गांव को कोरोना मुक्त बनाने में पंचायतों की भूमिका अहम, जल्द होगा उत्तर प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण

संतोष कुमार सिंह
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण समारोह अभी संपन्न नहीं हो पाया है। इस बीच कोरोना संक्रमण के गांव में पांव पसारने से चिंतित योगी आदित्य नाथ अपने पूरे महकमे के साथ गांव का रूख किये हुए हैं। इसका असर भी हुआ है। संक्रमण दर में कमी आई है। कोरोना जांच की गति भी बढ़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जिलाधिकारियों के साथ संवाद के दौरान योगी के प्रयासों की सराहना की है। साथ ही यह भी संदेश दिया ​हर हाल गांवों को बचाना है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ​जिलाधिकारियों को कहा कि आप लोग जिलों के प्रमुख योद्धा हैं। प्रशासन की मौजूदगी से ग्रामीणों का मन बदलता है। लोगों के अंदर साहस आ जाता है। यही वजह है कि कोरोना संकट के दौरान जिला अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। प्रधानमंत्री ने डीएम को संदेश दिया कि कोरोना के दौरान गांव में सही तरीके से लोगों को जागरुक करें। हमें गांव के लोगों को जागरुक बनाना हैं और उन्हें कोरोना से बचाना हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न सिर्फ गांव को कोरोना से मुक्त रखना है और लंबे समय तक जागरूकता का प्रयास जारी रखना है।

