वर्षा वर्मा
प्रयागराज: आस्था की संगम नगरी प्रयागराज में 2025 महाकुंभ जल्द ही शुरू होने वाला है। देश-दुनिया से श्रद्धालुओं और साधु-संतों का यहां पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। महाकुंभ में आनेवाले श्रद्धालुओं के साथ ही पर्यटकों के ठहरने के लिए शहर से लेकर संगम पर रहने का इंतजाम किए गए हैं। इस बार महाकुंभ मेले में 35 करोड़ से ज्यादा लोगों के आने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में लोगों के रहने की व्यवस्था पर खासा ध्यान दिया जा रहा है। शहर में होटल, सराय, धर्मशालाओं की संख्या बढ़ाई जा रही है। यहां तक की गेस्ट हाउस भी बनाए जा रहे हैं।
महाकुंभ में कहां रुक सकते हैं
नगरी में गेस्ट हाउस की व्यवस्था भी की गई है। 200 से अधिक गेस्ट हाउस बनाए जा रहे हैं। धर्मशालाओं की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। प्रयाग जंक्शन और रामबाग स्टेशन के पास भी होटल मौजूद हैं। जहां पर रुक सकते हैं। तेजी से चल रहा टेंट सिटी बनाने का काम, महाकुंभ मेले में देश-दुनिया से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन को देखते हुए टेंट सिटी बनाई जा रही है। टेंट सिटी का संचालन एक जनवरी, 2025 से पांच मार्च, 2025 तक किया जाएगा। इनमें बुकिंग निगम की वेबसाइट और महाकुम्भ ऐप के जरिए की जा सकती है। टेंट सिटी में योग और यज्ञ करने की भी सुविधा दी जाएगी। टेंट सिटी में कैफेटेरिया सिटी भी बनाई जा रही है।
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टेंट सिटी का किराया
छह साझेदारों के साथ मिलकर विभिन्न टेंट ब्लॉक की स्थापना की जा रही है। जिसमें आगमन, कुम्भ कैंप इंडिया, ऋषिकुल कुम्भ कॉटेज, कुम्भ विलेज, कुम्भ कैनवस और एरा प्रमुख हैं। विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप इन तंबुओं में पांच सितारा होटल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी जो सुपर डीलक्स टेंट विला, महाराजा, स्विस कॉटेज और डॉरमेटरी प्रारूप में उपलब्ध रहेंगी।
घाटों पर कैसे पहुंचे
महाकुंभ मेला एप के जरिए आपको घाटों से जुड़ी सारी जानकारी मिल जाएगी। एप के जरिए आसानी से घाट और मंदिर पहुंचा जा सकेगा। प्रशासन ने हर जगह साइनबोड्स भी लगाएं हैं। जिनकी मदद से भी घाटों तक आप पहुंच सकते हैं। श्रद्धालुओं को घाटों पर पहुंचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। साथ ही गंगा सेवादूत महाकुंभ के दौरान विशेषतौर पर शौचालय, सड़कों की सफाई व्यवस्था, टेंट सिटी का निरीक्षण करेंगे तथा किसी तरह की गंदगी या गड़बड़ी पाये जाने पर ये दूत आईसीटी सिस्टम के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते है। गंगा सेवादूत प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और आसपास के जिलों से आए हैं।

