सालोंभर रहती है इन फूलों की डिमांड, इसकी खेती से लाखों की कमाई करते है किसान

0
122
पूजा

Flower Cultivation :  भारतीय सस्कृंति में फूलों का खूब इस्तेमाल किया जाता है। जैसे पूजा-अर्चना, त्योहार, सजावट व अन्य कार्यक्रमों करते है। इसलिए फूलों की खेती किसानों के अच्छा साधन होता है। इन फूलों ​कि फसलों को नगदी फसल भी कहा है। यानी, खेती करने के बाद रोज पैसे मिलते हैं। हालांकि सबसे ज्यादा गुलाब, गेंदा, गुलदावरी, नौरंगा की डिमांड मार्केट में सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे में किसान फूलों की खेती ज्यादा करते है। क्योंकि किसान भाई फूलों की खेती से हर रोज पैसा कमा सकता है। कम समय में अधिक मुनाफे के लिए फूलों की खेती सबसे अच्छा ज़रिया है। किसान फूलों की खेती करते समय इन बातों का ध्यान रखें।

फूलों की खेती के लिए सबसे जरूरी बात है। कि आप सही जलवायु का चयन करें। कुछ फूल ठंडी जलवायु में अच्छे से उगा करते हैं। जबकि कुछ गर्म और नम जलवायु में फूल ज्यादा खराब हो जाते है। इसलिए अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार फूलों को चुनने और उसकी खेती ​करें।

मिट्टी का परीक्षण करवाना आवश्यक है। ताकि आपको पता चल सके कि मिट्टी में कौन से पोषक तत्त्व कम हैं। और किस प्रकार की खाद की आवश्यकता है। मिट्टी का पीएच स्तर भी फूलों की वृद्धि के लिए महत्त्वपूर्ण होता है। फूलों की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली, जैविक तत्त्वों से भरपूर और उचित पीएच वाली मिट्टी का चयन करें। किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर एज़ोटोबैक्टर, एज़ोस्पिरिलम आदि जैव उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। जैव उर्वरक के प्रयोग से लागत भी कम आती है।

ये भी पढ़े…

मखाने की खेती से आत्मनिर्भर होती जिला बलरामपुर की महिलाएं

 

फूलों की खेती विभिन्न प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। लेकिन 7.0 से 7.6 के बीच पीएच मान वाली अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उत्पादन के लिए अच्छी मानी जाती है। भूमि तैयार करते समय गहरी जुताई करें तथा जुताई के समय जमीन में 15-20 टन सड़ा हुआ गोबर या कम्पोस्ट मिलाकर खेत को समतल बना लें। छह बोरी यूरिया, 10 बोरी सिंगल सुपर फास्फेट और तीन बोरी पोटाश प्रति हेक्टेयर खेत में मिला दें। यूरिया को तीन बराबर भागों में बाँट लें तथा सिंगल सुपर फास्फेट एवं पोटाश की पूरी मात्रा रोपण के समय दें। यूरिया की दूसरी और तीसरी खुराक रोपाई के 30 और 45 दिन बाद पौधों के चारों ओर कतारों के बीच में दें। कृपया ध्यान दें कि इसकी खेती के लिए सूरज की रोशनी बहुत जरूरी है।

 

हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले स्वस्थ पौधे खरीदें और पौधा रोपण का सही समय जानना बहुत जरूरी है। रोपण का सही समय चुनने से फूलों की वृद्धि अच्छी होती है। पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखें। ताकि उन्हें पर्याप्त धूप और हवा मिलती रहे है। अधिक घने रोपण से रोग और कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है।

फूलों को नियमित रूप से सिंचाई करें। लेकिन ध्यान रखें कि ज्यादा सिंचाई न करें। क्योंकि ऐसा करने से जड़ें गल सकती हैं। ड्रिप सिंचाई फूलों के पौधों के लिए सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। पौधों को सही समय पर सही मात्रा में खाद दें और रासायनिक खाद का कम से कम उपयोग करें।

पौधों का नियमित रूप से निरीक्षण करते रहें। ताकि किसी भी कीट या रोग का पता चल सके। इसे हम कीटों और रोगों को नियंत्रित करने के लिए जैविक कीटनाशकों का उपयोग कर सकते है। यदि कोई पौधा रोगग्रस्त हो जाता है। तो उसे तुरंत हटा दें ताकि रोग अन्य पौधों में न फैले। खेत से खरपतवारों को नियमित रूप से हटाते रहें। खरपतवार पौधों की वृद्धि को बाधित करते हैं। मिट्टी की नियमित रूप से गुड़ाई करें, ताकि मिट्टी में हवा का संचार बना रहे। इससे जड़ें अच्छी तरह से विकसित होती हैं।

फूलों को सही समय पर काटें, ताकि वे ज्यादा समय तक ताजा रहें। काटने के बाद उन्हें ठंडी-अंधेरी जगह पर रखें। फूलों को जल्दी खराब होने से बचाने के लिए सही भंडारण करना जरूरी है। तुड़ाई के बाद यदि संभव हो तो फूलो को कागज से ढक दे जिसे उसकी नमी कम ना हो, एक एकड़ खेत में हर हफ्ते 3 क्विंटल तक फूल की पैदावार हो जाती है। खुले बाजार में इसके फूल की कीमत 70 -80 रुपए प्रति किग्रा तक मिल जाती है, यानी हर हफ्ते 20-25 हजार रुपए तक की आमदनी कमा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here