आलोक रंजन,युवा पत्रकार
बुन्देलखण्ड में किसान सूखे और मौसम की मार झेलने और घांस की रोटी और भाजी खाने की तस्वीर भले ही चर्चा में हों, लेकिन सैफई तो सैफई है, अपने रंग में है, हो भी क्यों न ? सूबे की सरकार और इसके मुखिया का गाँव जो है। चहक रहा है, थिरक रहा है,गुनगुना रहा है, खेल रहा है, कूद रहा है। कहीं ठुमरी, तो कहीं गजल, कहीं फाग, तो कहीं जय हो एवं धूम मचा ले धूम…लोक जीवन के हर रंग। सिर्फ यही नहीं देसी विदेशी गानों पर गंवई क्रिकेट का तड़का आईजीसीएल यानि ग्रामीण क्रिकेट लीग सिर्फ सैफई में ही संभव है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह के गांव सैफई में 17 दिनों तक चलने वाला सैफई महोत्सव में हर रोज अलग-अलग कार्यक्रम से गुलजार रहता है। ये सब कुछ हो रहा है….अखिलेश यादव के गाँव में… रणवीर सिंह यादव स्मृति सैफई महोत्सव के तत्वावधान में और इस रंग में डूबकर गाँव और उसके आस-पास ही नहीं बल्कि पूरा उत्तर प्रदेश जश्न में डूबा हुआ है । ये बात और है की किसान वर्ष मना रही अखिलेश सरकार पर बुन्देलखण्ड में किसानों को राहत के नाम पर 25 रू0, 28 रू0, के चेक बांटे जाने की खबर भी आ रही है। लेकिन सैफई को क्या? रंग में भंग डालने वाली इन ख़बरों को पास भी फटकने नहीं देना चाहता।
सैफई के लोक रंग
वंदना मिश्रा के विभिन्न पारंपरिक गीत जन्मे अवध रघुरइया हो रामा अवध पुरी में, मात कौशल्या ने गोद खिलायो हो रामा अवध पुरी में हो या अन्य पारंपरिक अवधी लोकगीत जिसमें सोहर, बधावा, हल्दी, बन्ना, जयमाल, विवाह तथा विदाई के रंग की बात करें या फाग की। महोत्सव में फाग (होली गीत) की जमकर बयार बही। गाँव के लोगों ने जमकर फाग गाया। सपा प्रमुख के पसंदीदा कार्यक्रमों में शामिल होने के कारण फाग का कार्यक्रम सैफई महोत्सव में दो दिनों तक होता है। इस कार्यक्रम में मुलायम सिंह न सिर्फ जरूर मौजूद रहते हैं, बल्कि वे खुद भी फाग गायक हैं फाग गायक है।
सैफई में चहल पहल, पीनाज मसानी ने गया गजल
‘दिल के आइने में यादों की चमक बाकी है, मेरी सांसों में तेरी महक बाकी है’ तथा ‘फूल राहों पर खिसने लगे चांदनी का मजा आ गया, आपका साथ जब से मिला जिंदगी का मजा आ गया, से लेकर ‘दमा दम मस्त कलंदर’ तक पद्मश्री गजल गायिका पीनाज मसानी गजल गाती रहीं, पंडाल में उपस्थित लोग झूमते रहे। जब तक रहेगी प्यार-मोहब्बत तब तक बनी रहेगी गजल… ‘जिंदगी का दूसरा नाम है गजल’। ये पीनाज मसानी के शब्द हैं…गजल उर्दू जुबां की ब्रांच ऑफ म्यूजिक है, ये इसी तरह लोगों के साथ रहेगी। तमाम तरह की नई चीजें आएंगी, लेकिन गजलें कभी खत्म नहीं होंगी। गजलें टीआरपी की रेस में नहीं है। ये एक आर्ट फॉम है। जैसे लाइब्रेरी में किताबों को हमेशा संभाल कर रखते हैं। ठीक वैसे ही ये भी हमेशा साथ रहेंगी।
वहीं नीदरलैंड की कलाकार ने रिंग डांस प्रस्तुत कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। बूगी-बूगी कलाकारों ने अपने लटके झटकों से युवा दर्शकों में खूब जोश भरा। इसके अलावा एबीसीडी का मतलब मुंबई के भाइयों के अंदाज में समझाकर तथा शोले में गब्बर सिंह के डायलाग पर कव्वाली प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। इंडिया गॉट टेलेंट डांस इंडिया डांस बूगी-बूगी में जलवा बिखरने वाली टीम ने अपनी प्रस्तुतियां दी। फिक्टीसियस ग्रुप के इन कलाकारों ने जय हो जय हो एवं धूम मचा ले धूम पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।
सैफई में गंवई क्रिकेट के रंग
रणवीर सिंह स्मृति सैफई महोत्सव में इंडियन ग्रामीण क्रिकेट लीग (आईजीसीएल) का रंगारंग आगाज भी हुआ। गायिका अनुष्का मनी व अमन मित्रा ने फिल्मी गीतों के जरिए कार्यक्रम में शमां बांधा। अनुष्का मनी ने डान-2 के गीत ‘जरा दिल थाम लो’ ‘इतना नशा क्यूं हो रहा है’ गीत के साथ-साथ पैरोडी गीत गाकर खिलाड़ियों के साथ-साथ दर्शकों में भी जोश पैदा किया। गायक अमन मित्रा ने रंग दे मोए गेरुआ, प्रेम रतन धन पायो, आदि गीत प्रस्तुत किए। बालीवुड के कलाकारों ने गीत संगीत से कार्यक्रम में शमां बांध दिया। सैफई महोत्सव समिति के अध्यक्ष सांसद धर्मेंद्र यादव ने शॉट लगाकर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। आईजीसीएल में इस बार 28 जनपदों की 85 टीमें भाग लेने आईं। क्वालीफाई राउंड के बाद अब आईजीसीएल में 32 टीमें भाग ले रही हैं। एंकरिंग कर रही फुटबाल इंडियन लीग की होस्ट सांगरिका चेत्री ने दर्शकों का मन मोहा।
सैफई से सीखें राजनेता
भले ही मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार पर अपने गाँव में पानी की तरह पैसा बहाकर रंगारंग जलसों के आयोजन का आरोप लगता रहा हो, लेकिन देश को मॉडल विलेज में तब्दील करने का ख्वाब बुनने वाले नेताओं को उनके इस प्रयोग से सीखना भी चाहिए। यदि बड़े—छोटे राजनेता अन्य ईलाकों को छोड़ भी दें केवल अपने गांव में ही इस तरह के लोकरंग से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करें और जिस तरह के विकास का कार्य उन्होने सैफई में किया है, केवल इतना भी कर दें, तो देश के हजारों गांव बदल जाएगें, वे मॉडल भले न बने लेकिन विकास व सुविधाओं के मामले में आगे जरूर आ सकते हैं।
(अगली कड़ी….सैफई में विकास)



