शिक्षा की वर्तमान चुनौती एवं संकट पर यूनिसेफ का सेमिनार,विधानसभा अध्यक्ष सहित दर्जनों विधायकों ने की शिरकत

संतोष कुमार सिंह

महामारी ने जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है, लेकिन बच्चों एवं छात्रों के जीवन को इसने गहरे तक प्रभावित किया है। बच्चे डेढ़ साल से अधिक समय से स्कूल से बाहर हैं। इसका प्रभाव उनके सर्वांगीण विकास पर पड़ा है:रबींद्र नाथ महतो,अध्यक्ष झारखंड विधानसभा

रांचीः यूनिसेफ ने आज शिक्षा की वर्तमान चुनौतियों एवं संकटों को लेकर एक सेमिनार का आयोजन पुराना विधानसभा क्लब में किया। झारखंड विधान सभा के अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो के अलावा विभिन्न विधानसभा क्षेत्र के लगभग 10 विधायकों ( पूर्णिमा नीरज सिंह,अनंत कुमार ओझा, पुष्पा देवी, उमाशंकर अकेला, किशन कुमार दास, विनोद कुमार सिंह) ने इस सेमिनार में हिस्सा लिया तथा अपने विचार व्यक्त किए।


मुख्य अतिथि के रूप में सेमिनार को संबोधित करते हुए, झारखंड विधान सभा के अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने कहा, “कोविड-19 महामारी के कारण शिक्षा के समक्ष उत्पन्न संकट पर चर्चा हेतु सेमिनार के आयोजन के लिए मैं यूनिसेफ की सराहना करता हूं। महामारी ने जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है, लेकिन बच्चों एवं छात्रों के जीवन को इसने गहरे तक प्रभावित किया है। बच्चे डेढ़ साल से अधिक समय से स्कूल से बाहर हैं। इसका प्रभाव उनके सर्वांगीण विकास पर पड़ा है। हालांकि सरकार ने ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा को जारी रखने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन राज्य में कई बच्चों के पास स्मार्टफोन जैसी सुविधा नहीं है, जो कि ऑनलाइन शिक्षा के समक्ष एक बड़ी चुनौती है।’’
”उन्होंने कहा “स्कूल बंद होने से न केवल बच्चों का दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है, बल्कि उनके जीवन में कई समस्याएं भी पैदा हुई हैं। बच्चों की शिक्षा को जो नुकसान हो रहा है, वह अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि हम सभी को इस पर काम करने की आवश्यकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विभिन्न अभिनव पहल के माध्यम से इस नुकसान को कम किया जा सके।’’

यूनिसेफ झारखंड के प्रमुख प्रसांत दाश ने कहा, “सुरक्षित वातावरण में बच्चों को पुनः स्कूल से जोड़ना एक चुनौती है, जिसके लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा। यदि घर एवं समुदायों में सुरक्षात्मक वातावरण नहीं है तो केवल स्कूल, महामारी से बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं कर सकते।इन प्रयासों में माता-पिता एवं परिवारों को भी शामिल करने की आवश्यकता है। विधायक गण स्कूल के प्रधानाध्यापकों के साथ जुड़कर इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं। वे इस बात की निगरानी में भी योगदान दे सकते हैं कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में कितने बच्चे स्कूल वापस आ रहे हैं? बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कोविड उपयुक्त व्यवहार तथा दूसरे अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल को बढ़ावा देने में भी उनकी प्रमुख भूमिका हो सकती हैं।’’


यूनिसेफ एवं नाइन इज माइन संस्था के द्वारा झारखंड के 464 बच्चों के साथ बातचीत के बाद तैयार किए गए शिक्षा को लेकर उनकी मांगों पर आधारित चार्टर को प्रस्तुत करते हुए,यूनिसेफ की कम्यूनिकेशन ऑफिसर, आस्था अलंग ने कहा, “स्कूल बंद होने से छात्रों की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा उनकेशारीरिक एवं मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ा है। इसने बच्चों के परिवारों के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर भी असर डाला है। स्कूलों को फिर से खोलना महत्वपूर्ण है, क्योंकि बच्चे क्लास में बैठकर ही अच्छे से सीखते हैं। स्कूल बच्चों के लिए शिक्षा, विकास, सुरक्षा तथा कल्याण के प्रमुख केंद्र हैं। यह सेमिनार बच्चों की शिक्षा के समक्ष उत्पन्न संकटको लेकर एक पहल है कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हम कैसे शिक्षा की बहाली को सुनिश्चित कर सकते हैं।’’
यूनिसेफ की शिक्षा विशेषज्ञ, पारुल शर्मा ने कोविड-19 महामारी के कारण शिक्षा के समक्ष उत्पन्न संकट के बारे में चर्चा करते हुए कहा, ’’हालांकि, बच्चों की शिक्षा और उनके सीखने की प्रक्रिया में व्यवधान को कम करने के लिए डिजिटल शिक्षा की ओर बढ़ने का प्रयास किया गया है, लेकिन देश के बाकी हिस्सों की तरह, झारखंड में भी डिजिटल विभाजन एक प्रमुख चुनौती है। इसके बावजूद झारखंड में 12-14 लाख बच्चों तक व्हाट्सएप ग्रुप, डिजी स्कूल एप तथा टेलीविजन आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया गया है। इन तमाम प्रयासों के बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों एवं वंचित समुदायों के बच्चे, जो पहले से ही हाशिए पर थे, वे अपने विशेषाधिकार प्राप्त साथियों की तुलना में काफी पीछे रह गए हैं। इसके अलावा, लड़कियों के लिए डिजिटल सुविधा तक पहुंच तथा घर आधारित शैक्षणिक मदद के कम अवसर मिले हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि ऑनलाइन संसाधन स्कूल द्वारा प्रदान किए जाने वाले शैक्षणिक माहौल और जुड़ाव की कमी को पूरा नहीं कर सकते हैं।’’

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