छ लाख गांव हमार ह,अपना गांव लागी बात करीं तो लोग का कही..जयप्रकाश नारायण

हरिवंश फिर धीरे-धीरे राजनीति ने आहट दी. तब कांग्रेस का जोर था, सोशलिस्ट पार्टी भी थी, कहीं-कहीं वामपंथियों की आवाज भी सुनाई देती थी. चुनाव तब एक साथ होते थे. कुछ वर्षों बाद बार-बार चुनाव की स्थिति बनने लगी. फिर विकास योजनाओं की चर्चा, ठेकेदारी की चर्चा, रिश्वत की बातें हवा में तैरने लगीं. गांव …

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