वर्षा वर्मा
जयपुर; राजस्थान में रहने वाला एक किसान लंबे समय से जीरा, अरंडी और इसबगोल जैसी फसलों से जुड़ा हुआ था, जो उसके लिए कम लाभदायक थी. हालांकि, कई जिलों में बदलाव देखा गया है, क्योंकि कई किसान अनार की खेती को अपना रहे हैं.लेकिन बाड़मेर में, इस बदलाव के परिणामस्वरूप इस फल की खेती करने वाले किसानों की अच्छी खासी कमाई हुई है.
कहते हैं किसी चीज को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करे तो उसका फल जरूर मिलता है. इसी बात को एक बार फिर सही साबित कर दिखाया है बाड़मेर के किसान जेठाराम ने. आपको बता दें कि जेठाराम ने साल 2016 में अपने खेत में अनार की खेती शुरू की थी.दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और 15 लाख रुपये के लोन के साथ, उन्होंने अपना खेत तैयार किया. स्थिति यह है कि अब उसका अनार कलकत्ता, महाराष्ट्र, बांग्लादेश तक निर्यात किया जाता है.
दरअसल गुजरात और बाड़मेर के बुड़ीवाड़ा में अनार के पौधे देखकर जेठाराम ने अपने खेत में अनार लगाने का विचार किया. उन्होंने बताया कि आज वे 45 बीघा जमीन पर खेती कर रहे हैं और उनके एक अनार के पौधे से 25 किलो अनार निकलता है. उन्होंने ये भी बताया की भगवा सिंदूरी किस्म के ये अनार नासिक से मंगवाए थे. वे बताते हैं कि उन्होंने अपनी 45 बीघा जमीन पर 4 हजार पौधे लगाए हैं, जिससे उन्हें काफी मुनाफा हुआ है.
जेठाराम के मुताबिक अनार की खेती से दूसरे साल करीब 7 लाख, तीसरे साल 15 लाख, चौथे साल 25 लाख और पांचवें साल 35 लाख रुपए की आमदनी हुई. उनका कहना है कि आज भी किसान जीरा, अरंडी, इसबगोल जैसी फसलें अपना रहे हैं जो बहुत कम मुनाफे वाली फसलें हैं. उनका कहना है कि अनार की खेती से उन्हें 5 साल में 80 लाख से ज्यादा की आमदनी हुई है.जाहिर सी बात है की जेठाराम ने जो अनार की खेती करने का फैसला लिए था वो बिलकुल सही लिया थी और जेठाराम का यही कहना है की हर किसान वो खेती करे जिससे उसे मुनाफा मिले आज जेठाराम के अनार देश—विदेश मे बिका रहे है जिससे उसके परिवार का पालन पोषण अच्छे से हो रहा है।
