
Patna: बिहार में 2 मार्च तक अधिकतम तापमान 27.9 डिग्री सेल्सियस से 33.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विभाग ने बताया कि न्यूनतम तापमान 15 से 9 डिग्री सेल्सियस से 18 से 2 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। सुबह में आर्द्रता 54 से 64 प्रतिशत के बीच और दोपहर में आर्द्रता 29 से 35 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है। और सतही हवा की गति 1.6 किमी प्रति घंटे से 5.6 किमी प्रति घंटे रहने की उम्मीद है। हवा ज्यादातर उत्तर से उत्तरपश्चिमी दिशा में चलने के आसार है। इसके अलावा इस बार मौसम शुष्क रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी। ऐसे मौसम में बदलाव की वजह से किसानों को फसलों पर कीटों और बीमारियों से जूझना पड़ता है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बताया की बदलते मौसम में पशुओं का विशेष ध्यान रखें। पशुओं और उनके पशुशाला को साफ सुथरा रखें। अगर आप पशु को बाहर घूमने के लिए ले जाते है। तो शाम को सूर्यास्त से पहले वापस पशुशाला के अंदर बांध दें। किसान खुद भी मौसम परिवर्तन के दौरान प्रतिदिन 3-4 लीटर पानी पिएं। गर्म पानी में दालचीनी और लौंग डालकर पिएं आप इसे चाय में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है। इसी के साथ फसलों के लिए भी सलाह दी गई है।
प्याज की फसल पर करें निगरानी
प्याज की फसल में थ्रिप्स कीट की निगरानी करें। यह प्याज को नुकसान पहुंचाने वाला मुख्य कीट है। इस समय तापमान बढ़ने पर फसल में इस कीट की सक्रियता बढ़ जाती है। यह पत्तियों की सतह पर चिपक कर रस चूसता है। जिससे पत्तियों का ऊपरी किनारा टेढ़ा हो जाता है। पत्तियों पर धब्बे पड़ जाते है। जो बाद में हल्के सफेद रंग के हो जाते है। जिससे पैदावार प्रभावित होती है। यदि फसल में इनकी संख्या बढ़ जाए तो प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 1.0 मिली प्रति लीटर पानी या इमिडाक्लोप्रिड 1.0 मिली प्रति 4 लीटर पानी की दर से आसमान साफ होने पर छिड़काव करें।
गेहूं और मक्का की फसल पर करें छिड़काव
गेहूं की बाली निकलने की अवस्था पर नाइट्रोजन का प्रयोग कर सकते है। इसके लिए 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। खेत में उचित नमी के लिए सिंचाई करें। ताकि तापमान बढ़ने पर फसल की अच्छी वृद्धि के लिए खेत में नमी का होना बहुत जरूरी है।
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मक्के के खेत में खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई करें। फॉल आर्मीवर्म नियंत्रण के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 0.5 मिली/लीटर की दर से छिड़काव करें। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर मल्टीप्लेक्स 3 ग्राम/लीटर पानी की दर से छिड़काव करना लाभकारी रहेगा।
सरसों
सरसों के खेतों में यदि समय रहते इन रोगों एवं कीटों का नियंत्रण कर लिया जाये तो सरसों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी की जा सकती है। चेंपा या माहू, आरामक्खी, चितकबरा कीट, लीफ माइनर, बिहार हेयरी केटरपिलर आदि सरसों के मुख्य नाशी कीट हैं। काला ध्ब्बा, सफेद रतुआ, मृदुरोमिल आसिता, चूर्णल आसिता एवं तना गलन आदि सरसों के मुख्य रोग हैं। इन सब के प्रकोप होने पर इमिडाक्लोरप्रिड कीटनाशक 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। देरी से बोई गई फसलों में नाइट्रोजन (यूरिया) 20 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।




