चंदन कुमार
नई दिल्ली, 30 दिसम्बर: विगत माह के चुनावी गहमागहमी और आरोप प्रत्यारोप को पीछे छोड़ अब बिहार सरकार के मंत्री केद्र के साथ समन्वय के जरिए बिहार के विकास की रफतार को तेज करने में जुट गए है। आज बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजश्वी यादव ने केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राज मार्ग मंत्री नीतिन गड़करी से उनके परिवहन भवन स्थित मंत्रालय में मुलाकात की और बिहार के विकास के लिए पूर्वं से लम्बित परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृत एवं समुचित सहयोग का अनुरोध किया। इतना ही नहीं मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब, उप मुख्यमंत्री ने कहा है कि बिहार की विकास केन्द्र सरकार के सहयोग से ही सम्भव है । विकास के मुद्ये पर राजनीति एवं अहंकार से हट कर विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा राज्य सरकार का चयन राज्य के विकास हेतु एवं केन्द्र सरकार का चयन देश के विकास के लिए किया जाता है। फलस्वरूप विकास के मूद्ये पर साकारात्मक पहल एवं विचार ही सर्वोपरि होनी चाहिए।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार के लाईफ लाइन कही जाने वाली महात्मा गाँधी सेतु के पुर्नोद्वार हेतु वाँछित कुल 2800 करोड़ की राशि वर्तमान वित्तिय वर्ष में आवंटित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप गाँधी सेतु के समानान्तर पुल गंगा नदी पर, साहिब गंज- मनिहारी के बीच, कोशी नदी पर फुलौत-बिहपुर के बीच तथा सोन नदी पर पुल निर्माण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की स्वीकृति एवं निधि सुलभ कराने हेतु अनुरोध किया है। यादव ने कहा कि पथ निर्माण विभाग द्वारा पूर्वं में भेजे गए प्रस्तावें के अनुरूप 54 राज्य उच्चपथ एवं वृहद जिला पथ को राष्ट्रीय उच्चपथ में उत्क्रमित करने की स्वीकृति आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री ने बिहार के राष्ट्रीय उच्चपथ उपभाग को 2400 किलोमीटर राष्ट्रीय उच्च पथ को वर्तमान वित्तिय वर्ष में 600 करोड़ रूपये का आवंटन प्राप्त हुआ है। जबकि नये 4 पुलों एवं महत्वपूर्ण दो पंक्ति एवं चार पंक्ति राष्ट्रीय उच्च पथों को उत्क्रमन के लिए 2200 करोड़ रूपये की आवश्यकता है।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि हाजीपुर-मुजफ्फरपुर, हाजीपुर-छपरा, पीपराकोठी-रक्सौल एवं वाराणसी औरंगाबाद पथों की दयनीय वित्तिय स्थिति को देखते हुए इन योजनाओं को कालबद्व तरीके से पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। श्री यादव ने कहा कि ई0पी0सी0 परियोजनाओं यथा- गोपालगंज-छपरा, फारबिसगंज-जोगबनी, बिहारशरीफ-मोकामा, छपरा-मुजफ्फरपुर, खगड़िया-बख्तियारपुर एवं भारत माला के पाँच परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अगले पाँच वर्षों में राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकरण को 30000 करोड़ की आवश्यकता होगी। राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकरण की पटना-बक्सर एवं पटना-डोभी सहित अनेक परियोजनाओं में क्रियान्वयन में विलंब होने का मुख्य कारण भू-अधिग्रहण के लिए कानून के अनुरूप मुआवजा का भुगतान नही होना है। फलस्वरूप राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकरण के कार्यों में न केवल विलम्ब होता है बल्कि जनविरोध का भी सामना करना पड़ता है।
तेजस्वी यादव ने बताया कि पटना-बक्सर राष्ट्रीय उच्च पथ के निर्माण के रास्ते में पड़ने वाले बिहटा शहर की समस्या के अध्ययन के लिए हाल ही में अध्यक्ष, राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकरण पटना दौरे पर आये थे। अध्यक्ष के समक्ष ही स्थानीय लोगों द्वारा बिहटा बाईपास बनाने का घोर विरोध किया गया। इस पर व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा की राष्ट्रीय उच्च पथ उपभाग द्वारा 2006-11 की बीच राष्ट्रीय उच्च पथ के पुनर्निर्माण के लिए 970 करोड़ रूपये सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार को सूचना देकर राज्य सरकार के स्तर से खर्च किया गया। अर्से बीत जाने के बाद भी अभी तक उक्त राशि राज्य सरकार को सुलभ नही कराई जा सकी। इस पर शीघ्र निर्णय लेते हुए राशि सुलभ कराई जाए।

