मंगरूआ
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव संपन्न हो गया है। जल्द ही नवनिर्वाचित प्रतिनिधि अपना काम काज भी संभाल लेगे। लेकिन कोरोना के दूसरी लहर के बीच हुए पंचायत चुनाव ने ग्रामीण ईलाकों में कोरोना को फैलाने में कैरियर का काम किया। इसका खामियाजा उन परिवारों को भी भुगतना पड़ा जिनकी ड्यूटी चुनाव संपन्न कराने में लगाई गई थी। बड़ी संख्या में शिक्षकों के कोरोना से संक्रमित होकर मरने की खबर आई।
शुरूआत में रहा टालमटोल का रवैया
कोरोना की दूसरी लहर के बीच सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराना खतरे से खाली नहीं है। यह तथ्य शायद ही किसी से छिपा हो। हां और ना में फंसे पंचायत चुनाव में कभी गेंद सर्वोच्च न्यायालय के पाले में डाली गयी तो कभी उच्च न्यायालय के और इन सब के पेंडुलम की तरह फंसी राज्य सरकार ने आखिरकार 15 से 29 अप्रैल के बीच चार चरणों में पंचायत चुनाव कराया और नतीजे 2 मई को घोषित किए गए थे।

पल्ला झाड़ती दिखी राज्य सरकार
पंचायत चुनाव को लेकर राज्य सरकार द्वारा कहा गया कि “हाई कोर्ट के आदेश पर पंचायत चुनाव कराने के निर्णय को योगी सरकार का निर्णय बताकर इसका गलत प्रचार किया गया।” लेकिन इस बीच शिक्षक संघ द्वारा 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री और राज्य चुनाव आयोग को भेजे गए प्रशिक्षण और पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान कथित तौर पर कोरोना संक्रमण से राज्य में कम से कम 706 शिक्षकों / श्रमिकों की मौत हो गई थी। कई राज्य-स्तरीय संघों ने शिक्षकों और कार्यकर्ताओं की मौत के कारण 2 मई को होने वाली मतगणना का बहिष्कार करने की भी धमकी दी थी, लेकिन आखिरकार चुनाव संपन्न हुआ। यह भी कहा जा रहा है मृतकों की संख्या ज्यादा है। राज्य सरकार ने प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा तैयार की गई नई लिस्ट में अब मरने वालों की संख्या 1,621 है और संघ सरकार से मुआवजे की मांग कर रहा है।
मृतकों परिवारों को मिलेगा मुआवजा
इस बीच योगी सरकार ने मृतकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है लेकिन मामला आंकड़े को लेकर फंसा हुआ है। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव आयोग से नियमों में संशोधन का आग्रह किया है। योगी सरकार ने गाइडलाइन में ड्यूटी अवधि में कोविड संक्रमित शिक्षक- कर्मचारियों की मौत को शामिल करने को कहा है।
कोरोना के खिलाफ लड़ाई को पुरजोर तरीके से लड़ रहे योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि चुनाव ड्यूटी के दौरान हर मौत दुखद है और राज्य सरकार की संवेदनाएं प्रत्येक कर्मचारी और उसके परिजनों के प्रति है। चुनाव ड्यूटी करने वाले जो भी लोग कोरोना के कारण दिवगंत हुए हैं, उन्हें चुनाव आयोग की गाइडलान में संशोधन कर मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जानी चाहिए। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ‘चुनाव आयोग की गाइडलाइंस जिस वक्त जारी हुई थीं उस समय कोरोना नहीं था। इसलिए मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव पंचायती को राज राज्य निर्वाचन आयोग से गाइडलाइंस में संशोधन का अनुरोध करने को कहा गया है।’
मृतकों के आंकड़ो को लेकर मतभेद
पंचायत चुनाव में शिक्षकों की मौत को लेकर सरकार और शिक्षक संगठनों की तरफ से अलग-अलग आंकड़े जारी किए गए हैं। सरकार के मुताबिक ये आंकड़ा सिर्फ 3 है जबकी शिक्षक संगठनों के अनुसार, पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले 1,621 शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अन्य विभागीय कर्मियों की कोरोना से मौत हुई है। संगठनों ने सभी के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा राशि और आश्रितों को सरकारी नौकरी की मांग की है।
https://panchayatkhabar.com/the-role-of-panchayats-in…/