
– यूनिसेफ ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पूरे भारत में की ‘यंग वॉरियर्स मूवमेंट’ की शुरूआत
– उद्देश्य देश को वर्तमान कोविड-19 संकट से उबरने में मदद करने हेतु पांच मिलियन युवाओं को जोड़ना
नयी दिल्ली: कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहे और तीसरी लहर के प्रति आशंकित भारत की उम्मीद देश के 300 मिलियन युवाओं पर टिकी है, जो इस विनाशकारी महामारी से निपटने और उबरने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इस संदर्भ में, युवाओं, सीबीएसई, शिक्षा मंत्रालय (एमओई), युवा मामलों के मंत्रालय (एमओवाईएएस) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) के साथ मिलकर 2018 में यूनिसेफ द्वारा लॉन्च किये गए जनरेशन अनलिमिटेड के इंडिया चैप्टर युवाह (YuWaah) के तहत पूरे भारत में एक आंदोलन शुरू किया गया है, जिसका नाम यंग वॉरियर्स मूवमेंट है, जिसका उद्देश्य मौजूदा कोविड-19 संकट में देश की मदद करने हेतु पांच मिलियन युवाओं को जोड़ना है। इस आंदोलन को नागरिक समाज, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और निजी क्षेत्र के 1,350 से अधिक भागीदारों ने अपना समर्थन दिया है। …….यंग वॉरियर्स
इस पूरे अभियान यंग वॉरियर मूवमेंट युवाह में युवाओं की भूमिका और कोरोना महामारी के दौरान भारत में इस अभियान की महत्ता के रेखांकित करते हुए भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि डॉ. यास्मीन अली हक कहती हैं कि यंग वॉरियर मूवमेंट युवाह के उस कार्य की एक हिस्सा है जो हम काफी समय से करते रहे हैं। युवाओं को एक्टिव चेंजमेकर्स के रूप में जोड़ने वाले युवाह, भारत में 2019 में लॉन्च किया गया था। इसके तहत, एक युवाओं की टीम है और वही हमें इस महामारी में मदद करने की प्रेरणा देते हैं। ….यंग वॉरियर्स
इस विचार को युवाओं, सरकारी विभागों व मंत्रालयों, नागरिक समाज से जुड़े संगठनों, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और निजी क्षेत्र की तरफ से काफी सर्मथन मिला था। यही कारण है कि हमने यूनिसेफ इंडिया की तरफ से यंग वॉरियर मूवमेंट शुरू करने की दिशा में प्रेरित हुए। बड़ी बात यह है कि यह काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसकी गती को देखते हुए और लोगों से प्राप्त सर्मथन से हमें काफी प्रेरणा मिली है। आप समझ सकते हैं कि इसकी सफलता पर मैं भी हैरान हूं।
यदि कार्यक्रम की रूपरेखा की बात की जाये तो यह अभियान दैनिक जीवन के कामों में युवाओं को जोड़ने का एक प्रयास है, जिसमें स्वास्थ्य एवं आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को बढ़ावा देना, वैक्सीन पंजीकरण, कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार और मिथकों को तोड़ना भी शामिल है। … यंग वॉरियर्स
जैसा कि ज्ञात है कि यूनिसेफ बच्चों के कल्याण के लिए काम करता है और विगत 25 वर्षों से मैं खुद यूनिसेफ के साथ काम कर रही हूं। हमने पूर्व में भी कई अभियान किये हैं और जब हमने युवाह कार्यक्रम की तैयारी शुरू की, तो हमने पूरे भारत के युवाओं के साथ इस बारे में काफी विचार-विमर्श किया था। इस बातचीत में बड़ी संख्या में विशेषज्ञों के साथ बच्चे भी शामिल हुए। हमने पाया कि वे न सिर्फ इस अभियान में भागीदारी करने को तैयार हैं बल्कि संवाद की प्रक्रिया में कदम कदम पर द्विपक्षीय संवाद के पक्षधर भी हैं। यानी न सिर्फ वे हमारी बात सुनना चाहते हैं बल्कि वे अपनी बात भी कहना चाहते हैं और कह रहे हैं। तो इस मायने में दोनों तरफ से जब संवाद आगे बढ़ा और हमने बच्चों की बातें सुनी और अपनी बातें उनके सामने रखी तो एक तरह का भरोसा कायम हुआ। हमने पाया कि बच्चों की तरफ से जो बातें सामने आ रही हैं वो मौजूदा चुनौतियों के अनुकूल है और हमारे परंपरागत विचारों से बिल्कुल अलग। युवाओं ने हमें साफ कर दिया कि वे केवल निष्क्रिय भागीदार नहीं बल्कि आंदोलन का नेतृत्व करना चाहते हैं। और उन्होंने हमें उन कामों को तय करने में मदद की है जो वे युवा योद्धा के रूप में कर सकते थे। … यंग वॉरियर्स
