यूं बदला बहराइच की महिला किसान मनीषा का जीवन, शकरकंद की खेती से हुई मालामाल

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पूजा श्याम

 

बहराइच:  जिले में रहने वाली एक महिला किसान पिछले कई सालों से खेती कर रही है। ​इसी खेती द्वारा अपने घर का खर्चा चलती है। इसके अलावा अपनी नंद की बेटी को पालकर उसकी शादी की और अपनी बेटी जोकि गंभीर बीमारी से ग्रस्त थी उसका इलाज भी करवाया। गांव कि गरीब महिला को भी जगरूक किया खेती के प्रति है। मनीषा मुख्य रूप से शकरकंद की खेती करती हैं और गेहूं, मूंगफली जैसी फसलों की खेती करती हैं। गंजी की खेती में मनीषा को अच्छा मुनाफा होता है।

महिला किसान मनीषा ने बताया कि गंजी की खेती करने में लागत ना के बराबर होती है। वहीं अगर मुनाफे की बात की जाए तो मुनाफा बहुत अच्छा ​होता है। क्योंकि सीजन के टाइम पर शकरकंद को खाने में खूब पसंद करते है। माना जाता है कि शकरकंद को पूजा पाठ में भी इसका प्रयोग किया जाता है। बहुत सी जगह पर गंजी को शकरकंद भी कहा जाता है। शकरकंद एक प्राकृतिक रूप से मीठी जड़ वाली सब्जी है।

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खेती की मुख्य बातें
गंजी की खेती किसी भी मौसम में की जा सकती है। लेकिन जून और जुलाई का महीना इसकी खेती के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। शकरकंद कि हमेशा मांग बाजारो में रहती है। किसान इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। शकरकंद की खेती ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर की जाती है।

 

यह फसल मुख्य रूप से अपने मीठे स्वाद के लिए उगाई जाती है। इसकी खेती करने का सबसे अच्छा समय साल में दो बार माना जाता है। भारत में लगभग 2 लाख हैक्टेयर ज़मीन पर शकरकंदी उगाई जाती है। शकरकंद की उन्नत प्रभेद 110 से 120 दिन में तैयार हो जाते हैं। हलांकि सर्दियों के मौसम में शकरकंद खेती ज्यादा होती है।
और काफी ठंड में बिक्री भी होती है।

 

 

 

 

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