prahlad singh patel

विद्यापति…घुरी आउ बिस्फी गाम

प्रसून लतांत, वरिष्ठ पत्रकार बिहार में अंतरराष्ट्रीय ख्याति का एक गांव है बिस्फी। इस गांव को लोग महाकवि विद्यापति की जन्मस्थली के रूप में जानते हैं। यह गाव विद्यापति को उनके प्रतिभा के कारण उनके आश्रय दाता राजा ने पुरस्कार के रूप में राजा ने दिया था। पैसे और अन्य कारणों से लोग संपत्ति हासिल …

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अपने प्रयास से आगे बढ़ा दानियाल परसौना

प्रवेश कुमार मिश्र महात्मा गांधी की कर्मभूमि चम्पारण के साठी थाना में दानियाल परसौना गांव आज विकास की गति के साथ कदमताल करने को तैयार है। कभी शहर व बाजार से महरूम रहा यह गांव आज बड़े-बड़े शहरों से आने वाले धन पर इठला रहा है। लोग देश-विदेश तक अपनी पहुंच बना चुके हैं। कभी …

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‘कान्ना’ द्वारा बसाये गये गांव कानौंदा की रही है ऐतिहासिक पहचान

कपूर सिंह छिकारा हरियाणा में वर्षा की पहली बूंद को हरि कहा जाता है। इस ‘हरि’ से ही हरियाणा प्रान्त का नामकरण हुआ है। विभिन्न प्रकार की वर्षा को अलग-अलग नाम से पुकारा जाता हैं जैसे-मीह, भड़, दोगड़ा, क्यारी भर, दैशारी, मेधपुष्प, बरखा आदि। एक-एक बूंद का संचयन किया जाता था। प्राचीन वर्षा जल संचयन …

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…और बेनीपुरी स्मारक नहीं बचा सके हम

महन्त राजीव रंजन दास बागमती तटबंध के बाहर सरकार द्वारा बसाए गए नए बेनीपुर की धरती पर रामबृक्ष बेनीपुरी स्मारक भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचा तो दिल में एक अजीब-सी टीस उठी। कार्यक्रम बेनीपुरी जयंती के अवसर पर 20 दिसंबर 2018 को आयोजित हुआ था। इस अवसर पर बेनीपुरी जी की पुस्तक ‘जयप्रकाश की …

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हिंदुस्तान को आबाद रखना है तो उसके गांवों को बचाना होगा

उमेश चतुर्वेदी हमारी भोजपुरी संस्कृति में शादी-विवाह और जनेऊ के मौके पर माटी-कोड़ की रस्म होती है। इसमें घर की महिलाएं घर के बाहर मिट्टी खोदने जाती हैं। इस दौरान घर के ठीक बाहर निकलते ही महिलाएं चमार लोगों के पारंपरिक बाजा की पूजा करती हैं। यह जानकारी प्रगतिशीलता की चाशनी में डूबे समाज को …

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संपन्नता आई,पर जीवन का रंग चला गया

शिवमंगल सिंह वरिष्ठ पत्रकार गांव में बजुर्गों का डेरा, गलियों में सन्नाटे का पहरा, बुंदेलखण्ड के दूसरे गांवों जैसी हालत है अपने गांव का, हुलिया भी कुछ वैसा ही है। सुबह का उल्लास मायूसी में बदल गया है, गोधूलि की चहचहाहट को खामोशी ने अपने आगोश में ले लिया है। दोपहरी में भी सिर्फ सांय-सांय …

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गांव की सामुहिकता विलुप्त हो रही है

डाॅ अभय सागर मिंज परिवर्तन एक सतत प्रक्रिया है और यह हमेशा से इस जीवन का सत्य और तथ्य है। जब सारे विश्व में पश्चिमी जीवन का प्रभाव दिखता है तो आदिवासी समाज भी इस से अछूता नहीं है। गांव में हुए परिवर्तन पर कुछ विचार साझा करने में सालों पहले से अंतर्मन में जो …

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कहां गइल मोर गांव रे!

गांव छूटा तो लगभग सब कुछ गुम हो गया। ऐसा अब लगता है। यह अलग बात है कि गांव भी किसी लोभ में छोड़ा था और अब गांव की याद भी स्मृतियों में बसे गांव के लोभ के कारण है। बलम कलकत्ता निकल गए जैसे गीत में गांव छोड़ने की पीड़ा का साक्षात दर्शन होता …

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सबको अपना मानता है गांव

डॉ गोपाल सिंह भारतीय ग्रामीण परिवेश को समझने के लिए हमें थोड़ा-सा पीछे जाना पड़ेगा। और इसके लिए मुंशी प्रेमचंद की रचना से थोड़ी जानकारी लेनी होगी। उनकी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए डॉ सुप्रभात सिंह ने अपने उपन्यास-अमर अवध बेतरणी में लिखा कि आज का गांव ग्रामीण परंपराओं को संजोए हुए है। गांव में …

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परंपराओं से जुड़कर वापस आ सकती है गांव की खुशहाली

वेंकटेश नारायण सिंह मेरा गांव हेमतपुर आरा शहर से 13 किमी की दूरी पर है। यह 1961 दिसंबर से पक्की सड़क से जुड़ा हुआ था लेकिन शहरीकरण से बचते हुए भारतीय संस्कृति को संजोए हुए था। गाँव की गलियां कच्ची थी तथा गाँव में शायद ही कोई चप्पल पहनता था। बरसात में पैरों में कीचड़ …

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