दिल्ली सहित भारत के लगभग सभी महानगर तथा सुदूर में स्थित गावों में पेयजल संकट बढ़ता ही जा रहा है। पीने के पानी की उपलब्धता घटती जा रही है। पीने के पानी का संकट बहुत बड़ा है। पानी के बिना देश – दुनियां का कोई भविष्य नहीं है। शुद्ध जल की उपलब्धता न होने से आंत से संबंधित बीमारियों का खतरा सबसे अधिक होता है। यही कारण है प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख बच्चे काल के गाल में समा जाते हैं।
वास्तविकता यह है कि जल संकट की समस्याओं से निपटने के लिए सरकारें गंभीर नहीं दिखती। ऐसा भी नहीं है कि वह इस समस्या से अनभिज्ञ हैं। बल्कि वे जानते हैं कि आने वाले समय में पानी को लेकर युद्ध की स्थिति बनने वाली है और भविष्य में ऐसा भी संभव है कि अगला विश्वयुद्ध ही पानी को लेकर हो।
भारत में जल संकट बढ़ती आबादी और कृषि की जरूरतों की वजह से गंभीर होता जा रहा है। कृषि में भूमिगत जल का धड़ल्ले से दोहन किया जाता है। राजनीतिक लाभ के लिए सरकार ऐसे विषयों पर कोई कानून नहीं बनाती। अगर यदा-कदा कानून बने भी होंगे तो उनको लागू ही नहीं किया जाता। कुछ राज्य ऐसे हैं जहां धान की खेती के अनुकूल जलवायु है। धान के लिए पानी की जरूरत वर्षा से पूरी नहीं हो सकती, ऐसी जगहों पर धान की खेती कर किसान भूमिगत जल का दोहन करते हैं। प्रति किलो चावल उत्पादन की लागत पानी की कीमत से आंकने पर बहुत ही महंगा साबित हो रहा है।
हाल ही में किए गए सर्वे में देखा गया कि पंजाब तथा हरियाणा राज्य में भूमिगत जलस्तर बहुत तेजी से नीचे गिरा है, जिसका कारण विशेषज्ञों ने बताया कि राज्यों में कुल खपत का लगभग 30 प्रतिशत जल कृषि में प्रयोग लाया जा रहा है। प्रकृति और जलवायु के प्रतिकूल खेती करके भारी मात्रा में जल बर्बाद किया जा रहा है। किसान लाभ के लिए दूरगामी परिणामों को अनदेखा कर रहे हैं जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना ही पड़ेगा।
पूरी दुनिया पर मंडरा रहा है जल संकट का खतरा
संयुक्त राष्ट्र 23 वाटर कॉन्फ्रेंस में आयोजित की गई सम्मेलन में यूनेस्को द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लोगों को अभी भी सुरक्षित पीने के पानी की उपलब्धता नहीं है रिपोर्ट में बताया गया कि वैश्विक जनसंख्या का 26% सुरक्षित पानी से वंचित है जिसके पास अच्छी तरह से प्रबंधित स्वच्छता सुविधाएं नहीं हैं तो वहीं दो तिहाई लोग प्रत्येक वर्ष कम से कम 1 महीने के लिए जल की कमी का सामना करते हैं। दुनिया की इतनी बड़ी आबादी पीने के पानी से वंचित है यह एक चिंता का विषय है। जल संकट से निपटने के लिए सरकारों को कठिन निर्णय लेने की आवश्यकता है।

