रिक अधिकार
हालाकि मनोहर लाल ने ये भी कहा कि दिल्ली जाना हर किसी का लोकतांत्रिक अधिकार है। दिल्ली जाने में आपत्ति नहीं है। लेकिन उसका मोटिव भी ध्यान में रखना चाहिए। ये लोग ट्रैक्टर, ट्रॉली और जेसीबी, कई महीनों का राशन साथ लेकर चल रहे हैं। जब इस तरह का आह्वान किया जाता है तो सुरक्षा का ध्यान देना बेहद जरूरी है। इसलिए उनका जो तरीका है उस तरीके पर ही आपत्ति है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट है और भी कई वाहन हैं उसमें जाएं लेकिन ट्रैक्टर और ट्राली पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं हैं। ये तो खेती वाड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाला वाहन है।
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पूर्व के आंदोलन को देख सरकार सतर्क
किसान संगठनों की मांग हरियाणा सरकार से नहीं बल्कि बल्कि केंद्र सरकार से है। किसान आंदोलन की वजह दो साल पहले से ही हम देख चुके हैं कि लोगों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
इस बीच किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल के उस बयान की मनोहर लाल ने आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘हमें प्रधानमंत्री मोदी का ग्राफ नीचे लाना है। ‘ किसान नेता के इस बोल पर मनोहर लाल ने कहा कि किसान आंदोलन के बीच से यह एक राजनीतिक बयान है. क्या इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन होने पर लोग पीएम मोदी का समर्थन करना बंद कर देंगे? जनता में यह संदेश प्रसारित हो रहा है कि यह विरोध का सही तरीका नहीं है।”

