सिरूमलाई केले की यह वैरायटी स्वाद और सुगंध के लिए है मशहूर, कई दिनों तक कर सकते हैं उपयोग

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पूजा श्याम देव

 

Sirumalai Banana:  तमिलनाडु भारत के डिंडीगुल जिले में सिरुमलाई एक केला है। जो पहाड़ियों में उगाया जाता है। यह अपने मीठे स्वाद और सुगंध के लिए जाना जाता है। इसे अक्सर “पहाड़ी केला” भी कहा जाता है। आप ने सिरुमलाई केले का नाम सुना होगा। इन केलो की ख़ासियत यह बहुत मशहूर किस्म है। जो अपने यूनीक टेस्ट और खुशबू के लिए जानी जाती है। बाजारों में लोग इसे ढूंढ-ढूंढ कर खरीदते हैं। इसकी खासियतों की बात करें तो इस केले का पका फल देखने में भी बहुत आकर्षक लगता है। इसका पीला रंग खरीदारों को अपनी ओर खींच लेता है।

 

 

सिरूमलाई केले मध्यम आकार के केले होते हैं। जिनकी त्वचा पतली और पीली होती है। इनका मांस सफेद, मुलायम और रसदार होता है। ये केले अपने मीठे स्वाद और सुगंध के लिए जाने जाते हैं। सिरुमलाई केले का छिलका थोड़ा मोटा होता है। जो इसे हार्ड बनाता है। लेकिन इसकी खेती करने वाले किसानों और ग्राहकों को फायदे होते हैं। छिलका मोटा होने से किसान को इसके रखरखाव की टेंशन कम होती है। ढुलाई में इसके डैमेज होने की संभावना कम रहती है। ग्राहक को फायदा होता है कि खरीदने के बाद उसे अधिक दिनों तक रखा जा सकता है। इसकी शेल्फ लाइफ 10-15 दिनों तक बताया जा रहा है।

 

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सिरुमलाई केले की खासियत
सिरुमलाई केले की एक और बड़ी विशेषता है। पकने के बाद इस केले का गूदा थोड़ा हार्ड होता है। ये केले विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं। इन्हें ताजा
ही खाया जा सकता है। इनका उपयोग कई प्रकार के व्यंजन बनाने के लिए किया जा सकता है। इनका उपयोग केक, मफिन और अन्य बेक्ड सामान बनाने के लिए भी किया जा सकता है। सिरूमलाई केले एक स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है। जो भारत में व्यापक रूप से उपलब्ध है। यदि आप इसे आज़माने का अवसर पाते हैं। तो इसे ज़रूर करें। क्योंकि उसमें नमी या पानी की मात्रा कम होती है। नमी कम होने से इसके खराब होने या सड़ने के चांज की जाती है। इस केले में चीनी और पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है। इसलिए यह केला मीठा होने के साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।

 

 

इतनी खासियतों के बावजूद केले की यह किस्म कुछ वर्षों से संकट में है। इसकी खेती करने वाले किसान परेशान हैं। क्योंकि इस पर कीट, पतंगे और भुनगे का प्रकोप अधिक हो रहा है। बेमौसम बारिश से भी इस केले को गंभीर नुकसान हो रहा है। खेती की बात करें तो तमिलनाडु के डिंडीगुल में इसे बहुतायत में उगाया जाता है। मगर यहां के किसान सिरुमलाई केले की खेती से पीछे हट रहे हैं क्योंकि उन्हें कीट और बेमौसमी बारिश जैसे संकटों से गुजरना पड़ रहा है।

 

सिरुमलाई की खेती से किसान परेशान
सिरुमलाई केले की खासियतों और उसकी खेती के बारे में डिंडीगुल के किसान ने कहा मैंने 40 एकड़ में केले की खेती की है। इसकी फसल पानी सोखते हैं और पोषण से भरपूर होते हैं। लेकिन लंबे समय से इस पर बीमारियों का प्रकोप हो रहा है। विल्ट बीमारी और चींटियों का हमला बढ़ गया है। इससे किसानो काफी नुकसान का समाना करना पड़ रहा है। किसान विघ्नेश का कहना है। पहले इस केले की एक शाखा में 11-12 गुच्छे होते थे। अब एक शाखा में सात से आठ गुच्छे होते हैं। हालंकि जंगली सूअरों के हमले में भी तेजी आई है। इनपुट लागत 1.25 से 1.75 लाख रुपये प्रति एकड़ के बीच चल रही है। इसकी पिछले कई वर्ष में कई लोगों ने केले की खेती छोड़ दी है।

 

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किसानों का दुख महंगे इनपुट
एक अन्य किसान के सेतुराज ने कहा हालांकि हमारे पौधों को कम पानी की जरूरत होती है। लेकिन हमें विल्ट और ‘बंची टॉप’ जैसी बीमारियों सहित कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जो एक विनाशकारी वायरल की तरह फैल ​जाती है। कई किसानों को कई लाख रुपये का भारी नुकसान हुआ और उन्होंने केले की खेती से उम्मीद छोड़ दी। जब कोई किसान केले की खेती पर 1 लाख रुपये से अधिक खर्च करता है। तो लगभग 20,हजार से 25,हजार रुपये कीटनाशकों, हर्बीसाइड और कीटनाशकों पर खर्च हो जाता हैं।

सेतुराज ने यह भी बताया कुछ अच्छे कीटनाशकों की कीमत लगभग 450 रुपये प्रति लीटर है। ​इस​की अधिक इनपुट लागत कई किसानों को अपनी जमीन बड़े किसानों को बेचने के लिए मजबूर कर रही है। इसके अलावा, बेमौसम बारिश भी नुकसान का कारण बनती है। अगर केले को फूल के मौसम में पानी की जरूरत पड़ती है। और फल लगने के बाद बारिश हुई तो पानी फल और पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है।

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