
कृषि विभाग और गन्ना उद्योग विभाग दोनों मिलकर गन्ने की खेती से किसानों को फायदा हो इसके लिए लगातार प्रयास कर रहे है। बोआई की नई प्रौद्योगिकी किसानों को बताया जा रहा है। गोपालगंज के किसान पूर्व से एक ऐसी विधि के आनुसार खेती करते हैं। जिससे इन्हें काफी फायदा होता है। हालांकि इसमें एक बार गन्ना की बुवाई करने पर 2 सालों तक उपज रहती है। एक बार बुवाई करने के बाद अगले वर्ष उस गन्ने को काट दिया जाता है। लेकिन जड़ को खेतों से नहीं उखाड़ा जाता। उन्हीं पुरानी जड़ों से खेतों में फिर से गन्ने के नए पौधे निकल आते हैं। इसे पैदावार अचछी होती है।
एक जड़ से निकलते हैं चार-चार पौधे
सदर प्रखंड के हरपुर गांव में पारंपरिक खेती के अनुसार खूंटी विधि से खेती कर रहे सुदामा भगत बताते हैं कि खूंटी विधि को अपनाने पर नया बीज भी खेतों में नहीं डालना पड़ता जिससे खर्च की बचत होती है। साथ ही खेतों की जुताई, लेवलिंग आदि पर भी कोई खास खर्च नहीं होता है। पहले सीजन में जहां एक गन्ना निकला रहता है। वहीं से दूबारा गन्ने के एक खूंटी में चार-पांच पौधे निकल आते हैं। इससे किसानों को काफी फायदा होता है। जहां बीज का खर्च पूरी तरीके समाप्त हो जाता है। वहीं पौधे की संख्या चार गुना हो जाती है।
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खूंटी वाले गन्ने में ज्यादा रस होता है
किसानों को पता होना चाहिए कि खूंटी वाले गन्ने में रस भी अधिक होता है। मिल में तौल कर देने पर इस उत्तम क्वालिटी के गन्ने में गिनती भी होती है। अधिक वजन भी होता है। जिससे बेहतर मुनाफा भी होता है।

