उत्तर प्रदेश में गन्ने की जगह मक्के से इथेनॉल बनाये जाने की चल रही है तैयारी

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वर्षा वर्मा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार लगातार खेती किसानी को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है ताकि अन्नदाताओं की माली हालात में सुधार हो। यही कारण है कि प्रदेश सरकार किसानो के लिए नयी— नयी रणनी​तियां बना रही है और नये योजनाओं को आगे ​बढ़ाने की दिशा में काम चल रहा है जिससे किसानों को फायदा मिले और किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

इसी क्रम में अब प्रदेश सरकार ने तय किया है कि गन्ने की जगह मक्के से इथेनॉल बनाने की नीति को आगे बढ़ाया जायेगा। साथ ही लक्ष्य रखा गया है कि अगले चार साल में मक्के का रकबा दो लाख हेक्टेयर बढ़ाया जायेगा। इस योजना के लिए कृषि विभाग और चीनी मिलों के बीच दो दौर की आधिकारिक बैठक भी हो चुकी है।

इस योजना के लिए क्या सुविधा दे रही है सरकार

केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। इथेनॉल का उत्पादन धान, गन्ने और मक्का से होता है। इसमें से धान और गन्ना अधिक पानी लेने वाली फसलें हैं। जबकि, मक्के के लिए कम पानी चाहिए होता है।

तीनों सीजन में होती है मक्का की फसल

इतना ही नहीं मक्का की फसल खरीफ, जायद और रबी तीनों सीजन में लगाई जाती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मक्का से इथेनॉल बनाने की तैयारी की जा रही है।

मक्का विकास योजना के आवंटन राशि में बढ़ोतरी

प्रदेश सरकार ने भी मक्का विकास योजना के तहत इस वर्ष 2024-25 में 27.68 करोड़ रुपये का प्रावधान दिया है राज्य में करीब 8.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का लगाया जाता है। इससे करीब 21.16 लाख मीट्रिक टन मक्का उत्पादन होगा। अब मक्के का रकबा चार साल में दो लाख हेक्टेयर बढ़ाने की योजना है। वहीं मक्का उत्पादन 11 लाख मीट्रिक टन बढ़ाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रत्येक चीनी मिल क्षेत्र में मक्के का रकबा बढ़ाया जाएगा।

दी जा रही है अनुदान..इथेनॉल बनाने से ये होगा फयदा

किसान मक्के की खेती के लिए प्रेरित हों इसके लिए अनुदान से लेकर प्रशिक्षण तक विभिन्न तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। मक्के में करीब 28 से 30 फीसदी नमी होती है। इस वजह से कटाई के बाद इसमें फंगस लगने का डर रहता है। किसानों को इस समस्या से बचाने के लिए 15 लाख के ड्रायर पर 12 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। प्रदेश में अभी 15 कंपनियां इथेनॉल उत्पादन कर रही हैं। इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। इन कंपनियों को सहकारी एजेंसियों से तय दर पर मक्का मिलेगा। ऐसा करने से कई फायदे होंगे। इथेनॉल उत्पादन बढ़ेगा, किसानों को फसल का उचित मूल्य मिलेगा, गन्ने की जगह मक्का से इथेनॉल बनने पर चीनी उत्पादन में भी कमी नहीं होगी।

केंद्र सरकार ने इथेनॉल उद्योगों के जलग्रहण क्षेत्र में मक्का उत्पादन में वृद्धि नामक परियोजना शुरू की है। इसके लिए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत 15 राज्यों को चुना गया है। इस योजना का संचालन भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान कर रहा है। जाहिर है सरकारी प्रोत्साहन मिलने पर सरकार मक्के का उत्पादन बढ़ेगा और मक्का उत्पादक किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा साथ ही भारी संख्या में लोगों रोजगार भी मिलेगा।

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