साफ है प्रधानमंत्री जब गांव की बात कर रहे हैं उनका मंतव्य ग्रामीण प्रशासन को लेकर है। गांव का प्रशासन मुखिया/सरपंच/प्रधान के हाथों में होता है। जमीनी लोकतंत्र के समर्पित प्रतिनिधियों के हांथो ही गांव सुरक्षित हो सकता है,  क्योंकि इनका जुड़ाव गांव के एक-एक व्यक्ति के साथ होता है। ऐसे में यूपी के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ यह बखूबी समझ रहे हैं कि जबतक उत्तर प्रदेश के नव निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के हांथो में गांव की सत्ता नहीं सौपी जायेगी, उन्हें उनका अधिकार नहीं दिया जाएगा। कोरोना की दूसरी लहर से मुकाबला आसान नहीं होगा। गांव को कोरोना के प्रकोप से बचाने के लिए ग्राम पंचायतों की भूमिका अहम है। यही कारण है कि प्रदेश के मुखिया योगी आदित्य नाथ में ग्राम पंचायत प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य 25 व 26 मई को शपथ लेंगे व पहली बैठक की तारीख 27 मई तय की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अनुमति के बाद राज्य सरकार ने आदेश जारी कर दिया है।                —–पंचायत प्रतिनिधियों
पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा एक वि​ज्ञिप्त जारी कर ग्राम पंचायत द्वारा शपथ ग्रहण के बाद 27 मई को जिलाधिकारी की देख रेख में समस्त ग्राम पंचायतों की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कोविड 19 के दौरान उपजी परिस्थितियों व कारगर तरीके से इसके समाधान के लिए चर्चा की जाएगी। इसी बैठक के दौरान ग्राम पंचायत की 6 समितियों के गठन की कार्यवाही भी होगी और हर हाल कोविड 19 के लिए बनाए गए प्रोटोकॉल के मु​ताबिक गांव में कोरोना से बचाव की लड़ाई को जमीनी स्तर पर तेज किया जा सकेगा।                                                                                                                  —–  पंचायत प्रतिनिधियों
क्या कहते हैं पंचायत प्रतिनिधि
भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 6 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता जिला सिद्धार्थनगर के हसुड़ी औसानपुर  गांव के प्रधान दिलीप त्रिपाठी कहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी की सोच बिल्कुल सही है कि कोरोना के दूसरी लहर के दौरान गांव को बचाया जाना जरूरी है। पहली लहर में गांव सुरक्षित थे। प्रधान के साथ ग्रामवासियों ने मिल जुलकर गांव की निगराणी की थी और गांव बचे रहे। दिलीप कहते हैं कि भले ही उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के बाद अभी शपथ ग्रहण नहीं हुआ हालांकि इस बाबत तिथी घोषित कर दी गई बावजूद इसके जबसे गांव के लोगों ने उनको पुन: प्रधान चुना है वे लगातार कोरोना से गांव को कैसे बचाया जाये इसके लिए काम कर रहे हैं। चाहे कोविड का पहला चरण हो या फिर दूसरा चरण गांव में साफ-सफाई, सैनिटाईजेशन, समय-समय पर मास्क वितरण, हाथ धुलाने के लिए सैनिटाईजर आदि का वितरण करवा रहे हैं। कोरोना के संक्रमण के जांच और सरकार द्वारा चलाये जा रहे कोरोन टीकाकरण अभियान, आरटीपीसीआर के लिए हसुरी ओसान पुर पंचायत में लगाये गये पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लोगों को सूचित करते रहे हैं। इसके साथ ही जो लोग बाहर से आये हैं प्रशासन को उनकी सूची उपलब्ध कराना, सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए लोगों को जागरूक करने का काम पंचायत के चुने गये सदस्यों के साथ मिलकर करते आये हैं और कर रहे हैं। गांव में कोई भूखा प्यासा न रहे इसके लिए जनवितरण के जरिए अनाज दिलवाने, जरूरत मंदों के लिए सरकार के तरफ से 5000 रूपये का प्रावधान है हालांकि शपथ ग्रहण नहीं होने के कारण यह राशि नहीं मिली है। बावजूद इसके वे अपनी तरफ से इसका प्रबंध कर सामाजिक दायित्व निभा रहे हैं। लोगों की मृत्यु के बाद दाह संस्कार के लिए 5000 रूपये दिए जाने का शाषणा देष है लेकिन इस कार्य को पूरा गांव मिल गरीब और मानवता के हक में संपन्न करता रहा है।                                                                                        ———–पंचायत प्रतिनिधियों
दिलीप कहते हैं निश्चित तौर पर शपथ ग्रहण के बाद कोरोना से लड़ाई में नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि अपनी अहम भूमिका निभा पाएंगे। शपथ ग्रहण के बाद ग्राम पंचायत की बैठक होगी। विभिन्न समितियों का गठन होगा, कार्ययोजना बनेगी और कोरोना से लड़ाई के साथ ही पंचायत के विकास के लिए अन्य विकास परक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।                …..पंचायत प्रतिनिधियों
रतसर कला की पूर्व प्रधान
राष्ट्रीय व प्रादेशिक पुरस्कारों से सम्मानित ग्राम रतसर कला बलिया जिले की पूर्व प्रधान स्मृति सिंह कहती हैं कि कोरोना के पहले चरण में जब प्रदेश में पंचायतें काम कर रही थीं तो ग्राम सभा में निगराणी समिती काम कर रही थी। ग्राम निगरानी समिति में आंगनबाड़ी,आशा,एएनएम,वार्ड सदस्य होते थे ताकि गांव में बाहर से आये प्रवासी का लेखा जोखा रख सकें उनको क्वरंटीन करवा सकें। जिस भी व्यक्ति के अंदर कोरोना का कोई भी लक्षण हो उसकी जानकारी न सिर्फ प्रशाषण कों दे बल्कि उनको बाहर घूमने नहीं देते थे और सोशल डिस्टेंसिग और क्वारंटीन होने को प्रेरित किया जाता था। और वो डेटा ग्राम सभा से पूरी तरह से मिलान कर एसडीएम आफिस जाता था ताकि उनको सुविधा दिलवाई जा सके और मॉनिटर किया जा सके।
जिनके घर अलग कमरे, शौचालय नहीं थे उनको क्वारंटीन सेंटर में रखा जाता था।साफ-सफाई,सेनेटाईजेशन की व्यवस्था थी। जहां भी कोरोना का मरीज की सूचना मिलती और उसकी पुष्टि हो जाती तो उनके खाने पीने की निशुल्क व्यवस्था करवाई। इसके लिए कोई फंड नहीं था। अब ये सब नही हो रहा है जो कि कोरोना के पहले फेज में हो रहा था। स्मृति सिंह कहती हैं कि ग्राम निगराणी समिती का गठन नहीं हुआ है। नव निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण के बाद इस काम में तेजी आएगी और कोरोना से गांव को बचाने में पंचायत प्रतिनिधी अपनी अहम भूमिका निभा पाएंगे।                                                           ……………. पंचायत प्रतिनिधियों
उल्लेखनीय है कि कोरोना की दूसरी लहर में पूर्व प्रधान स्मृति सिंह खुद कोरोना के चपेट में आ गई हैं। अपना अनुभव साझा करते हुए कहती है​ कि अन्य लोगों की तरह जब मुझे भी कोरोना संक्रमित होने का पता लगा तो महसूस हुआ जैसे सब खत्म हो गया। क्योंकि दूसरी लहर के दौरान लोगों की मृत्यु दर बहुत थी मेरे गांव से रोज 4,5 मृत्यु केवल कोरोना की ही वजह से हो रही थी। पर फिर घरवालों के सहयोग,कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने, दवा, घरेलू नुस्खे, खान—पान, संयम, आत्मविश्वास, योग और डॉक्टर की कांउन्सलिंग की मदद से बहुत बुरी हालत में होने के बावजूद धीरे धीरे सुधार हुवा और अब मैं ठीक हूं। उम्मीद करती हूं कि लोग अपना हौसला बनायें रखेंगे और कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पंचायतों की जीत, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री के संकल्पों की जीत जरूर होगी।

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