यूनिसेफ के ‘मिशन सुरक्षाग्रह: कोविड पर हल्ला बोल’ पहल से कोरोना टीकाकरण में आयी तेजी

संतोष कुमार सिंह

  • सुरक्षा प्रहरियों के सहयोग से कोरोना टीकाकरण महाअभियान के तहत 61,836 लोगों को लगा कोरोना टीका

पटना: एक तरफ बिहार में बाढ की समस्या है वहीं दूसरी तरफ पंचायत चुनाव का बिगुल भी बज गया है यानी ग्रामीण स्तर पूरा महकमा या तो बाढ़ प्रभावित ईलाकों में लगा होगा और जन प्रतिनि​धी अपने चुनावी जीत के गणि​त में उलझे हुए हैं बावजूद इसके सरकार के आह्वान पर आयोजित राज्यव्यापी कोरोना टीकाकरण महाभियान को जिस तरह की सफलता मिल रही है वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय है। राज्य सरकार के इस अभियान यूनिसेफ जैसी संस्थाएं और उनके द्वारा स​मर्थित गैर सरकारी संगठन अभियान को सफल बनाने और गांव—गांव में टीकाकरण करवाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं और सरकार के साथ कदमताल मिला कर चल रहे है। यही कारण है कि बिहार में चलाये जा रहे है टीकाकरण अभियान के तहत कल 22.50 लाख से अधिक लाभार्थियों का टीकाकरण कर बिहार ने रिकॉर्ड कायम किया।

यूं हासिल हुआ ये गौरव
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस पूरे अभियान को 10 हजार से अधिक टीकाकरण केन्द्रों और लाखों स्वास्थ्यकर्मियों के जरिए बिहार ने देश भर में एक दिन में सबसे ज्यादा कोरोना टीकाकरण करनेवाले राज्य का गौरव भी हासिल किया। इस कड़ी में यूनिसेफ द्वारा तीन एनजीओ भागीदारों के सहयोग से चलाए जा रहे ‘मिशन सुरक्षाग्रह: कोविड पर हल्ला बोल’ जागरूकता अभियान की भी बड़ी भूमिका रही है। इसके तहत छह बाढ़ग्रस्त ज़िलों – दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, सुपौल, पूर्णिया और मुज़फ्फ़रपुर के कुल 14 प्रखंडों में मिशन सुरक्षाग्रह टीम के सक्रिय प्रयास से लगभग 62 हज़ार लोगों का टीकाकरण करवाया गया।

रंग लायी सुरक्षा प्रहरियों की सक्रियता

सुरक्षाग्रह के अंतर्गत यूनिसेफ द्वारा प्रशिक्षित किए गए 524 सुरक्षा प्रहरियों (कम्युनिटी मोबिलाइजर्स) द्वारा वैक्सीनेशन महाअभियान के बारे में प्रचार-प्रसार करने से लेकर कोरोना टीकाकरण केंद्रों पर भारी संख्या में लाभार्थियों का आगमन सुनिश्चित करने से लेकर उनके पंजीकरण, पहचान पत्र संकलन व सत्यापन और लोगों के प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाई गई। कुछ जगहों पर आवश्यकतानुसार लोगों की काउंसलिंग के साथ-साथ वैक्सीनेशन सत्र समाप्त होने के पश्चात सुरक्षा प्रहरियों ने डाटा एंट्री में भी सहयोग दिया।

दिव्यांगजनों और दिहाड़ी मजदूरों का रखा गया विशेष ध्यान

दिव्यांगजन सुगमतापूर्वक कोरोना टीकाकरण  केंद्र तक आ सकें, इसके लिए सुरक्षा प्रहरियों द्वारा विशेष ध्यान दिया गया। विशेष परिस्थितियों में कुछ दिव्यांगजनों के घर जाकर टीका दिलवाने का प्रबंध भी किया गया। दरभंगा और मधुबनी में क्रमशः 92 और 12 दिव्यांगजनों का टीकाकरण करवाया गया। मधुबनी जिला के बिस्फी ब्लाक के एक पैर से पोलियोग्रस्त मोहम्मद गयासुद्दीन टीका लेकर काफी खुश नजर आए। उन्होंने सुरक्षा प्रहरियों की सराहना करते हुए कहा कि इनलोगों के प्रयास से न सिर्फ मैं बल्कि मेरे गांव के सभी योग्य लाभार्थियों को इस महाअभियान की जानकारी मिली और हमने कोरोना को हराने के लिए टीका भी ले लिया।

इसी तरह, सुबह-सुबह अपने काम-काज पर निकलने वाले दिहाड़ी मजदूरों को समय से लाइन में लगवाकर टीका दिलवाने का काम किया गया। इससे न उनके काम का नुकसान हुआ और न ही वे कोरोना टीकाकरण से वंचित रहे। केवल मधुबनी में ही 357 दैनिक श्रमिकों को अहले सुबह मोबलाईज कर उनका टीकाकरण संपन्न करवाया गया।

क्या कहती हैं यूनिसेफ बिहार प्रमुख

यूनिसेफ बिहार की राज्य प्रमुख नफ़ीसा बिन्ते शफीक ने कोरोना टीकाकरण महाअभियान की रिकॉर्ड सफलता पर सरकार को बधाई देते हुए कहा कि कोविड महामारी को काबू करने के लिए उचित जानकारी और जागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। चूकि बाढ़ग्रस्त इलाकों में और भी ज़्यादा जोखिम है, इस लिहाज़ से यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है। हम सरकार के साथ मिलकर वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ कोविड प्रोटोकॉल के विभिन्न पहलुओं पर सभी उम्र के लोगों को शिक्षित और जागरूक करने का भी लगातार काम कर रहे हैं।

क्या है मिशन सुरक्षाग्रह?

सुरक्षाग्रह उन प्रमुख पहलों में से एक है जिसके माध्यम से छह बाढ़ प्रवण जिलों की लगभग 36 लाख आबादी को कोविड उपयुक्त व्यवहार और बाढ़ की तैयारियों के बारे में जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है। यूनिसेफ द्वारा तीन एनजीओ – बिहार सेवा समिति, आगा ख़ान ग्राम समर्थन कार्यक्रम (भारत) और घोघरडीहा प्रखंड स्वराज्य विकास संघ के माध्यम से मई महीने से इस कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है।
यूनिसेफ ने दिया प्रशिक्षण
यूनिसेफ द्वारा प्रशिक्षित मिशन सुरक्षाग्रह के 600 से अधिक कर्मियों व सुरक्षा प्रहरियों द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर कोरोना टीकाकरण और बाढ़ की तैयारी के लिए नियमित रूप से जागरूकता अभियान चलाने के अलावा समुदाय के लोगों को आपदा का बेहतर ढंग से सामना करने हेतु भी तैयार किया जा रहा है। इसमें स्थानीय युवाओं-पुरुषों के अलावा बहुत सारी युवतियां और महिलाएं भी शामिल हैं। इलाके में अपनी अच्छी जान-पहचान और विश्वसनीयता की वजह से ये लोगों को ठीक से जागरूक कर पाते हैं। घर-घर जाकर जागरूक करने के अलावा लोगों को सार्वजनिक स्थलों जैसे स्कूल, पंचायत भवन आदि में समय-समय पर ट्रेनिंग दी जाती है।

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