भारत युवाओं का देश है। ऐसे में भले ही युवा इस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित समूहों में से एक हैं, फिर भी वे भारत को मौजूदा संकट से बाहर निकालने हेतु अच्छे नेटवर्क और क्षमताओं से ओतप्रोत साबित हुए हैं। ऐसा भी नहीं है कि ये पहली बार हो रहा है और युवा पहली बार अपनी सार्थक भूमिका अदा कर रहे हैं। कोविड 19 के दौरान भी हरेक स्तर युवा पहले से ही सार्वजनिक तरीके से कार्रवाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले कर रहे हैं, कोविड-19 उपयुक्त व्यवहारों का संदेश दे रहे हैं, और परामर्शदाता का कार्य भी कर रहे हैं।
भारत सहित देश और दुनिया में कोविड के खिलाफ लड़ाई एक बड़ी लड़ाई है, लक्ष्य बड़ा है। इस लिहाज से हमने अभियान की पूरी रूपरेखा बनाई है। यानी यंग वॉरियर्स मूवमेंट में पांच कार्य शामिल हैं। पहला, टीकाकरण को बढ़ावा देकर, इसकी पंजीकरण प्रक्रिया को समझाकर, टीकाकरण के बाद क्या करें और क्या न करें, यह बताकर युवा वैक्सीन मित्र की भूमिका निभा सकते हैं। वैक्सीन मित्रों की मदद से वैक्सीन से जुड़ी कई भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है। …यंग वॉरियर्स
दूसरा, वो स्ट्रेस बस्टर की भूमिका निभा सकते हैं। इस वक्त बड़ी संख्या में लोग मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। स्ट्रेस बस्टर की भूमिका में वे परिवार के सदस्यों, दोस्तों, भाई-बहनों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में किसी विशेषज्ञ से बात करने हेतु प्रोत्साहित कर सकते हैं। जैसा कि देखने को मिल रहा है कि कोरोना के संबंध में कुछेक भ्रांतिया फैल रही हैं। बहुत सारी सकारात्मक खबरें भी आ रही हैं लेकिन नकारात्मक खबरें भी हैं और नकारात्मक बातें हमेशा तेजी से फैलती हैं। इस पड़ाव पर हमारे यंग वॉरियर्स एक तरफ लोगों के मन में इन खबरों की वजह से घर करने वाली भ्रांतियों को दूर करने में सहायक होंगे वहीं दूसरी इतनी सारी नकारात्मक खबरों के बीच से सकारात्मक खबर, जन जीवन के विभिन्न स्तर पर किये जा रहे पहल ओर उससे जुड़ी सकारात्मकता की तरफ लोगों के साथ ही हमारा ध्यान दिलाने में सहायक साबित हो सकते हैं।
तीसरा, वो ‘फेक न्यूज़ पुलिस’ बन सकते हैं, ताकि कोविड-19 से संबंधित गलत सूचनाओं और इसके प्रसार को रोकने के उपाय को समझा जा सके। चूकि ये सारे युवा समाज के बीच से ही होंगे तो हर समाज अपने बीच के लोगों की बातों को आसानी से सुनता है। वे लोगों को बड़ी आसानी से उनके डर को दूर करने में मददगार साबित हो सकते हैं। इस तरह से न सिर्फ वे अपने आसपास के लोगों की मदद करेंगे बल्कि कोरोना के खिलाफ इस बड़ी लड़ाई में हमारी भी मदद करेंगे, जो हमारे लिए थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता है।
चौथा, वो एक देखभालकर्ता की भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल वे अपने परिवार की मदद कर रहे हैं। इसलिए देखभालकर्ता के रूप में वे अपने परिवार के बीमार सदस्यों को सांस से संबंधित व्यायाम करने में मदद कर सकते हैं, किसी भी खतरे के संकेत पर नज़र रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में मदद कर सकते हैं। …यंग वॉरियर्स
पांचवीं और सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कोविड-उपयुक्त व्यवहार को बढ़ाना देना, मॉस्क पहनना, हाथों को साफ करना और उचित दूरी बनाए रखने जैसे युवाओं के नेतृत्व वाली कार्रवाई को बढ़ावा देने की है। ये वो तरीके हैं जिनसे युवा बदलाव ला सकते हैं।

