टमाटर महगाई के कारण लगातर सुर्ख़ियों में बना है। टमाटर की महगाई की वजह बेनौसम बारिश के कारण उत्पादन का प्रभावित होना तथा मंडियों तक पहुँच बाधित होना है। वर्तमान में टमाटर २०० से २५० रुपये प्रतिकिलो के भाव से खुदरा बाजारों में बिक रहा है। भारत में टमाटर की खेती बड़े स्तर पर होती है। किसान टमाटर की खेती करके लाभ कमाते हैं तो कभी-कभी उन्हें भारी बारिश की वजह से नुकसान भी उठाना पड़ता है।
अगर आप किसान हैं और आप भी टमाटर की खेती करके अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं और तो आप टमाटर की नामधारी-4266 किस्म की खेती करके अच्छा मुनाफा कम सकते हैं। टमाटर की यह एक उन्नत किस्म है, इसकी बहुत खूबियाँ हैं। टमाटर की अन्य किस्मो की तुलना में इसकी उत्पादकता ज्यादा है। यह प्रति हेक्टेयर लगभग 1200 से 1400 क्विंटल पैदावार देता है जो अन्य किस्मों की तुलना में कहीं ज्यादा है। इस किस्म की कई अन्य विशेषताएं है जिसके बारे में हम विस्तार से आपको बताएंगे।
उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गयी टमाटर की यह किस्म कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली किस्म है। टमाटर की अन्य किस्में प्रति हेक्टेयर 800 से 1200 क्विंटल टमाटर की पैदावार देती हैं वहीं नामधारी-4266 किस्म से प्रति हेक्टेयर 1200 से 1400 क्विंटल तक की पैदावार मिलती है जो की अन्य किस्मों की तुलना में काफी ज्यादा है।
कब होती है नामधारी-4266 की खेती
सितंबर और अक्टूबर में इसकी खेती की जाती है और दिसंबर से फरवरी के बीच फसल तैयार हो जाती है। इस दौरान वर्षा भी कम होती है जिससे नर्सरी सुरक्षित रहती है। इसकी एक और बड़ी खासियत यह है कि इसकी नर्सरी जल्द तैयार हो जाती है और इसमें बीमारी तथा कीट नहीं लगते। फसल 45 से 60 दिन में तैयार हो जाती है। साधारण टमाटर की किस्में सिर्फ 50 से 80 ग्राम वजनी होती हैं। वहीं नामधारी 4266 किस्म के टमाटरों का वजन 100 से 150 ग्राम होता है। इस किस्म के एक ही पौधे पर 50 से 60 और हर गुच्छे पर 4 से 5 टमाटर के फल लगते हैं।
टमाटर की खेती कई तरह की मिट्टी में आसानी से की जा सकती है, इसके लिए रेतीली दोमट, चिकनी मिट्टी, लाल और काली मिट्टी उपयुक्त है ध्यान रखने वाली बात यह है कि जो भी मिट्टी आपके खेत में हो, उसमें पानी की उचित निकासी होनी चाहिए।
