
अलीगढ़: मार्च महीने की गर्मी का एहसास फरवरी में ही शुरू हो गया है। जिससे गेहूं को भारी नुकसान हो रहा है। फरवरी माह में पड़ने वाली गुलाबी ठंड की बसंत ऋतु में ही एहसास हो रहा है। पिछले चार वर्ष में सबसे ज्यादा फरवरी का महीना गरम रहा है। मार्च का महीना शुरू होने से पहले ही जैसे गर्मी का एहसास होने लगा है। लोगों के तो अभी से पसीने छूट रहे हैं। अब लोग बिना स्वेटर और जैकेट के सड़कों पर घूमते दिखाई दे रहे हैं। इस तरह मौसम के बदलाव से किसानों को काफी परेशानी हो रही है।
फरवरी में शुरू हो गई जमकर गर्मी
फरवरी का महीना गुलाबी सर्दी के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार बदलते मौसम ने सभी को चौंका दिया है। अलीगढ़ का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। जो सामान्य से 3 डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान भी 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। फरवरी महीने में गर्मी का यह हाल देखकर लोग सोच में पड़ गए हैं। इसके अलावा कई लोगों ने गर्म कपड़े पैक कर दिए हैं। और दिन में पंखे चलाने की नौबत आ गई है। इसी के साथ बाजारों में भी हल्के कपड़ों की मांग बढ़ने लगी है। सूरज की तपिश अब दोपहर में परेशान कर रही है।
फसलों के लिए चिंता का विषय
कृषि विशेषज्ञ डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि फरवरी में ऐसा मौसम पहले कभी नहीं देखा गया। यह जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकता है। अगर अभी ये हाल है तो मार्च और अप्रैल में क्या होगा। यह गेहूं और सरसों की फसलों के लिए चिंता का विषय है। जिस तरह का मौसम फरवरी माह में देखने को मिल रहा है। यह वास्तव में हैरत की बात है। अधिक गर्मी के करण गेहूं और सरसों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
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ज्यादा गर्मी से हो रहा है नुकसान
पूर्व में बोई गई गेहूं की फसल में भी कई जगह से दाना हल्का होने की सूचना मिली है। उनका कहना है कि इस समय मौसम गेहूं की खेती के लिए सुखद परिणाम नहीं है। ऐसे में गेहूं को बड़ा नुकसान हो सकता है। गेहूं की खेती करने वाले किसान वीरेंद्र कुमार का कहना है, कि मैंने 60 बीघा में गेहूं लगाया है। अगर इसी तरह गर्मी पड़ती रही तो उत्पादन में भारी गिरावट आएगी। गर्मी का गेहूं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता नजार आ रहा है। पांच प्रतिशत ही गेहूं की फसल में दूध बना है। इस समय गर्मी का प्रचंड रूप ऐसे ही रहा तो गेहूं की ग्रोथ नहीं हो सकती। जिससे किसानों को बड़ा नुकसान होगा।