अब बात आती है कि युवा कैसे हमारे अभियान से जुड़ें तो इस मामले में भी हमने अनुभवों से ही सीखा है। जब हमने यंग वॉरियर्स मूवमेंट की शुरूआत की थी, तो हमें लगा कि हमने सारी व्यवस्था कर ली हैं और फिर कुछ दिनों बाद हमारा प्लेटफॉर्म ढहने लगा क्योंकि बहुत सारे युवा इससे जुड़ना चाहते थे। पंजीकरण से संबंधित जटिलताएं थीं,प्रश्न थे, और समाधान हमें मिलजुल कर ही तलाशना था। वो रास्ता भी निकला। आज सुबह भी, मुझे एक युवा का ईमेल मिला कि मैं पंजीकरण नहीं कर पा रहा हूं। मैं क्या करूं।
हमने इस पूरी प्रक्रिया को न सिर्फ सरल बनाया बल्कि व्यापक मंच भी दिया है। अभियान के लिए पंजीकरण करने के कई तरीके हैं। वे व्हाट्सएप पर YWA टाइप करके 9650414141 पर भेज सकते हैं, जिसके बाद उन्हें एक प्रक्रिया पूरी करनी होगी और उनका पंजीकरण हो जाएगा। यह पंजीकरण टेलीग्राम ऐप के माध्मय से भी किया जा सकता है, जहां उन्हें ‘यूरिपोर्ट इंडिया’ सर्च करना होगी, और फिर ‘स्टार्ट’ पर क्लिक करना होगा और पंजीकरण प्रक्रिया का पालन करना होगा। ………यंग वॉरियर्स
कोई भी सीधे ‘यूरिपोर्ट इंडिया’ फेसबुक पेज पर जाकर ‘संदेश भेजें’ पर क्लिक कर करके, YWA टाइप करे और फिर भेज दे। जिन युवाओं के फोन में व्हाट्सएप या इंटरनेट नहीं हो वो, एक अन्य विकल्प 080-66019225 पर मिस्ड कॉल कर सकते हैं जिसके बाद उन्हें पंजीकरण हेतु एक इंटरैक्टिव वॉयस प्रतिक्रिया पर निर्देशित किया जाएगा। वे किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट पर ‘i am a #youngwarrior’ लिखकर सोशल मीडिया पोस्ट कर सकते हैं और अपने पांच दोस्तों को टैग कर सकते हैं। इससे भी वो यंग वॉरियर्स के रूप में पंजीकृत हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए वे yuwaah.org/youngwarrior पर जा सकते हैं।
भारत में वैविध्यता बहुत है। एक ही समय में कई स्तर पर काम करने की जरूरत होती है। इंटरनेट की पहुंच युवाओं तक तो हैं, उनके पास स्मार्ट फोन भी है लेकिन अभी भी बहुत सारे युवाओं के पास स्मार्ट फोन या फोन नहीं है। इस सुविधा से वंचित युवा भी यंग वॉरियर्स मूवमेंट से आसानी से जुड़ सकें इसके लिए हम व्यापक स्तर पर काम कर रहे हैं और अन्य माध्यम को भी सक्रिय किया जा रहा है। आगे चलकर हम पंजीकरण के तरीके के रूप में सामुदायिक रेडियो को भी शामिल करेंगे। समुदायों में उनकी स्थानीय भाषाओं तथा बोलियों में जागरूकता फैलाने हेतु हम एक अखिल भारतीय सामुदायिक रेडियो अभियान चला रहे हैं, और 250 से अधिक सामुदायिक रेडियो के साथ काम कर रहे हैं।
वर्तमान पड़ाव पर हम यूरिपोर्ट (ग्रामीण भारत में यूनिसेफ द्वारा शुरू किया गया एक एसएमएस टूल) और इंटरैक्टिव वॉयस रिस्पांस सिस्टम के ज़रिए 100,000+ युवाओं के साथ जुड़ रहे हैं। हमारे सामुदायिक रेडियो नेटवर्क के ज़रिए हम लाखों युवाओं तक पहुँच चुके हैं, और अपने मास मीडिया व सोशल मीडिया के माध्यम से, हम पूरे भारत में कुल 150 मिलियन लोगों तक पहुंच चुके हैं।
इस लिहाज से देखें तो हम युवाओं से जुड़ने हेतु अपने सभी चैनलों का उपयोग कर रहे हैं, चाहे वह डिजिटल हो या कोई अन्य।
इसके अलावा भी हम युवाओं को इस अभियान से जुड़ने हेतु हम पूरे भारत में एनएसएफ और एनवाईकेएस नेटवर्क का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इसमें सबसे अच्छी बात सीबीएसई का समर्थन है, जिसके माध्यम से हम पूरे भारत में 24,000 से अधिक स्कूलों तक पहुंचेंगे।
आंदोलन के ज़रिए नेतृत्व कर रहे युवाओं के कार्यों का जश्न मनाने हेतु इन सभी पांच कार्यों को पूरा करने वाले यंग वॉरियर्स को भागीदारी का प्रमाण पत्र दिया जायेगा और प्रत्येक कार्य को पूरा करने पर उन्हें रिवार्ड प्वाइंट प्राप्त होंगे। … यंग वॉरियर्स
