बीस लाख करोड़ की तीसरी किस्त, अन्नदाताओं के पक्ष में आंकड़ो की बाजीगरी

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मंगरूआ

नयी दिल्ली: कोरोना काल में लॉकडाउन से उपजी परिस्थितियों में राहत देने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की गई थी। आज आत्मनिर्भर भारत अभियान पैकेज की तीसरी किस्त को लेकर वित्त मंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि क्षेत्र, फिशरीज, पशुपालन, डेयरी के लिए पैकेज का ब्योरा दिया।
वित्त मंत्री ने कहा कि आज कृषि के ऊपर ज्यादा बात करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं के जरिए पिछले पांच से छह सालों से कदम उठाए जा रहे हैं। करोड़ों किसानों को इसके माध्यम से लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि आज भी भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। भारत सबसे ज्यादा दूध, जूट और दालों का उत्पादन करता है।
इस अवसर पर वित्तमंत्री ने कृषि और किसान कल्याण को लेकर जो घोषणाएं की वो ​ये हैं:—
1) कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर: वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले दो महीने में हमने किसानों के लिए कई कदम उठाए। पीएम किसान सम्मान के तहत पिछले दो महीने में किसानों के खाते में 18 हजार 700 करोड़ रुपए पहुंचाए गए। लॉकडाउन के दौरान 5600 लाख दूध कॉपरेटिव संस्थाओं ने खरीदा। दूध उत्पादकों के हाथों में 4100 करोड़ रुपए की रकम पहुंची। उन्होंने बताया कि कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 1 लाख करोड़ करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इससे कोल्ड चेन, फसल कटाई के बाद प्रबंधन की सुविधाएं मिलेंगी। किसान की आय भी बढ़ेगी।

2) फूड प्रोसेसिंग: वि​त्त मंत्री ने कहा कि माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज के लिए 10000 करोड़ के फंड की स्कीम है। यह क्लस्टर बेस्ड होगी। इससे 2 लाख खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को लाभ मिलेगा। लोगों को रोजगार मिलेंगे,आय के साधन बढ़ेंगे। इसमें स्थानीय कंपनियों को सपोर्ट किया जाएगा। जैसे बिहार का मखाना, यूपी के आम, जम्मू-कश्मीर के केसर जैसे खेती में कलस्टर बनाया जाएगा। इस योजना का लक्ष्य स्थानीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने का है।
ये पीएम के वोकल फॉर लोकल के आह्वान से जुड़ा है। इसमें कलस्टर आधारित एप्रोच अपनाया जाएगा। इसमें महिलाओं, एससी/ एसटी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
3) फिशरीज: मत्सय पालकों के लिए की गई घोषणा में कहा कि मत्स्य संपदा योजना की घोषणा बजट के दौरान घोषित की गई थी। इसे लागू कर रहे हैं। इससे 50 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। भारत का एक्सपोर्ट बढ़ेगा। मत्स्य पालन बढ़ाने के लिए मछुआरों को नावें और नावों के बीमा की सुविधा देंगे। समुद्री और अंतरदेशीय मत्स्य पालन के लिए 11000 करोड़ रुपए और 9000 करोड़ रुपए इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जारी किए जाएंगे।


4) पशुपालन: निर्मला सीतारमण ने कहा कि खुरपका-मुंहपका से पीड़ित जानवरों को वैक्सीन नहीं लग पा रहे। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। सभी भैंसों, भेड़ों और बकरियों का वैक्सिनेशन किया जाएगा। वैक्सिनेशन में 13 हजार 343 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे 53 करोड़ पशुधन को बीमारी से मुक्ति मिलेगी। जनवरी से अब तक 1.5 करोड़ गाय और भैंसों को अब तक वैक्सीन लगाए जा चुके हैं। पशुपालन के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 15 हजार करोड़ रुपए का फंड दिया जाएगा।
5) हर्बल खेती: उन्होंने कहा कि हर्बल खेती के लिए 4000 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड्स (NMPB)25 लाख हेक्टेयर में इसकी खेती होगी। हर्बल खेती से किसानों को 5000 करोड़ की आय होगी। हर्बल प्लांट की मांग दुनियाभर में बढ़ रही है। कोविड-19 के समय हमारे हर्बल प्लांट बहुत काम आए हैं। जन औषधि की खेती करने के साथ उसका नेटवर्क किया जा रहा है।

6) मधुमक्खी पालन: वित्त मंत्री ने कहा कि 2 लाख मधुमक्खी पालकों के लिए 500 करोड़ रुपए की योजना है। ग्रामीण इलाकों में जो लोग मधुमक्खी पालन करते हैं उन्हें इससे सपोर्ट मिलेगा।उनकी आय बढ़ेगी और लोगों को अच्छा शहद मिल पाएगा।

7) टॉप-टू-टोटल योजना: टॉप-टू-टोटल योजना में 500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह पहले टमाटर, प्याज, आलू के लिए था। ऑपरेशन ग्रीन का विस्तार टमाटर, प्याज और आलू के अलावा बाकी सभी फल और सब्जियों के लिए भी किया जाएगा। इसको संकट की घड़ी में पायलट योजना के रूप में देखा जाएगा और इसको आगे बढ़ाया भी जा सकता है। इसमें 50 फीसदी सब्स्डी मालभाड़े पर दी जाएगी और 50 फीसदी सब्सिडी स्टोरेज के लिए होगी। इसमें कोल्ड स्टोरेज भी शामिल है।
आवश्यक वस्तुओं के लिए जो कानून 1955 में बनाया गया था, उसमें बदलाव किया जा रहा है। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ेगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। तिलहन, दलहन, आलू आदि जैसे प्रॉडक्ट्स को इसमें डि-रेग्युलेट किया जाएगा, जिससे किसानों को लाभ मिल सके। कृषि क्षेत्र के लिए जो भी कानूनी व्यवस्था करनी पड़ेगी वो करेंगे। किसानों को उचित मूल्य मिले, इसके लिए यह बड़ा कदम होगा।

किसानों की निश्चित आय, जोखिम रहित खेती और गुणवत्ता के मानकीकरण के लिए एक कानून बनाया जाएगा। इससे किसानों का उत्पीड़न रोका जाएगा और किसानों के जीवन में सुधार आएगा। वो निर्यातकों और बड़े कारोबारियों के साथ काम कर सकेंगे।

इस तरह से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार कोरोना लॉक डाउन में खेती किसानी और इससे जुड़ी अर्थव्यवस्था को राहत मिले इसके लिए हर संभव प्रयास करती दिख रही है।

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