धान उगाने वाले किसानों के लिये कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी

0
178

अक्षत सरोत्री

नई दिल्ली: बड़ी खबर उत्तर भारत के किसानों के लिये सामने आ रही है। धान की खेती को लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों ने अहम एडवाइजरी दी है।

कृषि वैज्ञानिकों ने धान की खेती करने वाले किसानों को चेतावनी देते हुए कहा कि इस समय धान की फसल को नष्ट करने वाली ब्राउन प्लांट हॉपर का आक्रमण हो सकता है।

किसान खेत के अंदर जाकर पौधे के निचले भाग के स्थान पर मच्छरनुमा कीट का निरीक्षण करें। एडवाइजरी में कहा गया है कि इस वक्त धन की फसल वानस्पतिक वृद्धि की स्थिति में है।

इसलिए फसलों में कीटों की निगरानी जरूरी है। किसान तना छेदक कीट की निगरानी के लिए फिरोमोन ट्रैप लगाएं। एक एकड़ में 3 से 4 ट्रैप काफी हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, ब्राउन प्लांट हॉपर कीट का असर सितंबर से लेकर अक्तूबर तक रहता है। इसका जीवन चक्र 20 से 25 दिन का होता है।

इसके शिशु और कीट दोनों ही पौधों के तने और पत्तियों से रस चूसते हैं। अधिक रस निकलने की वजह से धान की पत्तियों के ऊपरी सतह पर काले रंग की फफूंदी उग जाती है।

वैज्ञानिकों ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि संस्थान ने यह भी सलाह दी है कि किसान स्वीट कॉर्न तथा बेबी कॉर्न की बुवाई मेड़ों पर करें।

गाजर की बुवाई मेड़ों पर करें। बीज दर 4-6 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बुवाई करें। बुवाई से पहले बीज को केप्टान 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करें। खेत तैयार करते समय खेत में देसी खाद और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here