इस कार्य में हमें अन्य भागीदारों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। 1,350 से अधिक भागीदारों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन देने का वादा किया है और यह संख्या हर दिन बढ़ ही रही है। हमारे भागीदारों में यूएनडीपी, यूएनएचसीआर, यूनेस्को जैसी संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां, और कई बड़े व छोटे गैर सरकारी संगठन शामिल हैं। इसके अलावा, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई, अटल इनोवेशन फाउंडेशन हमारे सरकारी सहयोगी हैं, जो आंदोलन को सहयोग कर रहे हैं।
सिविल सोसाइटी से, हमारे साझोदारों में ब्रेकथ्रू, डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन, यूथ फॉर जॉब्स और कई अन्य संगठन शामिल है। हमारे साझोदारों में निजी क्षेत्र की एजेंसियों की संख्या हमारी कल्पना से बहुत अधिक पहुंच चुकी हैं।
इसलिए हम दृढ़ता से कह सकते हैं और इस बात को लेकर आश्वस्त भी हैं कि आंदोलन की पहुंच अच्छी हो सकती है। लेकिन, अगर हम अगले तीन महीनों में देश भर के कम से कम 5 मिलियन युवाओं को जोड़ने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं तो हर एक भागीदार का योगदान हमारे लिए महत्वपूर्ण होगा।
यदि हम आगामी 90 दिनों को सामने रख कर बात करें, तो हमारा लक्ष्य देश भर के 5 मिलियन युवाओं/योद्धाओं तक पहुंचना है और हम ऐसी उम्मीद करते हैं कि उनमें से हर एक अन्य 10 युवाओं से बातचीत करेगा और इससे हमें 50 मिलियन लोगों के साथ जुड़ने या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश का आधार तय होगा। …यंग वॉरियर्स
90 दिनों के बाद, हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि युवा क्या कहना चाहते हैं, उनका अनुभव कैसा रहा। इसके बाद हमें उम्मीद है कि हमारे पास 5 मिलियन युवाओं का एक कोर ग्रुप तैयार हो जायेगा। वे न केवल भारत में आए कोविड संकट के दौरान बल्कि भविष्य में भी आंदोलन का हिस्सा होंगे। युवाओं को लेकर मेरे काम करने का अनुभव यह है कि जब वे जन कार्यों में लगे होते हैं, तो उनमें सेवाभाव की मानसिकता होती है, जिसमें गरीबी रह रहे बच्चों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों से अवगत होना और अपने समुदायों की आवाज को आगे लाना भी शामिल है। इसलिए मुझे लगता है कि इसी तरीके से वे उस बदलाव में मदद कर सकते हैं जिसके लिए हम आने वाले कुछ सालों में भारत के 450 मिलियन युवाओं को लेकर आशान्वित हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि वे राष्ट्र निर्माण में कितना योगदान दे सकते हैं।
हमारी युवाओं से अपील होगी कि और मैं अपील करती हूं कि कोविड संबंधित सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देने, टीकाकरण को बढ़ावा देने, मिथकों व भ्रांतियों को दूर करने, नेतृत्व करने, और खुद की रक्षा करने तथा अपने परिवारों का समर्थन करने में यंग वॉरियर्स की अहम भूमिका को लेकर आशान्वित हूं। युवाओं की चाइल्ड लाइन (महिला एवं बाल मंत्रालय की) तक पहुंच है और जब उन्हें लगे कि उन्हें मदद की जरूरत है तो उन्हें मदद लेनी चाहिए। आपको बस 1098 डायल करने की जरुरत है। ऐसा करने के लिए साहस की जरुरत होती है और मुझे यकीन है कि यंग वॉरियर्स अपने सभी साथियों को ऐसा करने हेतु साहस जुटाने में मदद करेंगे। …यंग वॉरियर्स
भारत के युवा शिक्षा, स्वास्थ्य, लिंग, सामाजिक न्याय और कई अन्य क्षेत्रों में सभी युवाओं के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षा करने तथा उन्हें आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहे हैं। भविष्योन्मुख बदलाव की इबारत लिखने में युवा हमेंशा से आगे रहे हैं यह अभियान युवाओं के भविष्य को बदलने का एक बहुत बड़ा अवसर प्रदान करता है। वे वर्तमान और भविष्य के न सिर्फ परिवर्तनकर्ता हैं,बल्कि प्रेरक की भूमिका में भी हैं।
ऐसे में युवाह का मुख्य उद्देश्य युवाओं से जुड़ना और उनकी जरूरतों, विचारों एवं आकांक्षाओं को सुनना व समझना है। वे भविष्य के साथ-साथ वर्तमान के भी नवप्रवर्तक, सृजनकर्ता, निर्माता और नेता हैं। ….यंग वॉरियर्स
