
Pumpkin: सार्दियों के मौसम में किसान अधिक मुनाफा कमाने के लिए कई तरह कि खेती करते है। ऐसे मौसम में बाजार कि सब्जियां खूब डिमांड में रहती है। इसलिए किसान खेती करना पसंद कर रहे हैं। जो उन्हें कम समय और कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाकर देती है। हलांकि किसान कई बीज लाकर उन सब्जियों कि खेती करते है। जो अधिक मुनाफा देती है। लेकिन अब किसान ऐसी सब्जियों के बीज भी ऊगाते है। जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। इन्हीं सब्जियों में कद्दू भी एक ऐसी सब्जी है। जिसे कई जगह पर कुम्हड़ा के नाम से भी जाना जाता है। इसलिए कद्दू कि खेती कई राज्यों में होती है। जिनमें उत्तर प्रदेश,कर्नाटक,उड़ीसा,मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र,बिहार, पश्चिम बंगाल,असम,तमिलनाडु,कर्नाटक आदि शामिल हैं।
कद्दू की खेती गर्मियों और सर्दियों दोनों सीजन में की जाती है। वैसे इसके लिए गर्म-शुष्क जलवायु को बेहतर माना जाता है। कद्दू की खेती के लिए कई बातों का ध्यान रखना होता है।
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इन बातों का रखें ध्यान
1. कद्दू की खेती करने के लिए उचित जलनिकासी वाली जगह का चुनाव करना बेहद अहम होता है।
2. सबसे पहले खेत की मिट्टी की जांच होनी चाहिए। ताकि मिट्टी में जो भी कमी हो उसे पूरा किया जा सके।
3. इस खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी को सबसे उपयुक्त माना जाता है।
4. खेतों को तैयार करने के बाद प्रति हेक्टेयर खेती के अनुसार सड़े हुए गोबर की खाद और नीम की खली क्रमशः 40 से 50 टन और 20 किलो डालें।
5. इसकी बेहतर खेती के लिए जमीन का PH 5 से 7 के बीच होना चाहिए।
6. किसान खेतो में 30 किलो अरंडी प्रति हेक्टेयर मिट्टी में मिलाएंगे तो इससे उत्पादन और बढ़ जाता है।
7. एक एकड़ जमीन में 250 ग्राम बीजों की आवश्यकता पड़ती है। बीज उपचार करने के बाद ही बुवाई की जानी चाहिए।
8. फसल को खरपतवार, दीमक और कीटों से बचाने के लिए नीम के तेल और गौमूत्र के मिश्रण का छिड़काव हर 15-20 दिन में अंतराल में करते रहें।
9. खेतों में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था जरूर होनी चाहिए।
10. बीच-बीच में निराई-गुड़ाई करते रहे ताकि फसल का अच्छा विकास हो।
11. कद्दू की फसल लगभग तीन महीने में तैयार हो जाती है।
12. इस खेती के लिए कृषि वैज्ञानिकों से भी सलाह ली जा सकती है।
