मखाने की खेती से आत्मनिर्भर होती जिला बलरामपुर की महिलाएं

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पूजा श्यामदेव

Balrampur :  जिले की महिला किसान परंपरागत खेती के साथ अब व्यावसायिक खेती भी कर ​रही है। किसानों को नई तरह की खेती कराने में कृषि उत्पादक संगठन काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी के साथ अब हर जिले की महिला किसान मखाने की खेती कर आत्मनिर्भर बन ​रही है। मखाने की खेती सीखने के लिए महिलाएं बिहार के दंरभंगा जिले में प्रशिक्षण लेने जा रही है।

क्या है एफपीओ संगठन
महिला सशक्तिकरण को लेकर जागरूक रहने वाली संस्था ग्रामीण इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से महिला किसानों को एफपीओ से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाने का काम किया जा रहा है। इस फाउंडेशन की तरफ से हर जिले में पांच कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का निर्माण किया गया है। एफपीओ के माध्यम से 300 महिला किसानों को खेती-किसानी के आधुनिक तौर-तरीके सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इन महिला किसानों को मखाने की खेती के बारे में बताया जिसकी मदद से अब हर महिला किसान मखाने की खेती कर ​रही है।

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फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कृष्णा सिंह ने बताया कि हमने हर एफपीओ से पांच-पांच महिला किसानों को प्रशिक्षण के लिए बिहार के दरभंगा जिले मे भेजा। एफपीओ की मदद से महिलाओं को बिहार से लेकर वह वापस छोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। जिसकी मदद से महिलाएं सुरक्षित जा सके। प्रशिक्षित महिलाओं को मखाने की बीजों की व्यवस्था कराकर खेती कराई जाएगी। यदि जिले में मखाने का उत्पादन अच्छा हुआ तो अन्य महिला किसानों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

महिला किसानों को दी जा रही सुविधा
खेती करने से महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिल रहा है। एफपीओ के मदद से बाकी महिलाएं भी आगे आ रही हैं। उन्हें विभाग की योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। महिला किसानों को एफपीओ की सहायता से विशेष प्रोत्साहन दिया जा ​रहा है।

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